गुरुवार, 29 सितंबर 2016

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा - 6

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा

प्रश्न- ज्ञान और कर्म में से किसकी साधना करें ?
उत्तर- अन्धन्तमः प्र विशन्ति येऽविद्यामुपासते |
ततो भूयऽइव ते तमो यऽउ विद्यायाम् रताः || यजुर्वेद 40/12
जो केवल अविद्या, अर्थात केवल भौतिकवादी कर्म में लगे रहते हैं वे गहरे अन्धकार में जाते हैं और जो भौतिकवादी कर्म की अवहेलना कर केवल अध्यात्म वाद में लगे रहते हैं वे उससे भी बढ़कर गहरे अन्धकार में जाते हैं | अब जो कार्य तो करता है पर उसकी लिए ज्ञान की आवश्यकता नहीं समझता वह अँधेरे में है | जो ज्ञानार्जन में तो रत रहता है पर तदनुसार कर्म नहीं करता वह कर्मविहीन ज्ञान के कारण उससे भी गहन अन्धकार में है | ज्ञान और कर्म एक दूसरे के पूरक है, अत: मनुष्यों को इन दोनों की साधना करनी चाहिए |

प्रश्न - भाग्य क्या है?
उत्तर - हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।
प्रश्न - सुख और शान्ति का रहस्य क्या है?
उत्तर - सत्य, सदाचार, प्रेम, शौर्य, क्षमा और संघबद्ध रहना सुख का कारण हैं। असत्य, अनाचार, पॉपाचार, कायरता, घृणा और क्रोध का त्याग शान्ति का मार्ग है।
प्रश्न - चित्त पर नियंत्रण कैसे संभव है?
उत्तर - इच्छाएं, कामनाएं चित्त में उद्वेग उत्पन्न करती हैं। इच्छाओं पर विजय चित्त पर विजय है।
प्रश्न - सच्चा प्रेम क्या है?
उत्तर - स्वयं को सभी में देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सर्वव्याप्त देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सभी के साथ एक देखना सच्चा प्रेम है।
प्रश्न- तो फिर मनुष्य सभी से प्रेम क्यों नहीं करता?
उत्तर - जो स्वयं को सभी में नहीं देख सकता वह सभी से प्रेम नहीं कर सकता।
प्रश्न - आसक्ति क्या है?
उत्तर - प्रेम में मांग, अपेक्षा, अधिकार आसक्ति है।
प्रश्न - बुद्धिमान कौन है?
उत्तर - जिसके पास विवेक है।
प्रश्न - कौन हूँ मैं?
उत्तर - तुम न यह शरीर हो, न इन्द्रियां, न मन, न बुद्धि। तुम शुद्ध चेतना हो, वह चेतना जो सर्वसाक्षी है।
प्रश्न - जीवन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर - जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है।
प्रश्न - जन्म का कारण क्या है?
उत्तर - अतृप्त वासनाएं, कामनाएं और कर्मफल ये ही जन्म का कारण हैं।
प्रश्न - जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है?
उत्तर - जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है।
प्रश्न - वासना और जन्म का सम्बन्ध क्या है?
उत्तर - जैसी वासनाएं वैसा जन्म। यदि वासनाएं पशु जैसी तो पशु योनि में जन्म। यदि वासनाएं मनुष्य
जैसी तो मनुष्य योनि में जन्म।
प्रश्न - जाति क्या है?
उत्तर - जो ईश्वरकृत मनुष्य, गाय, अश्व, हाथी, घोड़ा आदि जीव- जन्तु और वृक्षादि समूह है, वह सब जाति कही जाती है |
प्रश्न - तो क्या मनुष्यों में जाति नहीं होती?
उत्तर - हाँ, मनुुष्यों में जाति नहीं होती क्योंकि मनुष्य स्वयं एक जाति है, इसमें ढाई भेद अवश्य होते है- पुरूष, स्त्री और उभयलिंगी(नपुसंक या हिजड़ा) | जो मनुष्य में इनसे अधिक भेद या जाति मानते है वे अज्ञानी है |
