बुधवार, 29 जून 2016

जानिए कैसा था अतीत का भारत – हमारा भारत।

भारत बहुत प्राचीन देश है। विविधताओं से भरे
इस देश में आज बहुत से धर्म, संस्कृतियां और
लोग हैं। आज हम जैसा भारत देखते हैं अतीत में
भारत ऐसा नहीं था भारत बहुत विशाल देश हुआ
करता था। ईरान से इंडोनेशिया तक सारा
हिन्दुस्थान ही था। समय के साथ-साथ भारत
के टुकड़े होते चले गये जिससे भारत की संस्कृति
का अलग-अलग जगहों में बटवारां हो गया। हम
आपको उन देशों को नाम बतायेंगे जो कभी भारत
के हिस्से थे।

ईरान – ईरान में आर्य संस्कृति का उद्भव
2000 ई. पू. उस वक्त हुआ जब
ब्लूचिस्तान के मार्ग से आर्य ईरान पहुंचे
और अपनी सभ्यता व संस्कृति का प्रचार
वहां किया। उन्हीं के नाम पर इस देश का
नाम आर्याना पड़ा। 644 ई. में अरबों ने
ईरान पर आक्रमण कर उसे जीत लिया।
कम्बोडिया – प्रथम शताब्दी में कौंडिन्य
नामक एक ब्राह्मण ने हिन्दचीन में हिन्दू
राज्य की स्थापना की।

वियतनाम – वियतनाम का पुराना नाम
चम्पा था। दूसरी शताब्दी में स्थापित
चम्पा भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र
था। यहां के चम लोगों ने भारतीय धर्म,
भाषा, सभ्यता ग्रहण की थी। 1825 में
चम्पा के महान हिन्दू राज्य का अन्त
हुआ।

मलेशिया – प्रथम शताब्दी में साहसी
भारतीयों ने मलेशिया पहुंचकर वहां के
निवासियों को भारतीय सभ्यता एवं
संस्कृति से परिचित करवाया। कालान्तर
में मलेशिया में शैव, वैष्णव तथा बौद्ध
धर्म का प्रचलन हो गया। 1948 में
अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो यह
सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य बना।

इण्डोनेशिया – इण्डोनिशिया किसी समय
में भारत का एक सम्पन्न राज्य था। आज
इण्डोनेशिया में बाली द्वीप को छोड़कर
शेष सभी द्वीपों पर मुसलमान बहुसंख्यक
हैं। फिर भी हिन्दू देवी-देवताओं से यहां
का जनमानस आज भी परंपराओं के
माधयम से जुड़ा है।

फिलीपींस – फिलीपींस में किसी समय
भारतीय संस्कृति का पूर्ण प्रभाव था पर
15वीं शताब्दी में मुसलमानों ने आक्रमण
कर वहां आधिपत्य जमा लिया। आज भी
फिलीपींस में कुछ हिन्दू रीति-रिवाज
प्रचलित हैं।

अफगानिस्तान – अफगानिस्तान 350
इ.पू. तक भारत का एक अंग था। सातवीं
शताब्दी में इस्लाम के आगमन के बाद
अफगानिस्तान धीरे-धीरे राजनीतिक और
बाद में सांस्कृतिक रूप से भारत से अलग
हो गया।

नेपाल – विश्व का एक मात्र हिन्दू राज्य
है, जिसका एकीकरण गोरखा राजा ने
1769 ई. में किया था। पूर्व में यह
प्राय: भारतीय राज्यों का ही अंग रहा।

भूटान – प्राचीन काल में भूटान भद्र देश
के नाम से जाना जाता था। 8 अगस्त
1949 में भारत-भूटान संधि हुई जिससे
स्वतंत्र प्रभुता सम्पन्न भूटान की पहचान
बनी।

तिब्बत – तिब्बत का उल्लेख हमारे
ग्रन्थों में त्रिविष्टप के नाम से आता है।
यहां बौद्ध धर्म का प्रचार चौथी शताब्दी
में शुरू हुआ। तिब्बत प्राचीन भारत के
सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र में था।
भारतीय शासकों की अदूरदर्शिता के
कारण चीन ने 1957 में तिब्बत पर
कब्जा कर लिया।

श्रीलंका – श्रीलंका का प्राचीन नाम
ताम्रपर्णी था। श्रीलंका भारत का
प्रमुख अंग था। 1505 में पुर्तगाली,
1606 में डच और 1795 में अंग्रेजों ने
लंका
पर अधिकार किया। 1935 ई. में अंग्रेजों
ने लंका को भारत से अलग कर दिया।

म्यांमार (बर्मा) – अराकान की
अनुश्रुतियों के अनुसार यहां का प्रथम
राजा वाराणसी का एक राजकुमार था।
1852 में अंग्रेजों का बर्मा पर अधिकार
हो गया। 1937 में भारत से इसे अलग
कर दिया गया।
पाकिस्तान – 15 अगस्त, 1947 के
पहले पाकिस्तान भारत का एक अंग था।

बांग्लादेश – बांग्लादेश भी 15 अगस्त
1947 के पहले भारत का अंग था। देश
विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान के रूप
में यह भारत से अलग हो गया। 1971 में
यह पाकिस्तान से भी अलग हो गया |

मंगलवार, 28 जून 2016

कैराना काबा (मदीना) कैसे बन रहा है ?

