बुधवार, 31 अगस्त 2016

हमें हिन्दू राज्य लाना होगा।

सनातन संसार का एकमात्र धर्म हैं जो सृष्टि के साथ ही  जन्मा, बाकि सब धर्म तो यहाँ के मनुष्यों ने बनाए
आज हिन्दुओं में एकता न होने के चलते सनातन धर्म खराब अवस्था में हैं
कूछ लोग चंद वोटों और कुर्सी के लिये अपना धर्म बदनाम करने में भी नही चूकते .

किसी ने सच कहा हैं कि
हिन्दूओ का सबसे बड़ा दुश्मन खुद सेक्युलर हिन्दू ही हैं
हमें एक होना हैं पूरे हिन्दुस्थान को हिन्दूराष्ट्र बनाना हैं, संविधानिक हिन्दू राज्य व्यवस्था लागू करनी है तो सिर्फ फेसबूक- व्हाट्सएप्प पर कमेन्ट करने से कुछ नहीं होगा
हमें तन-मन-धन खर्च करके अपने धर्म विरोधियों को मिटाना होगा .
सिर्फ सोचने से कूछ नहीं होगा वरना समय निकलता जायेगा
और कुछ नहीं कर पाये तो इसका जिम्मेदार हम होंगे
हम सबको साथ रहना होगा,
हमें हिन्दू राज्य लाना होगा।

-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

🚩देश के अमर बलिदानियों के सपनों के स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए भारत स्वाभिमान दल के सदस्य बनकर अपना सक्रीय योगदान दें।

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हिन्दू विरोधी राक्षसों को चुनौती

हिन्दुओ को असहिष्णु, मुस्लिम बौद्धो पर अत्याचारी और भगवा आतंकी कहने वाले हिन्दू विरोधी राक्षसों को चुनौती-
दम है तो कोई भी राक्षस या शैतान सेक्युलर,कांग्रेसी, आपिया, बसपाई, भाजपाई| सपाई मेरे इन प्रश्नों के उत्तर दे!

1-विश्व में 56 मुस्लिम देश है,एक भी मुस्लिम देश ऐसा बताओ जहाँ हज करने पर सब्सिडी दी जाती हो?

2-एक मुस्लिम राष्ट्र ऐसा बताओ जहाँ हिन्दुओं को विशेष अधिकार दिए जाते हों?
जैसे की भारत में मुस्लिमो को !

3-केवल एक देश ऐसा बताओ जहाँ 85% बहुसंख्य 15% अल्पसंख्यको के भोग के लिए चुसे जाते हों?

4-एक भी मुस्लिम राष्ट्र ऐसा बताओ जहाँ गैर-मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष(राष्ट्रपति) बना हो ?

5-एक भी ऐसे मुल्ला या मौलवी का नाम बताओ जिसने आतंकवाद व कुरान की विभाजक आयतों के विरुद्ध फतवा निकाला हो?

6-महाराष्ट्र, बिहार, केरल, पांडिचेरी (जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक है) जैसे राज्यों ने मुस्लिम मुख्यमंत्रियों को भी चुना है!

क्या आप जम्मू-कश्मीर (जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है) में हिन्दू मुख्यमंत्री की कल्पना कर सकते है?

7-भारत - पकिस्तान के बटवारे के समय पकिस्तान में 24% हिन्दू थे जो की आज 1.5% भी नहीं रहे!
क्या कोई पकिस्तानी बता सकता है की गायब हुए हिन्दुओ के साथ क्या हुआ?
क्या हिन्दुओ के लिए भी कोई मानवाधिकार है वहां पर???
जैसे भारत में मुस्लिमो के लिए है!

8-इसके बिलकुल विपरीत भारत में मुस्लिमो की संख्या 1951 में 8%से बढ़कर आज 2016 में 15%(असली 20% कम नही) हो गयी है !
और हिन्दू 87.5 % से 85%(असली 80% ही समझिये) पर है!