प्रश्न - संसार में दुःख क्यों है?
उत्तर - लालच, स्वार्थ, भय, दुष्ट- अधर्मियों को कठोर दण्ड का न दिया जाना संसार के दुःख का कारण हैं।
प्रश्न - ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की?
उत्तर - ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की।
प्रश्न - चोर कौन है?
उत्तर - इन्द्रियों के आकर्षण, जो मन को हर लेते हैं ।
प्रश्न - जागते हुए भी कौन सोया हुआ है?
उत्तर - जो आत्मा को नहीं जानता वह जागते हुए भी सोया है।
प्रश्न - कमल के पत्ते में पड़े जल की तरह अस्थायी क्या है?
उत्तर - यौवन, धन और जीवन।
प्रश्न - नरक क्या है?
उत्तर - इन्द्रियों की दासता नरक है।
प्रश्न - मुक्ति क्या है?
उत्तर - अनासक्ति ही मुक्ति है।
प्रश्न - दुर्भाग्य का कारण क्या है?
उत्तर - अकर्मण्यता, मद और अहंकार।
प्रश्न - सौभाग्य का कारण क्या है?
उत्तर - कर्मण्यता, सत्संग, विवेक और धर्म के प्रति समर्पणभाव। प्रश्न - संसार को कौन जीतता है?
उत्तर- जिसमें सत्य, कर्मनिष्ठा और श्रद्धा है।
प्रश्न - भय से मुक्ति कैसे संभव है?
उत्तर - विवेक से। प्रश्न- मुक्त कौन है?
उत्तर - जो अज्ञान से परे है।
प्रश्न - अज्ञान क्या है? उत्तर - आत्मज्ञान का अभाव अज्ञान है।
प्रश्न- मनुष्य का साथ कौन देता है?
उत्तर - धर्म और कर्म ही मनुष्य का साथ देता है |
प्रश्न - हवा से तेज कौन चलता है?
उत्तर - मन |
प्रश्न - विदेश में साथी कौन होता है?
उत्तर - विद्या |
प्रश्न - विद्या क्या है?
उत्तर - ईश्वर से लेकर पृथ्वीपर्यन्त पदार्थों का सत्य विज्ञान प्राप्त करना तथा उनका यथायोग्य उपयोग करना विद्या है |
प्रश्न - किसे त्याग कर मनुष्य प्रिय हो जाता है?
उत्तर - अहम् भाव से उत्पन्न गर्व के छूट जाने पर |
प्रश्न - कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है?
उत्तर - अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है |
प्रश्न - सर्वोत्तम लाभ क्या है?
उत्तर - आरोग्य |
प्रश्न- मत, पंथ, सम्प्रदाय से बढ़कर संसार में और क्या है?
उत्तर - धर्म |
प्रश्न - कैसे व्यक्ति के साथ की गयी मित्रता पुरानी नहीं पड़ती?
उत्तर - सज्जनों के साथ की गयी मित्रता कभी पुरानी नहीं पड़ती |
प्रश्न - इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
उत्तर - प्रतिदिन हजारों-लाखों लोग मरते हैं फिर भी सभी को अनंतकाल तक जीते रहने की इच्छा होती है, इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?
प्रश्न - तीर्थ क्या है?
उत्तर - जितने विद्याभ्यास, सुविचार, ईश्वरोपासना, धर्मानुष्ठान, सत्य का संग, ब्रह्मचर्य, जितेन्द्रियता, दुष्टों का दमन, धर्म- रक्षा, उत्तम कर्म हैं, वे सब तीर्थ कहाते हैं क्योंकि इन्हें करके जीव दुःखसागर से तर सकते हैं ।
प्रश्न - पुरूषार्थ क्या है?
उत्तर - सर्वथा आलस्य छोड़ के उत्तम व्यवहारों की सिद्धि के लिए मन, शरीर, वाणी और धन से अत्यन्त उद्द्योग (परिश्रम) करने को पुरूषार्थ कहते हैं |

क्रमश: जारी.....