१. जब मोहम्मद मदीना पहुँचा, शरणार्थी होकर, तो वहाँ तीन क़बीले थे यहूदियों के। मोहम्मद कमज़ोर था कहा कि में ही वो सन्देशवाहक हूँ जिसका तुम्हें इंतजार था। वो क़बीले बोले नहीं हो।
मोहम्मद चुप रहा।
यहूदियों के तीन कवियों ने मोहम्मद के विरोध में व्यंग्यात्मक कवितायें लिखी। एक एक कर तीनों की हत्या हो गयी। यहूदी चुप रहे।
कैराना में रंगदारी ने देने पर हिंदू व्यापारियों की हत्या हुई। सब हिंदू चुप रहे।
२. मोहम्मद ने पहली लड़ाई जीती बद्र में । वापिस आकर एक यहूदी क़बीले से कहा जो ऊँटों पर रख कर ले जा सकते हो, लेकर शहर छोड़ जाओ। बाक़ी दोनो क़बीले चुप रहे।
पहले कुछ हिंदुओं ने कैराना में घर बेचे। शांतिदूतों ने बाजार भाव से ज़्यादा पर ख़रीदे । बाक़ी हिंदू चुप रहे।
३. मोहम्मद ने दूसरी लड़ाई हारीं। बोला ईमान वाले लालचीं हो गए इसलिए हारे। वापिस आते ही दूसरे यहूदी क़बीले से कहा जो सिर पर रख कर ले जा सकते हो लेकर शहर छोड़ दो। बाक़ी बचा कबीला चुप रहा।
कैराना में कुछ और हिंदुओं ने घर बेचे। बाज़ार भाव से कम पर बिके पर बिक गए। बाक़ी हिंदू चुप रहे।
४. मोहम्मद की तीसरी लड़ाई बिना फ़ैसले ख़त्म हो गयी। वापिस मदीना पहुँचा। बचे एक यहूदी क़बीले से कहा हथियार डालो। उन्होंने डाल दिए। मोहम्मद ने किशोर वय व उस से बड़े सारे पुरुषों के सिर क़लम कर दिए। औरतें व बच्चे ग़ुलाम बना कर मुसलमानो में बाँट दिये गए। 20%मोहम्मद के हिस्से में आए, आसमानी किताब में लिखे अनुसार।
मदीना, एक cosmopolitan व multicultural शहर था जिसमें सात साल पहले एक भी मुसलमान नहीं था, अब 100%शांतिपूर्ण थे। केवल सात साल में ही मदीना से यहूदी ख़त्म हो गये थे !
कैराना में अब हिंदू घरों को ख़रीदार नहीं मिलते। ख़ाली कर ताला लगा कर चले जाते है। केवल 8%अशांति बची है कैराना में।
मुसलमानो को तो नया कुछ करने की आवश्यकता भी नहीं होती। 1450 साल से उन्ही तरीक़ों का इस्तेमाल कर रहे है।
क्यूँकि काफ़िर भी ठीक उसी तरह आत्म समर्पण करते है। ना काफ़िर कुछ अलग करते, ना मुसलमानो को कुछ नया करने की ज़रूरत पड़ती।
अब आगे आपको क्या करना है ये आप पर निर्भर है ,मुसलमानो की शांति चाहिये या नहीं ? अब भी वक़्त है सम्भल जाओ भाइयो !

अब सेक्युलरों के साथ बीजेपी के नेता भी इफ्तार पार्टी दे रहे है 
आरएसएस वाले भी इफ्तार पार्टी दे रहे है 
सिक्खों के गुरुद्वारा में भी अजान के साथ रोजा खोला जा रहा है 
वाकई देश बदल रहा है इस्लाम आगे बढ़ रहा है !
!!भारत माता की जय !!

पैरासिटामोल की सच्चाई ?