9-जब हिन्दुओ ने मुसलमानों को अपने जमीन का 40% हिस्सा भाई- भाई गुनगुनाते हुए दे दिया....
तब उन्हें अपने ही भूमि पर अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे पवित्र तीन लाख स्थलों में एक मन्दिर बनाने के लिए क्यों रोना पड़ रहा है?

10-गाँधी ने सरकारी खर्च से सोमनाथ मन्दिर बनवाने के लिए विरोध किया था!
पर जनवरी 1948 में दिल्ली की मस्जिद का पुनर्निर्माण करवाने के लिए उन्होंने क्यों सरदार पटेल पर दबाव डाला सरकारी खर्च से मस्जिद बनवाने के लिए ?

11-गांधी ने " खिलाफत असहयोग आन्दोलन "(जिसे देश की आजादी से कोई लेना देना नहीं था) को समर्थन दिया था, इसके बदले में गांधी के मुस्लिम मित्रों ने हिन्दुओं को क्या दिया ?

12-महाराष्ट्र, बिहार में मुस्लिम और क्रिश्चन अल्पसंख्यक है, और उन्हें वहां पर अल्पसंख्यक होने के विशेषाधिकार और सेवाएं प्राप्त हैं!
तो फिर जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, मिजोरम में हिन्दू अल्पसंख्यक क्यों नहीं?
वहां पर हिन्दुओ को क्यों अल्पसंख्यक अधिकारों से वंचित रखा गया है ?

13-जब हज यात्रा के लिए सब्सिडी दी जाती है, तो अमरनाथ,कैलाश मानसरोवर यात्रा पर टैक्स क्यों लगाया जाता है?

14-जब क्रिश्चन और मुस्लिम स्कूलो में कुरान और बाइबिल पढाई जा सकती है!
तो हिन्दू विद्यालयों में वेद, रामायण और गीता क्यों नहीं पढ़ाई जा सकती ?

हिन्दुओ की समस्यायें सामने आने पर उनको नजरअंदाज कर दिया जाता है!
पर मुस्लिम समस्या पर नही!
ये भेदभाव क्यों?
आपको ऐसा क्यों लगता है की किसी का हिन्दू होना ही एक समस्या है????

16-गोधरा के बाद छिड़े दंगो को एक हद से ज्यादा उठाया गया, बल्कि कश्मीर में 5 लाख हिन्दुओ का पूर्ण रूप से पतन हुआ उसके बारे में कोई बात करने को भी तैयार नहीं!
क्यों?

17-मंदिरो के पैसो को मुसलमान और क्रिस्चनो के उत्सवो में उड़ाया जाता है, यद्यपि मस्जिद व दरगाहो का पैसा जिहाद, दंगे, लव जिहाद और धर्म परिवर्तन में खर्च होता है
और चर्च का पैसा धर्मपरिवर्तन करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है!!

18-अब्दुल रहमान अंतुले को मुंबई के सिद्धविनायक मन्दिर का ट्रस्टी बनाया गया!
क्या कोई हिन्दू किसी मदरसा या मस्जिद का ट्रस्टी बन सकता है?

19-अगर हिन्दू असहिष्णु है तो बताओ की कैसे मस्जिद और मदरसे मन्दिर तोड़ कर भी बनाये जाते हैं और दिनों दिन बढ़ते जा रहे है?
कैसे मुसलमानों को सड़क पर नमाज पढने दिया जाता है?

कैसे मुसलमानों को दिन में 5 बार लाउड स्पीकर पर ये कहने दिया जाता है की "अल्लाह के सिवाय दूसरा कोई भगवान ही नहीं "

"मन्दिर शैतान का घर है और मस्जिद खुदा(भगवान) का"

ये विचार किसी संघठन या राजनैतिक पार्टी के सदस्य के नहीं बल्कि एक सच्चे मुसलमान के है!

जवाब चाहिए !

हिन्दू भाइयों और बहनों के लिए बस इतना ही कहूँगा की अब आँखे खोल लो!
जाग जाओ!