निवेदक: भारत स्वाभिमान दल

बुधवार, 28 सितंबर 2016

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा - 5

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा

| ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी ||
प्रश्न - क्या ईश्वर है? कौन है वह? क्या रुप है उसका? क्या वह स्त्री है या पुरुष?
उत्तर - कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो इसलिए वह भी है उस महान कारण को ही अध्यात्म में ईश्वर कहा गया है। वह न स्त्री है न पुरुष और न उभयलिंगी।
प्रश्न - उसका स्वरूप क्या है?
उत्तर - वह सत्-चित्-आनन्द है, वह अनाकार ही सभी रूपों में अपने आप को स्वयं को व्यक्त करता है |
प्रश्न - वह अनाकार स्वयं करता क्या है?
उत्तर - वह ईश्वर संसार की रचना, पालन और संहार करता है।
प्रश्न - यदि ईश्वर ने संसार की रचना की तो फिर ईश्वर की रचना किसने की?
उत्तर - वह अजन्मा अमृत और अकारण है |
प्रश्न - भगवान कौन होता है?
उत्तर - भगवान शब्द संस्कृत के भगवत शब्द से बना है। वह व्यक्ति जो पूर्णत: मोक्ष को प्राप्त हो चुका है और जो जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर कहीं भी जन्म लेकर कुछ भी करने की क्षमता रखता है, उसे भगवान कहते है | भगवान को ईश्वरतुल्य माना गया है इसीलिए इस शब्द को ईश्वर, परमात्मा या परमेश्वर के रूप में भी उपयोग किया जाता है, लेकिन यह उचित नहीं है। जो आत्मा पांचों इंद्रियो और पंचतत्व के जाल से मुक्त हो गई है वही भगवान
कही गई है। इसी तरह जब कोई स्त्री मुक्त होती है तो उसे भगवती कहते हैं। भगवती शब्द का उपयोग माँ दुर्गा के लिए भी किया जाता है। इसे ही भगवान कहा गया है।
भगवान सन्धि विच्छेद: भ्+अ+ग्+अ+व्+आ+न्+अ
भ = भूमि
अ = अग्नि
ग = गगन
व = वायु
न = नीर
भगवान पंच तत्वों से बना है।
भगवान्- ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी, ज्ञान और वैराग्य- ये छ: गुण अपनी समग्रता में जिस गण में हों उसे 'भग' कहते हैं। उसे अपने में धारण करने से वे भगवान् हैं। यह भी कि उत्पत्ति, प्रलय, प्राणियों के पूर्व व उत्तर जन्म, विद्या और अविद्या को एक साथ जानने वाले को भी भगवान कहते हैं।
प्रश्न - धर्म क्या है?
उत्तर - जीव मात्र के कल्याण भाव से सत्य पर आधारित ईश्वर की आज्ञा का यथावत पालन और पक्षपात रहित न्याय सर्वहित करना है । जो कि प्रत्यक्षादि प्रमाणों से सुपरीक्षित और वेदोक्त होने से सब मनुष्यों के लिये यही एक धर्म मानने योग्य है; वह सदा से चला आया है, उसको सनातन धर्म कहते हैं ।
प्रश्न - अधर्म क्या है?
उत्तर - जिसका स्वरुप ईश्वर की आज्ञा को छोङकर और पक्षपात सहित अन्यायी होके मत, पंथ, सम्प्रदायों में उलझकर बिना परीक्षा करके अपना ही हित करना है । जिसमें अविद्या , हठ , अभिमान, क्रूरतादि दोषयुक्त होने के कारण वेदविद्या से विरुद्ध है, इससे यह अधर्म कहलाता है, यह अधर्म सब मनुष्यों को छोङने के योग्य है |
प्रश्न- धर्म के दस लक्षण कौन- कौन से है?
उत्तर - धृति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:।
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम् ||
अर्थात धैर्य (किसी कार्य को तब तक धैर्य पूर्वक करते रहना जब तक की उसमें सफलता न मिल जाये), क्षमा (यदि किसी सज्जन, श्रेष्ठ व्यक्ति से भूलवश कोई गलती हो जाये तो उसे क्षमा करना, लेकिन जो दुष्ट-अधर्मी या पापी हो उसे किसी भी स्थिति में क्षमा न करें, ऐसे दुरात्मा को क्षमा करने वाला स्वयं दुख उठाता है), दम (बुरी इच्छाओं व दुष्टों का दमन), चोरी न करना, शौच (अन्दर बाहर की स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, विवेक, विद्या, सत्य और क्रोध न करना (अनावश्यक क्रोध न करें, लेकिन जब अत्याधिक आवश्यकता हो तो क्रोध अवश्य करें, यह धर्म हैं। शक्तिशाली पितामह भीष्म ने पाण्डवों द्वारा द्रोपदी को जुअे पर लगाये जाने पर भी क्रोध नहीं किया जो उनके जीवन का सबसे बड़ा पाप सिद्ध हुआ, दूसरी तरफ जटायु ने अशक्त होते हुए भी माता सीता का अपहरण करने वाले राक्षसराज रावण का प्रतिकार किया जो उनके जीवन का सबसे बड़ा पुण्य था) ; ये दस धर्म के लक्षण हैं।