बुखार की आम दवा पैरासिटामोल के बारे में ये बातें जरुर जाननी चाहिए ..यह घर घर में मौजूद एक आम दवा है इसके कई नाम है जैसे क्रोसिन ,काल्पोल इत्यादि !
पैरासिटामोल के कुछ चौकाने वाले तथ्य: पैरासिटामोल का ओवरडोज (अधिक मात्रा ) जहर है और प्राणघातक है ..यह बात कई लोगो को पता नहीं है
१) ओवर डोज़ से लीवर फेल होने से मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है
२)ज्यादा दिन लगातार लेने से किडनी फेल हो जाती है
३)लगातार लेने से लीवर पर बुरा असर पढता है और पीलिया (ज्योंडिस) हो जाता है
४)ओवरडोज क्यों होता है ? डाक्टर की लापरवाही से ..बुखार से पीड़ित डाक्टर के पास आने पर पहले से पारासिटामोल ले रहा होता है ..डाक्टर अपनी चतुराई दिखा कर उसे 'एसिटामिनोफिन' लेने को कहते है ..जो की पारासिटामोल का दूसरा नाम है ..मरीज़ इन दोनों को अलग दवा समझ कर दोनों लेता है ..और नतीजा ओवरडोज !
तुलसी के पत्ते और गिलोय की डण्डी का काढा बुखार उतारने में लाभदायक है. अनेक स्थानों पर लोग साधारण बुखार को सूर्य की धूप में कम्बल ओढकर एक घंटे पसीना लाकर ही ठीक कर लेते हैं. इसके इलावा डेंगू मलेरिया हो या टाईफाईड बुखार , ज्वरनाशक कवा्थ जो आपको पातंजलि चिकित्साल्य से 15 रूपए का पैकेट मिल जाएगा उसका काढा बना कर पी सकते है, इसकी डॉ तीन खुराक ही आम तौर पर बुखार ठीक कर देती हैं. अर्थात पन्द्रह रुपए की ये दवा कम से कम पांच लोगों का बिना किसी नुकसान के सुरक्षित और असरदार ढंग से बुखार ठीक करती है. तो अब पैरासीटामोल जैसी घातक दवा क्यों लें, आखिर स्वास्थ्य के भविष्य का प्रश्न है.

सोमवार, 27 जून 2016

"सर्वधर्म समभाव" की परिकल्पना एक झूठ है .....

"सर्वधर्म समभाव" .... यह किसी हिन्दुद्रोही सेकुलर मार्क्सवादी विचारक के मस्तिष्क की कल्पना है| धर्म तो एक ही है, वह अनेक कैसे हो सकता है? धर्म है और अधर्म है| धर्म का अर्थ मजहब या पंथ नहीं है|
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यदि पंथों और मज़हबों की भी तुलना करें तो जिस भी पंथ या मज़हब की साधना पद्धति से दैवीय और मानवीय गुणों का सर्वाधिक विकास होगा, वह पंथ ही सर्वश्रेष्ठ होगा| यही सिद्ध कर सकता है कि सर्वश्रेष्ठ मार्ग कौन सा है और सर्वधर्म समभाव क्या है| जो पंथ मनुष्य को असत्य और अन्धकार में ले जाए, वह किसी का आदर्श कैसे हो सकता है?
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निष्पक्ष रूप से हर मज़हब/पंथ के दो दो व्यक्तियों को लिया जाए और उन्हें बाहरी प्रभाव से दूर एकांत में कुछ महीनों के लिए रखा जाए| सब से कहा जाए की एकांत में रहते हुए अपने अपने मजहब/पंथ की साधना करें| फिर उन पर निष्पक्ष अध्ययन और शोध किया जाए की किस पंथ वाले में करुणा, प्रेम, सद्भाव और आनंद आदि गुणों का सर्वाधिक विकास हुआ है| आज तक किसी भी पंथ की श्रेष्ठता और सर्वग्राह्यता पर कोई वैज्ञानिक शोध नहीं हुआ है जो होना ही चाहिए था|
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किसी का जो भी स्वभाविक गुण-दोष है वह भी उसका धर्म है| शरीर का भी धर्म है भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी, सेहत आदि| इन्द्रियों के भी धर्म हैं| मन, बुद्धि और चित्त के भी धर्म हैं| मन को यदि अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो मन इतना अधिक भटका देता है कि उस भटकाव से बाहर आना अति कठिन हो जाता है| मन नियंत्रण में है तो वह हमारा परम मित्र है| यह मन का धर्म है| बुद्धि का धर्म विवेक है, अन्यथा तो यह कुबुद्धि है| चित्त स्वयं को श्वास-प्रश्वास और वासनाओं के रूप में व्यक्त करता है, यह उसका धर्म है| यही चित्त की वृत्ति है जिसके निरोध को योग कहा गया है| हमारा बल प्राणों का धर्म है| सब तरह की उलझनों को छोड़कर भगवान की शरण लेना ही सब धर्मों का परित्याग और शरणागति है| शरणागति भी बहुत बड़ा धर्म है|
किसी का जो भी सर्वश्रेष्ठ स्वाभाविक गुण है वह उसका स्वधर्म है, जिसमें निधन को श्रेय दिया गया है|
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स्वधर्म की चेतना अंतर में होती है| इसका उत्तर निष्ठावान को प्रत्यक्ष परमात्मा से मिलता है| बुद्धि से यह अगम है|
>"अपने आत्म-तत्व में स्थित होना ही स्वधर्म है|"<
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मैं अपने लघु आध्यात्मिक लेखों के साथ साथ प्रखर राष्ट्र भक्ति के ऊपर भी लिखता हूँ क्योंकि मेरे लिए भारतवर्ष ही सनातन धर्म है और सनातन धर्म ही भारत है| भारत के बिना आध्यात्म की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता| परमात्मा की सर्वाधिक अभिव्यक्ति भारत में ही हुई है|
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सनातन धर्म ही भारत का भविष्य है, और भारत का भविष्य ही इस पृथ्वी का भविष्य है| इस पृथ्वी का भविष्य ही इस सृष्टि का भविष्य है| भारत का पतन धर्म का पतन है और भारत का उत्थान धर्म का उत्थान है| भारत और आध्यात्म भी एक दूसरे के पूरक हैं|
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आप सब के हृदयों में स्थित परमात्मा को मैं नमन करता हूँ| मेरी शुभ कामनाएँ और अहैतुकी प्रेम को स्वीकार करें| धन्यवाद|
सत्य सनातन धर्म की जय | भारत माता की जय | ॐ नमः शिवाय ||