और हथियार उठा लो धर्मनिरपेक्षो विधर्मियों के खिलाफ!
जय श्री राम

-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

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आर्यावर्त्त (भारत)देश के मूल निवासी आर्य

🌻🌷🌻🌷ओ३म्🌻🌷🌻🌷

इस देश को आर्यों ने ही बसाया है और इसका नाम "आर्यावर्त" रखकर इस पर करोड़ों वर्ष शासन चलाया है। इस देश का असली व पहला नाम आर्यावर्त्त है और इसी नाम से ही यह सब पुरानी पुस्तकों में आया है और इसी नाम को सब इतिहासकारों ने अपनी एतिहासिक पुस्तकों में बताया है। और "भारतवर्ष","हिन्दुस्तान","इण्ड़िया", आदि नाम थोड़े ही समय से आये ह़ै और यह नाम इस पर होने वाले शासकों ने अपने अपने शासन काल में बनाये हैं।

आधुनिक इतिहासकार व आजकल के शिक्षित बाबू लोग तो यह बताते हैं कि इस देश को द्राविड़,कोल,भील अर्थात् अपने आपको आदिवासी कहने वाले लोगों ने बसाया है और आर्यों ने इरान से आकर इन्हें युद्ध में हराया है,व इन्हें अधीन बनाकर यहां अपना अधिकार जमाया है और चूंकि आर्य लोग इरान से आये,इसी कारण से ये आर्य कहलाये -यह कथन बिल्कुल असत्य है। यह भ्रान्ति "मैकालफी" इतिहासकारों की नई रची ऐतिहासिक पुस्तकों ने एवं इनसे शिक्षित बाबू लोगों ने फैलाई है और यह कहानी सर्वथा झूठी,काल्पनिक अथवा मनगढ़ंत बनायी है।

किसी भी पुराने इतिहास या संस्कृति की किसी भी प्राचीन पुस्तक में यह बात नहीं आयी है कि आर्यों के आने से पहले इस देश में किसी अन्य जाति का बसेरा था या आर्यों ने इरान से आकर यहां किसी बसी हुई जाति को खदेड़ा था। वास्तविकता यह है कि आर्यों ने ही तिब्बत से आकर इस देश को बसाया और इसका नाम "आर्यावर्त्त" रखकर इस पर अपना शासन जमाया।आर्यों के आने से पहले न तो इस देश का कोई अन्य नाम था और न ही किसी अन्य जाति का यहां कयाम था।

इस आर्यावर्त्त देश को बसाने के बाद ही आर्यों ने ईरान आदि देशों को बसाया और समस्त भूमण्ड़ल पर अपना चक्रवर्ती राज्य जमाया।

वस्तुतः द्रविड़,कोल,भील आदि सब जातियां आर्य वंश से है। यह द्रविड़,कोल,भील आदिवासी कहलाने वाली सब जातियां आर्यों से हैं,इन्हें आर्यों से पृथक जाति बताना एक बहुत बड़ी भूल व अज्ञानता है और यह अज्ञानता "मैकाले" नाम के अंग्रेज ने अपनी रची ऐतिहासिक पुस्तक द्वारा फैलाई है और इसी का अनुकरण करते हुए अन्य अंग्रेज लेखकों ने "आदिवासियों" की पृथक जाति बताई है। अंग्रेजों को ऐसी मिथ्या कहानी बनाने के दो विषेश लाभ थे--

🌻मैकाले द्वारा फैलाई भ्रान्ति से प्रथम लाभ:-
इससे प्रथम लाभ तो उन्होनें यह उठाया कि आर्य लोग जो इस देश को अपना निजी राष्ट्र समझकर इससे प्यार करते हैं तथा इसकी स्वतन्त्रता के लिए बलिदान व अपना जीवन तक निसार करते ह़ै ऐसी मिथ्या कहानियों द्वारा इनको भ्रान्ति में लाया जाय तथा इनकी निजी देश की भावनाओं को मिटाया जाये और इन्हें भी आक्रमणकारी और विदेशी बताया जाए तथा इनके ह्रदय व मस्तिष्क में भी विदेशीपन के भावों को बिठाया जाये ताकि यह हमारे विदेशीपन व आक्रमण पर कोई आपत्ति न लायें तथा हमारे शासन के विपरित कोई अन्य आन्दोलन न चलायें।