क्रमश: जारी.....

निवेदक: भारत स्वाभिमान दल

जब आम पर लगाई कलम बबूल की तो आम कहाँ से होये

जब बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होये । ये कहावत पुराणी हो चुकी
एकदम नवीनतम् कहावत :- जब आम पर लगाई कलम बबूल की तो आम कहाँ से होये
उपरोक्त का सम्बन्ध शतप्रतिशत बीजेपी की राजनीति से है , जिनके विरुद्ध राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता संघर्षरत रहकर बीजेपी को एक मुकाम देते है और सेकड़ो ऐसे कार्यकर्ताओ का कत्ल भी होता है , बीजेपी उन्हीं कातिलों को सत्ता के लिए गले लगाती है , उन्हें संसद , विधायक के टिकट देती है
खाली पिली जबान जोरी करने से पहले बीजेपी सांसदों का बायोडाटा विश्लेषण करें , 70 प्रतिशत हरामजादे से रामजादे बने मिलेंगे
यही काम यूपी चुनाव में होगा , 70 प्रतिशत उम्मीदवार वे होंगे बीजेपी के जिन्हें कल तक बीजेपी हरामजादे कहती थी
क्यों राम का नाम बदनाम करते हो
राम नाम है खुद्दारी का
वचन निभाने के लिए राज त्यागने वाले स्वाभिमानी का
उनके मुंह से नाम राम का अच्छा नहीं लगता
जो राज के लिए वचन पर वचन मिटाते जाते है।

-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

🚩देश के अमर बलिदानियों के सपनों के स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए भारत स्वाभिमान दल के सदस्य बनकर अपना सक्रीय योगदान दें।

संघ के नेता सेक्युलर क्यों होते हैं ?