रविवार, 26 जून 2016

क्यों झूठ बोलते हो साहब कि चरखा चलाने से आजादी पाई थी..?

एक नेता जी की बीवी के साथ कोई जबरदस्ती कर रहा था तो वो नेता जी भागकर अंदर गए और चरखा उठा लाये और चलाने लगे।
बीवी को गुस्सा आया और वो चिल्लाई :
तुम पागल हो क्या ये गुंडा मेरे साथ गलत कर रहा है और तुम चरखा चला रहे हो ??
पति : चरखे से तो अंग्रेज भाग गए फिर ये किस खेत की मूली है ये भी भाग जाएगा! ये कहकर नेता जी चरखा और जोर से चलाने लगे जब तक वो गुंडा उस नारी के साथ और ज्यादा बदतमीजी करता रहा!
बीवी रोती हुई गुस्से में पति से बोली छोडो ये चरखा और pls मुझे बचाओ!
ये सुनकर पति ने चरखा side में पटका और उठकर बलात्कारी के निकट गया और पूरी विनम्रता से बोला मेरी पत्नी को छोड़ दीजिये!
इतना सुनते ही उस गुंडे ने पति के एक खेंचके झाँपट मार दिया!
तो पति ने दूसरा गाल आगे कर दिया और फिर बोला pls मेरी बीवी को छोड़ दीजिये उस गुंडे ने दूसरे गाल पे भी एक कसके झाँपट मार दिया
पति बेहोश हो गया!
इतने में एक भगत सिंह नाम का वीर वहाँ से गुजरा, उसने जब चीख पुकार सुनी तो वो अंदर गया और उस महिला को बचाने के लिए गुंडे से भिड़ गया और आखिर में उस गुंडे को भगा दिया!
उस औरत ने भगत सिंह को धन्यवाद दिया, तभी पुलिस वहाँ पहुंच गयी तो पत्नी ने सारा क्रेडिट अपने पति को दे दिया और दोनों लाल गाल दिखा कर पति ने बहादुरी के सबूत दिखा दिए,
पुलिस ने उस पति को वीरता चक्र दिया और भगत सिंह को पकड़ के गुंडा गर्दी करने के आरोप में जेल में डाल दिया !
नोट:- इस घटना का इतिहास से कोई लेना देना नही है..
कितने झूले थे फाँसी पर और कितनों ने गोली खाई थी,
क्यों झूठ बोलते हो साहब कि चरखा चलाने से आजादी पाई थी..?????????