🌻द्वितीय लाभ:- दूसरा लाभ इन्होनें इससे यह उठाया कि यहां के लोगों में मजहबी भावनाओं व जातीयभेदों द्वारा इनमें घृणा को बढ़ाया और 'हिन्दू', 'सिक्ख', 'मुसलमानों' में अनेक प्रकार के भेदभाव उत्पन्न करके इन्हें आपस में लड़ाया व एक दूसरे का शत्रु बनाया और इस प्रकार अपनी शासन सत्ता को चिरस्थाई रखने के लिए अपना मैदान बनाया।

🌻अंग्रेजों के प्रयत्नों का दुष्परिणाम:-

अंग्रजों के ऐसे प्रयत्नों के दुष्परिणाम उनके शासनकाल में ही स्पष्ट नजर आते रहे हैं व अब भी आ रहे हैं और इसके परिणामस्वरुप मुसलमानों ने "पाकिस्तान" बनवाया और सिक्ख "नखलिस्तान" बनाने के लिए अपना जोर लगा रहे हैं, और ईसाई भी यहां की अशिक्षित और गरीब जनता को लालच के वश में लाकर ईसाई बना रहे हैं और अपनी संस्था द्वारा शक्ति बढ़ाकर "ईसाईस्तान" की नींव जमा रहे हैं।

🌻अज्ञानता की बात:- आजकल के शिक्षित लोग जिनको अपने वास्तविक इतिहास का कुछ भी ज्ञान नहीं है एवं अपनी प्राचीन संस्कृति व वैदिक सभ्यता का कुछ भी ध्यान नहीं है,इस भ्रममूलक शिक्षा के प्रभाव में आकर यह भी ऐसी मिथ्या बातों को अपना रहे हैं और समस्त भूमण्डल पर अपने चक्रवर्ती राज्य का उज्जवल इतिहास भुला रहे हैं।

🌻आर्यों का चक्रवर्ती राज्य:- आर्यावर्त के पहले राजा 'इक्ष्वाकु' से लेकर कौरव-पांडवों के शासन-काल तक अर्थात् लगभग एक अरब सतानवें करोड़ उन्तीस लाख पैंतालिस हजार वर्ष तक समस्त भूमण्डल पर आर्यों का ही चक्रवर्ती राज्य था।

🌻आर्य वंशावली:- आर्यावर्त के प्रथम राजा 'इक्ष्वाकु' की वंशावली-इनका वंश 'ब्रह्माजी' से प्रारम्भ होता है।ब्रह्माजी का पुत्र विराट,विराट का पुत्र मनु और मनु के पुत्र मारीच आदि दस पुत्र और इनके स्वयम्भू आदि सात पुत्र व इनके वंश से 'इक्ष्वाकु' प्रथम राजा हुए।

महाभारत ग्रन्थ आर्य राजाओं की वंशावली का पूर्ण वर्णन है।

🌻पाताल देश:- पाताल देश जिसे 'अमरीका' कहते हैं व अन्य सब देशों के जितने भी राजा थे वे यहां के आर्य शासन के ही आधीन थे और महाभारत के समय तक आर्यों का ही सर्वत्र संसार पर पूर्ण अधिकार था।

भारत (आर्यवर्त) के मूल निवासी आर्यों को विदेशी बताने वाले लोग वास्तव में मूढ पामर व अंग्रेजी मानसिकता के गुलाम हैं । नाम के साथ आर्य लगाने का अर्थ है- हमारे देश का नाम आर्यवर्त,हमारे पूर्वज आर्य,हमारे जीवन का उद्देश्य आर्य (श्रेष्ठ) बनना और बनाना।

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इतिहास की वही दुर्घटना दोहराइ जा रही है जो 1757 में हो चुकी हैं

1757 में तो एक मीर जाफ़र था आज हिंदुस्तान में हज़ारो मीर जाफ़र है.