चित्र में आप देख रहे हैं मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में RSS जिला प्रचारक सुरेश भागीरथ यादव जी को... प्राप्त सूचना के अनुसार, परसों रात को बालाघाट की बैहर तहसील में किसी ने सोशल मीडिया पर ओवैसी के खिलाफ कोई ऊटपटांग टिप्पणी कर दी, फिर कुछ विवाद हुआ. जिसके बाद वहाँ के थाना प्रभारी जिया-उल-हक ने कुछ लोगों के साथ संघ कार्यालय में घुसकर संघ के जिला प्रचारक यादव की जमकर पिटाई की. फिलहाल सुरेश यादव गंभीर हालत में जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती हैं...
इस घटना के बाद हिन्दू समाज द्वारा पार्टीवाद से ऊपर उठकर द्वारा थाना प्रभारी को बर्खास्त करने तथा अन्य आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग को लेकर बन्द रखा गया...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दिक्कत नहीं है इस अपने प्रचारक की पिटाई से, तभी तो ना संघी मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान श्री यादव को देखने गये, न प्रधानमन्त्री मोदी गये और न ही संघ के सर्वोच्च अधिकारी मोहन भागवत वहाँ गये।
आरएसएस खुस है मजे में है। ..विश्वास न हो तो बताओ आरएसएस के मुखिया का कोई प्रेस नोट आया। ..जो कुछ हुआ हिन्दुओं विरोध से हुआ आरएसएस के बेनर तले कुछ हुआ। ..........
.....कार्यवाही केवल बर्खास्तगी तक सीमित। ....... होना तो चाहिए की उसे छोटा गोधरा बना देना था। .....मगर इस पिटाई से आरएसएस को कोई समस्या नहीं है...

इससे एक बात तो सिद्ध होती है कि भाजपा शासित राज्यों की सरकार एकदम "निष्पक्ष और सेक्युलर" है... (उदाहरण, भोजशाला में हिंदुओं की जूतों से पिटाई) वर्ना बंगाल या केरल के वामपंथी राज में पुलिस की इतनी हिम्मत नहीं थी, कि वह माकपा के किसी जिला सेक्रेटरी की धुलाई कर दे... अथवा आज भी यूपी में किसी थाना प्रभारी की ऐसी औकात नहीं है कि वह किसी सपा जिला प्रभारी को कूट दे...

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हमें तो चिन्ता भविष्य की हैं, मुस्लिम जनसंख्या आज 15% है तो स्थिति विकट है, जिस दिन मुस्लिम जनसंख्या (आने वाले 15 वर्षो में) 64% होगी, तब देश- धर्म का क्या हाल होगा !
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हिन्दुओं का साथ, गैर हिन्दुओं का विकास
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विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

कब तक अत्याचार सहता रहेगा हिन्दू समाज...?

1200 वर्षों से भारत भूमि विदेशी आक्रान्तों को झेलती आ रही है। पहले इस्लामिक आक्रमणकारी पिशाच आये फिर ईसाई आये।

कहने को 1947 में हमारा देश स्वतंत्र हुआ मगर तब तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, तिब्बत, बांग्लादेश, श्री लंका आदि भारत भूमि से अलग हो चुके थे।

यह जगप्रसिद्ध है कि इंडियन संविधान की दोहरी व्यवस्थाओं के चलते भारत में हिंदुओं की आज भी वैसी ही दुर्दशा है जैसी मुगलों और अंग्रेजों के राज में थी।

भारत में हिन्दुओं को आज भी समानता का अधिकार प्राप्त नहीं हैं। गैर हिन्दुओं को इंडियन संविधान में विशेषाधिकार दिये गये हैं।

सत्ता में कोई भी दल क्यों न हो।
हिन्दू हितों की अनदेखी सदा होती आयी है। आज भी गौ माता कसाई खानों में वैसी ही कटती है।

आज भी ईसाई मिशनरियाँ निर्धन हिंदुओं का खुलेआम धर्मान्तरण कर रही हैं। 

आज भी लव जिहाद के नाम पर हिन्दू लड़कियों को धर्मान्तरित किया जा रहा है।

आज भी सरकार करोड़ों रुपये हज सब्सिडी और हज टर्मिनल बनाने के लिए देती है जबकि हिन्दू तीर्थ यात्राओं पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है ।
और ये लेकर भी हिन्दू मंदिरों का एकत्रित दान सरकारी कोष में जाता है, जिससे मौलवियों को मासिक भत्ता मिलता है।

आज भी हिन्दू यात्राओं पर पत्थरबाजी होती है और हिन्दू मंदिरों के लाऊड स्पीकर उतरवा दिए जाते है।