- विश्वजीत सिंह अनन्त

राष्ट्रीय अध्यक्ष

भारत स्वाभिमान दल

सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन

सोमवार, 20 जून 2016

पिशाच औरंगजेब ने ध्वस्त कराया था काशी विश्वनाथ मन्दिर

16वीं शताब्दी में इस्लामिक नरपिशाच औरंगज़ेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का ऑडर पास किया था बीकानेर म्युज़िम में ऑडर देखें
आतंकवादियों के लिए रात में चलने वाले कोर्ट के लिए ये एक सीधा सा केस है , कोर्ट और सरकार चाहे तो वहां तुरंत मंदिर बन जाए । लेकिन सब हरामखोर हिन्दू विरोधी है ।

स्वयं को आर्य कहलाते थे गौतम बुद्ध

आर्यो को विदेशी कहने वालो भगवान् बुद्ध ने तो स्वयं को आर्य जाती में उत्पन्न बताया है , तो फिर उनका देशीकरण कैसे हो गया ? अब वही रटा रटाया हुआ वाक्य मत बोलना कि ये भी ब्राम्हणों ने ही लिखा है -
ययोहं भगिनि! अरियाय जातिया जातो,
नाभिजानामि सच्चिच्च पाण जीविता वोरोपेता।
तेन सच्चेन सोत्थि ते होतु सोत्थि गबभस्साती।
दैनिक सुत्तपठन / पृष्ट स. 134
अर्थात - बुद्ध ने कहा ,.... बहिन ! जब से मैने आर्य जाति में जन्म लिया है तब से मैं जानबूझकर जीव् हिंसा करने की बात नही जनता । उस सत्य वचन से तेरा कल्याण हो और तेरे गर्भ का भी कल्याण हो ।'
मित्रो प्रस्तुत प्रसंग दैनिक सुत्तपठन नामक पुस्तक के अंगुलिमाल परित् से लिया गया है जिसके लेखक डा. भदन्त ज्ञानरत्न महाथेरो जी है।
इस सन्दर्भ में एक कथा श्रवण कीजिये
एक बार जब भंते अंगुलिमाल प्रातः सामान्य पिण्डपात ( भिक्षाटन के लिए जा रहे थे तो एक गांव में उन्हों ने एक घर से प्रसव पीड़ा से पीड़ित एक महिला की चीत्कार सुनी उसकी पीड़ा से उनका मन उद्वेलित हो उठा और वो भागे भागे बुद्ध की सरन में गए और सारा वृतांत कह सुनाया और उक्त महिला को प्रसव वेदना से मुक्त कराने का भगवान् बुद्ध से विनय किया ।
तब भगवान बुद्ध ने उन्हें तुरंत अपने धम्म सन्देश के साथ महिला के घर जाने को कहा और अपने धम्म बल के सत्य प्रभाव से उस महिला को प्रसव वेदना से मुक्ति दिलाने का अश्वासन दिया - जिसके फल स्वरूप उक्त महिला ने सामान्य प्रसव किया।
तभी से बौद्ध धम्म में इस सूत का पाठ सामान्य पीड़ा रहित प्रसव के लिए तैयार महिलाओ की पीड़ा को दूर करने के निमित्त किया जाने लगा।
उपरोक्त प्रसंग के साथ मुझे अपनी बात रखने की आवश्यकता इस लिए भी पड़ी की आज कल के तथाकथित मूलनिवासी नवबोद्ध टाइप लोगो ने समाज में व्यभिचार और दुष्प्रचार की गन्दगी मचा रक्खी है बिना बुद्ध को जाने समझे उनके संदेशो का अध्ययन किये मेंढक की तरह टर्र टर्र करते हुवे स्वयं को बौद्ध और बुद्ध के संदेशो का वाहक कहते हुवे छाती फुलाते है। इसी क्रम में इन्होंने समाज में दो दुष्प्रचार बड़ी तेजी से फैलाये की आर्य एक जाती थी और वो यूरेशिया से आये थे ।
अक्ल से पैदलो आर्य कोई जाति नहीं बल्कि श्रेष्ठ मनुष्य को आर्य कहा जाता था ।
गधो अंग्रेजो के लिखे इतिहास की लीद ही ढोते रहोगे क्या ?

हव्सी दरिंदा था अकबर

अकबर की महानता का गुणगान तो कई इतिहासकारों ने किया है लेकिन अकबर की औछी हरकतों का वर्णन बहुत कम इतिहासकारों ने किया है
अकबर अपने गंदे इरादों से प्रतिवर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था जिसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था अकबर इस मेले में महिला की वेष-भूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देती थी उसे दासियाँ छल कपटवश अकबर के सम्मुख ले जाती थी एक दिन नौरोज के मेले में महाराणा प्रताप की भतीजी छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह की पुत्री मेले की सजावट देखने के लिए आई जिनका नाम बाईसा किरणदेवी था जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ

बाईसा किरणदेवी की सुंदरता को देखकर अकबर अपने आप पर काबू नही रख पाया और उसने बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखे से जनाना महल में बुला लिया जैसे ही अकबर ने बाईसा किरणदेवी को स्पर्श करने की कोशिश की किरणदेवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को ऩीचे पटकर छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी और कहा नींच... नराधम तुझे पता नहीं मैं उन महाराणा प्रताप की भतीजी हुं जिनके नाम से तुझे नींद नहीं आती है बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है अकबर का खुन सुख गया कभी सोचा नहीं होगा कि सम्राट अकबर आज एक राजपूत बाईसा के चरणों में होगा अकबर बोला मुझे पहचानने में भूल हो गई मुझे माफ कर दो देवी तो किरण देवी ने कहा कि आज के बाद दिल्ली में नौरोज का मेला नहीं लगेगा और किसी भी नारी को परेशान नहीं करेगा अकबर ने हाथ जोड़कर कहा आज के बाद कभी मेला नहीं लगेगा उस दिन के बाद कभी मेला नहीं लगा

इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित सगत रासो मे 632 पृष्ठ संख्या पर दिया गया है बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेटिंग मे भी इस घटना को एक दोहे के माध्यम से बताया गया है

किरण सिंहणी सी चढी उर पर खींच कटार
भीख मांगता प्राण की अकबर हाथ पसार

धन्य है किरण बाईसा उनकी वीरता को कोटिशः प्रणाम !

गुरुवार, 16 जून 2016

साई को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है ?

हिन्दुत्व को कमजोर करने के लिए साईं को बढावा यह इतना क्लिष्ट है कि यह सामान्य हिन्दू जल्दी समझ नही पाएगा
1992 के बाबरी विध्वंस ने पूरी दुनिया को झकझोर कर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर हिन्दू अपने पर आता है तो वह कुछ भी कर सकता है तब कुछ मुस्लिम संगठनो ने हिन्दुत्व को कमजोर करने के लिए एक बहुत ही गहरी साजिश के तहत हिन्दुओ के एक और राम जिसे कुछ मुर्ख हिन्दू साईं राम कहते है अवतरित किया
अब आपको बताते है कि यह संभव कैसे हुआ यह तो आप भी जानते होंगे कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री दाउद इब्राहिम और अबू सलेम के इशारे पर चलती थी उसी फिल्म इंडस्ट्री के सहयोग से साईं बाबा को साई राम बनाने का घृणित खेल शुरू हुआ
अब आप लोग स्वयं ही सोच कर बताइए क्या 1992 के पहले भी आप लोगो ने कभी साईं राम लिखा देखा है इस पर आप गहन अध्ययन करके बता सकते है 1992 के पहले आप एक भी जगह साईं राम लिखा नही दिखा सकते 1992 तक साईं केवल एक बाबा थे 1992 के बाद साईं बाबा का साईं राम के रूप में प्रकट होना हिन्दुत्व के लिए खतरे की घंटी है
इसलिए जागो हिन्दू जागो और साईं जैसे पाखण्डी को अपने भगवान श्री राम के बराबर मत खडा करो वर्ना वह दिन दूर नहीँ जब यह प्रचारित किया जाएगा कि साईं राम कहते थे मेरे लिए मन्दिर मस्जिद बराबर है इसलिए अयोध्या मे बाबरी मस्जिद ही ठीक है वाराणसी मे ज्ञानव्यापी मस्जिद ही ठीक है !

मंगलवार, 14 जून 2016

हिन्दू समाज की लडकियाँ ही सबसे अधिक लव जिहाद की शिकार क्यों बनती है ?

हिन्दू समाज की लडकियाँ ही सबसे अधिक लव जिहाद की शिकार क्यों बनती है ?

भारत स्वाभिमान दल

एक प्रश्न अनेक पाठकों के मन में उठ रहा होगा कि हिन्दू समाज की लडकियाँ ही सबसे अधिक क्यूँ लव जिहाद का शिकार बनती हैं?

1. क्यूंकि न तो हिन्दू समाज अपनी संतानों को धार्मिक शिक्षा देते है।

2. क्यूंकि न ही हिन्दू समाज सनातन वैदिक धर्म की श्रेष्ठता और अवैदिक मतों पंथों की निकृष्टता से अपनी संतानों को अवगत करवाते है।

3. क्यूंकि न ही हिन्दू समाज अपने घरों में धार्मिक माहौल रखता है?

4. बॉलीवुड की अश्लील फिल्में एवं साँस बहु के लड़ने वाले सीरियल से परिवार का वातावरण अधिक दूषित है।

5. राष्ट्रीय सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर परिवार के सदस्यों में परस्पर वार्तालाप की कमी होने से परिवार के सदस्यों के चिंतन की दिशा एक नहीं है।

6. हिन्दू समाज में केवल पैसा जोड़ना धार्मिक होने से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

7. हिन्दू समाज अपनी संतानों को हमारे महान इतिहास, वीर पुरुषों, उनके तप और बलिदान की कहानियों से प्राय: अनभिज्ञ रखना।

8. धर्म के नाम पर भोझिल और उबाऊ अन्धविश्वास रुपी कर्म कांड को अधिक महत्व देना एक प्रमुख कारण है।