हम 1757 में ही अंग्रेजो पर विजय पा लेते, उसके बाद अरब साम्राज्यवादी मुस्लिम आक्रांताओं को भी भारत से शीघ्र ही मार भगाते, हमारा अपना संविधान होता और २०० वर्षो का संघर्ष हमको झेलना न पड़ता १७५७ से १९४७ तक, और उस २०० वर्ष के संघर्ष को झेलने के लिए ६ लाख लोगों का जो बलिदान हमको देना पड़ा, वो बच गया होता. चाफेकर बंधू, भगत सिंह, चंद्रशेखर, उधम सिंह, तांत्या टोपे, मैना, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चन्द्र बोस, ऐसे- ऐसे नौजवानों का बलिदान दिया है ये कोई छोटे मोटे लोग नहीं थे. सुभाष चन्द्र बोस तो आईपीएस टोपर थे, सावरकर चाहता तो ऐश्वर्य का जीवन जी सकता था, बड़े बाप का बेटा था. भगत सिंह और रामप्रसाद बिस्मिल की भी यही हैसियत थी. चाहते तो जिन्दगी की, जवानी की रंगरलियां मानते और अपनी नौजवानी को ऐसे फंदे में नहीं फ़साते. ये सारे वो नौजवान थें जिनका खून इस देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. ६ लाख ऐसे नौजवानों का बलिदान जो हमने दिया, वो नहीं देना पड़ता. और अंग्रेजों- मुसलमानों की जो यातनाए सही, जो अपमान हमने बर्दास्त किया, वो नहीं करना पड़ता अगर एक आदमी नहीं होता, मीर जाफ़र. लेकिन चूँकि मीर जाफ़र मुसलमान था, मीर जाफ़र का लालच था, कुर्सी का और पैसे का, उस लालच ने इस देश को २०० वर्ष के लिए संघर्ष की दिशा में धकेल दिया.!!*

1757 में तो एक मीर जाफ़र था आज हिंदुस्थान में हज़ारो मीर जाफ़र है. जो देश को वैसे ही स्थिति बनाने में लगे हुए है जैसे मीर जाफ़र ने बनायी था, मीर जाफ़र ने क्या किया था, विदेशी कंपनी से समझौता किया था बुला के, और विदेशी कंपनी से समझौता करने  के चक्कर में उसे कुर्सी मिली थी और पैसा मिला था. आज जानते है हिंदुस्थान का जो नेता प्रधानमंत्री बनता है, हिंदुस्थान का जो नेता मुख्यमंत्री बनता है वो सबसे पहला काम जानते है क्या करता है ? प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है और कहता है विदेशी कंपनी वालो तुम्हारा स्वागत है, आओ यहाँ पर और बराबर इस बात को याद रखिए ये बात 1757 में मीर जाफ़र ने कही थी ईस्ट इंडिया कंपनी से कि अंग्रेजो तुम्हारा स्वागत है, उसके बदले में तुम इतना ही करना कि मुझे कुर्सी दे देना और पैसा दे देना. आज के नेता भी वही कह रहे है, विदेशी कंपनी वालों तुम्हारा स्वागत है.*

*और हमको क्या करना, हमको कुछ नहीं, मुख्यमंत्री बनवा देना, प्रधानमंत्री बनवा देना. 100– 200 करोड़ रूपये की रिश्वत दे देना, बेफोर्स के माध्यम से हो या एनरोंन के माध्यम से हो. हम उसी में खुश हो जाएँगे, सारा देश हम आपके हवाले कर देंगे. ये इस समय चल रहा है. और इतिहास की वही दुर्घटना दोहराइ जा रही है जो 1757 में हो चुकी है. जब एक ईस्ट इंडिया कंपनी इस देश को २००– २५० वर्ष इस देश को संघर्ष करने का कारण बना सकती है, लुट सकती है तो आज तो इन मीर जफरो ने 6000 विदेशी कम्पनियो को बुलाया है. सोचों! यह क्या नहीं कर सकती ?

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