आज भी हिंदुओं के महान चरित्र मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम जी को कोई मिथक बताते है तो योगिराज श्री कृष्ण जी को कोई चरित्रहीन बताते हैं ।

आज भी हिन्दू देवी-देवताओं की मजाक उड़ाई जाती है और उनके मंदिर तोड़े जाते है ।

आज भी षड्यंत्र तहत निर्दोष हिन्दू संत जेल में हैं और अधर्मी लोग बाहर हैं ।

आज भी वेदादि धर्मशास्त्रों और संस्कृत का उपहास उड़ाया जाता है और अंग्रेजी को वरीयता दी जाती है।

आज भी 1200 वर्षों से हो रहे हिंदुओं पर अत्याचारों को बीती चर्चा बताते हैं और गुजरात दंगों को प्रासंगिक बताते हैं ।

किसी ने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है ???
क्या इसका कारण जानना आवश्यक नहीं है ?

सबसे बड़ा कारण हिंदुओं का जातिवादी, भाग्यवादी और सत्ता का दलाल होना है।
इसका समाधान जातिवादी मानसिकता व सत्ता की दलाली को त्याग दें, भाग्य की अपेक्षा कर्म करने पर ध्यान दें। पार्टी के स्थान पर व्यक्ति को महत्व दें, जो व्यक्ति हिन्दू धर्म की रक्षा व सम्वर्धन का कार्य कर रहा हो, उसको वोट दें। पार्टीभक्त न बनकर राष्ट्रभक्त बने।

हिन्दू समाज ने कभी भी राजसत्ता पर बैठकर हिंदुत्व के लिए कार्य करने का नहीं सोचा । कारण हिंदुओं का पार्टी भक्त और उद्देश्य की कमी होना है।

राजनेता उसकी सुनता है जिसमें शक्ति होती है और संगठन होता है। जो अपना अधिकार छीनना जानते है। मुस्लिम समाज संगठित है। आक्रामक रहता है। इसलिए राजनेता उसके अनपढ़ मौलवियों के तलवे चाटते हैं ।

साम्प्रदायिक असमानता, तीन तलाक और बहुविवाह के मुद्दे पर सरकार चुप है। गौरक्षा और मदरसों में दी जा रही आतंकवादी शिक्षा को लेकर सरकार चुप है।

ईसाई समाज भी संगठित व आक्रामक नीतियां अपनाता है। इसलिए सभी जानते थे कि मदर टेरेसा धर्मान्तरण का कार्य करती थी फिर भी विदेश मंत्री से लेकर दो प्रदेशों के मुख्यमंत्री अपनी उपस्थिति दिखाने वेटिकन गए।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में भारत माता के दो बाजू तो पहले ही कट चुके हैं । कश्मीर के रूप में मस्तक पर भी खतरा मंडरा रहा है। आज यह हालात हैं तो सन 2030 में हालात कैसे होंगे ?
जब भारत की मुस्लिम आबादी 50% से अधिक हो जाएगी।

इसलिए हिंदुओं अभी भी समय है। जातिवाद छोड़कर एक हो जाओ। पार्टी के स्थान पर हिन्दू हित को प्रधानता दो।

अन्यथा......हिंदुओं का भविष्य खतरें में हैं !!!

!!! जागो भारत जागो !!!

स्वस्थ और निरोगी जीवन के कुछ टिप्स.

1. चिन्ता/तनाव से जीवन दूर रखिये।

2. प्राकृतिक जीवन अपनायें। हवा जल, सूर्य प्रकाश, बागवानी पैदल घूमना, शाकाहार सेहत के साथी हैं।

3. कांच बिन्दु (ग्लूकोमा) आंख का गंभीर रोग है। इसके उपचार में लापरवाही घातक हो सकती है। इसके लक्षण ज्योति का कम होना आंख में दर्द एवं सर में दर्द होना है।

4. सही बैठने एवं सही खड़े होने की आदत डालें तथा कमर को सदैव सीधा रखने का प्रयास करें।