9. हिन्दू समाज अपनी वृद्धि के विषय में कभी नहीं सोचता। 

10.हिन्दू समाज अपने धर्मरक्षकों का सहयोग करने के स्थान पर उनका विरोध करना धार्मिक कर्त्तव्य समझता है।

हम पाठकों से बहुत बार अनुरोध कर चुके है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को धर्म शिक्षा दे, इसके लिए हमने सनातन संस्कृति संघ के माध्यम से धर्म शिक्षा की पीडीएफ पुस्तक भी तैयार कर दी, लेकिन कुछ जागरूक व्यक्तियों को छोड़ दे तो अधिकांश हिन्दुओं की दृष्टि में आज भी धर्म शिक्षा का कोई महत्व नहीं है ?

- विश्वजीत सिंह अनन्त

राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन

सोमवार, 13 जून 2016

भाग हिन्दू भाग

भारत स्वाभिमान दल

कैराना के बाद यूपी के एक और क्षेत्र ‪कांधला‬ में भी हिन्दू परिवारों का पलायन!
कांधला में 75%मुस्लिम आबादी है!
90 के दशक से अबतक करीब 200 परिवारों का पलायन!
*काबा से भागा, कंधार से भागा, पाकिस्तान से भागा, बांग्लादेश से भागा, कश्मीर से भागा, मेवात से भागा , कैराना से भागा,*
*अरे भाग "अभागे" भाग ।*

भाग हिन्दू भाग...

👉पर भागते समय कोई "चींटी" नहीं मरे ये भी ध्यान रखना
👉वे मूर्तियां भी लेकर भाग जिनके भरोसे तूने कर्म करना छोड़ दिया पूरा जीवन उनकी पूजा की, अपनी सुरक्षा और उन्नति के लिए
👉गीता लेकर भाग , जिसके भरोसे बैठा रहा तू हाथ पर हाथ रख कर कि जब जब धर्म की हानि होगी कोई तेरी रक्षा को आएगा
👉जागरण के ढोल मंजीरे लेकर भाग , जिन्हें रात-रात भर बजाता रहा तू कि कोई शक्ति जाग जाय और तेरा कल्याण हो
👇
भाग और भाग जब तक दुनिया का कोई कोना सुरक्षित हो

वजहें वही
‪#‎कैराना‬ वाली जनसंख्या जिहाद !!

- विश्वजीत सिंह अनन्त

राष्ट्रीय अध्यक्ष

भारत स्वाभिमान दल

सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन

श्री राम धुन रघुपति राघव राजा राम

'रघुपति राघव राजा राम' इस प्रसिद्ध भजन का नाम है..”राम धुन” .
जो कि बेहद लोकप्रिय भजन था.. कालनेमिवादी मोहनदास करमचन्द गाँधी ने बड़ी चालाकी से इसमें परिवर्तन करते हुए अल्लाह शब्द जोड़ दिया..

आप भी नीचे देख लीजिए..
असली राम धुन भजन

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम

मोहनदास गाँधी द्वारा बेहद चालाकी से किया गया परिवर्तन..
गाँधी का राम धुन भजन

रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान

**अब सवाल ये उठता है, कि मोहनदास करमचन्द गाँधी को ये अधिकार किसने दिया की,..
हमारे आराध्य भगवान श्री राम को सुमिरन करने के भजन में ही पिशाच समुदाय के आराध्य अल्लाह को घुसा दे...

अल्लाह का हमसे क्या संबंध?
क्या अब सनातन हिंदू अपने ईष्ट देव का ध्यान भी अपनी मर्ज़ी से नही ले सकता..?

और जिस भी व्यक्ति को हमारी बात से कष्ट हुआ हो..
वो इसी भजन को अल्लाह शब्द वाला संस्करण ज़रा किसी मस्जिद मे चलवा कर दिखा दे.. फिर हमसे कोई गीला शिकवा करे ।

आप बताईये क्या गाँधी को इस तरह राम भजन में बदलाव या ‪‎अल्लाह‬ शब्द घुसाना सही था क्या
इस पोस्ट पर आपका क्या विचार है जरुर बतायें
🙏🙏जय श्री राम 🙏🙏

