मैं यूनान से आए मैगस्थनीज जो लगभग 2400 साल पहले भारत आए थे और जिनहोने अपनी पुस्तक इंडिका में भारत के बारे में विस्तार से लिखा है , के बारे मे पढ़ रहा था। उन्होने भारत के उस समय के समाज के बारे मे लिखा पर कोई नीची जाति होती थी या कुछ लोग अछूत होते थे ये कही भी नहीं लिखा है । किसानो के बारे मे उन्होने लिखा की दुश्मन के सिपाही तक भी उनह नुकसान नहीं पहुचाते थे न ही उनकी फसलों को नष्ट करते थे । तो फिर ये जाति आई कब ?
फिर मैंने अलबरूनी जो महमूद गजनबी के समय मे भारत में रहा उसकी किताब " तारीख अल हिन्द " भी पढ़ी । उसमे भी जैसा जातिवाद हमे पढाया जाता है और जिसे विकसित होते हमने अपनी आंखो से देखा है , का वर्णन नहीं है । तो ये जाति कब से शुरू हुई ?
फिर मैं पढ़ता हूँ की राजस्थान में मीरा बाई के मदिर में उनके गुरु रैदास का मदिर भी है , आज की भाषा में एक चमार उनके गुरु थे । यानि तब भी जो छुआ छूत हमे पढ़ाई गयी वैसी नहीं रही होगी ।
तो जैसा डाक्टर Tribhuwan Singh जी सप्रमाण लिखते है की भारत मे ये जाति का कोढ़ अंग्रेज़ो द्वारा भारत के घरेलू उधयोग चौपट कर देने के बाद जो भुखमरी और बेरोजगारी फैली , उसका परिणाम है। भारत में दरिद्रता भुखमरी छा गयी और जो कामगार समाज था वो पिछड़ गया । फिर मिशनरियों ने संस्कृत के धर्मग्रंथो की मनमानी व्याख्या की , शासन ने भारत की सिक्षा प्रणाली को नष्ट कर अपनी सिक्षा देश पर लाद दी और समाज मे फुट डालने वाली परमपरा और इतिहास का महिमामंडन होने लगा जो आज तक जारी है ।
अच्छा ये बताए आपमे से किसी ने मैगस्थनीज ने भारत के बारे मे क्या लिखा इस पर कभी विस्तार से लिखा पाया क्या किसी भी अखबार, मैगजीन मे या किसी भी वामपंथी इतिहासकार के लेख में ? अगर नहीं तो क्यूँ?
- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन
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