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन

http://www.bharatswabhimandal.org

केवल देशी गाय के बारेमें कहा गया है

गाय के गोबर में लक्ष्मी और मूत्र में गंगा का वास होता है, जबकि आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग कहे गए हैं। गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें ऐसे कइ तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है। मौसम परिवर्तन के समय होने वाली कई बीमारियां दूर ही रहती हैं। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। इसके कुछ गुण इस प्रकार हैं :-
- गौमूत्र को मेध्या और हृदया कहा गया है। इस तरह से यह दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करता है। यह मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय की रक्षा करता है और इन अंगों को प्रभावित करने वाले रोगों से बचाता है।
-इसमें कैसर को रोकने वाली ‘करक्यूमिन‘ पायी जाती है
-कैंसर की चिकित्सा में रेडियो एक्टिव एलिमेन्ट प्रयोग में लाए जाते है | गौमूत्र में विद्यमान सोडियम,पोटेशियम,मैग्नेशियम,फास्फोरस,सल्फर आदि में से कुछ लवण विघटित होकर रेडियो एलिमेन्ट की तरह कार्य करने लगते है और कैंसर की अनियन्त्रित वृद्धि पर तुरन्त नियंत्रण करते है | कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते है | अर्क आँपरेशन के बाद बची कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करता है | यानी गौमूत्र में कैसर बीमारी को दूर करने की शक्ति समाहित है।
- देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ‘`प्रोपिलीन ऑक्साइड” उत्पन्न होती है, जो बारिस लाने में सहायक होती है| इसी के मिश्रण से ‘इथिलीन ऑक्साइड‘ गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है |
-अमेरिका ने गौ मूत्र पर 6 पेटेंट ले लिए हैं, और अमेरिकी सरकार हर साल भारत से गाय का मूत्र आयात करती है और उससे कैंसर की दवा बनाती हैं । उसको इसका महत्व समझ आने लगा है। जबकि हमारे शास्त्रो में करोड़ो वर्षो पहले से इसका महत्व बताया गया है।

काबा से कैराना तक

ll ॐ ll निरन्तर हो रहा है हिन्दुओं का पलायन अरब के काबा से उत्तर प्रदेश के कैराना तक l
भगवान शिव का पवित्र शिव मन्दिर काव्येश्वर महादेव ही आज का काबा है, रामायण कालीन यज्ञ स्थली मख मेदनी ही आज मक्का मदीना है, भारत के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के अधीन हिन्दू राज्य अर्व ही आज का इस्लामिक राज्य अरब है, अरब के संस्थापक हिन्दू राजा अर्व थे, उनके नाम पर ही देश का नाम अर्व था, जो बाद में विकृत होकर अरब हो गया थी, कालान्तरण में इस्लाम का उदय होने पर अरब की सुसंस्कृत वैदिक सभ्यता- संस्कृति इस्लामिक आतंकवादियों की भेंट चढ़ गया | वैदिक अहिंसा को छोड़कर नपुंसकों की तथाकथित अहिंसा के पथ पर चलने वाले हिन्दुओं को जबरन मुसलमान बना दिया गया | अरब देश पिशाचों के हाथों में पड़कर बर्बाद हो गया | कौरवों की माँ गांधारी अफगानिस्तान के कंधार से थी, चन्द्रगुप्त मौर्य का कंधार और काबुल तक राज्य था, अरब और तुर्क के आक्रमणों ने अफगानिस्तान में हिन्दुओं का इतना अधिक कत्लेआम जिस पर्वत श्रृंखला में हुआ उसका पर्वत श्रृंखला का नाम ही हिन्दू कुश ( कुश = क़त्ल ) हो गया , आज का पाकिस्तान वर्ष 1947 से पूर्व हिन्दुस्थान था , हमारे देश के नेताओं ने धर्म के आधार पर इस देश का बटवारा किया और वहां हिन्दू लाखों की संख्या में मरवा दिए गए और शेष को वहां से भागना पड़ा l विभाजित भारत में कश्मीर और असम से भी हिन्दुओं का पलायन हुआ और कोई कुछ भी नहीं कर पाया l अब पलायन उत्तर प्रदेश के कैराना के बाद एलम से भी होने के दुखद समाचार आ रहे है l
हमारे देश के मीडिया का एक बहुत बड़ा वर्ग अख़लाक़ पर लगातार न्यूज़ चलाएगा लेकिन हिन्दुओं के पलायन पर प्राय मौन व्रत रखेगा , ताकि हिन्दू पलायन इस देश का मुद्दा नहीं बने l दुःख इस बात का है कि इन न्यूज़ चेनलों को चलाने वाले विज्ञापन हमारे ही लोग जाने अनजाने में देते है और इन सांपो को दूध पिलाते है l क्या हमारा सोशल मीडिया ऐसे विज्ञापनों दाताओं से यह विज्ञापन रुकवा नहीं सकता ?
मेरा आप से आग्रह है कि अफज़ल गैंग के इन न्यूज़ चेनलों के विज्ञापन अपने व्यक्तिगत प्रयासों से रुकवाएं अन्यथा हिन्दुओं के पलायन को रोकने के लिए कोई भी सामने नहीं आएगा और न ही देश की राजनीती में यह कभी मुद्दा बनेगा l

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन


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