5. प्रत्येक 5 वर्ष पर तथा चोट लगने पर टिटनेस टॉक्सायड लगवाना चाहिए।

6. खांसी, बुखार या सीने का दर्द लगातार सताए तो डाक्टर से मिलना बहुत जरूरी है। हो सकता है टी.बी. हो।7. मुंह में छाला, गठान, सफेदी इत्यादि की जांच अवश्य करवायें। ये कैंसर का कारण बन सकते हैं।8. पैंतीस वर्ष की उम्र के बाद नियमित वर्ष में एक बार ब्लड, ब्लडप्रेशर, डायबिटीज की जांच अवश्य करवायें। आकस्मिक मौत का यह भी एक कारण हो सकता है।

9. बच्चों को दुर्घटना से बचाने हेतु छत, बालकनी में अकेले न जानें दे एवं जहरीले पदार्थ, छुरी, ब्लेड, चाकू आदि बच्चों की पहुंच में न रहने दें।

10. बच्चों को ज्यादा दूर या नजदीक से न पढ़ने दें, पढ़ने के लिये एक फुट तक की दूरी आदर्श है। यदि इससे बच्चे को दिक्कत होती हो तो आंखों के डाक्टर से चेकअप करायें।

11. दांतों को रात्रि में ब्रश करना सुबह ब्रश करने से ज्यादा आश्वयक है। ब्रश को ऊपर से नीचे एवं घुमाकर करें। ब्रश के बाद अंगुली से मसूढ़ों को दो मिनट तक अवश्य रगड़ें एवं प्रत्येक खान-पान के बाद कुल्ला करें।

12. बच्चों एवं बड़ों को दस्त लगने पर एक लीटर पानी में आठ चम्मच शक्कर, तीन चुटकी नमक, दो चुटकी खाने का सोडा व नींबू का रस डालकर जीवन रक्षक घोल बनाकर मरीज को पिलाते रहें।

13. सुबह जल्दी उठने के साथ व्यायाम या योगासन की आदत डालें। आप पायेंगे किआपके पास स्वास्थ्य और समय दोनों है।

14. अपनी हर कार्य ईमानदारी एवं मेहनत से कर टेंशन से बचें।

15. किसी भी बीमारी में झाड़, फूंक के चक्कर में न पड़ें किसी अच्छे डाक्टर सेउसका इलाज करायें।

16. शराब, बीयर चाहे कम तादाद या अधिक तादाद में लें नुकसान ही पहुंचाती है।

17. जहां तक हो सके बाजार का पानी न पिये उसकी जगह कोई गर्म पेय पी लें।18. बाजार की खुली बिकने वाली चीजें बिना धोयें इस्तेमाल में न लें।

19. आग या तेजाब या तेल से जलने पर तुरन्त ठंडा पानी जलन शांत होने तक डालें।

20. बन्द कमरे में सिगड़ी आग वगैरह जलाकर न सोयें।

21. बिजली के स्विच गीले हाथों से न छुपे।22. नवजात शिशुओं की विशेष सावधानी रखें व ठंड से बचाव करें।

23. नाखूनों में मैल जमा न होने दें और न ही उन्हें बढ़ने दें।

24. आंख में कुछ पड़ जाने पर उसे हर्गिज न मलें। रूमाल के कोने को गीला कर निकाल लें।

25. कुत्ता यदि काट ले तो उस कुत्ते पर दस दिन निगाह रखें। यदि इस बीच कुत्ता गुम हो जाता है या मर जाता है या मार डाला जाती है तो तुरन्त डाक्टर कीसलाह से कुत्ते काटे के इंजेक्शन का पूरा कोर्स लें।

26. मुंहासे से बचने हेतु इसबगोल की भूसी रात में मलाई निकले दूध से सेवन करें एवं चेहरे को नींबू, ग्लिसरीन, गुलाब जल युक्त मिश्रण से सोते समय रूई सेपोछें।

27. हार्ट अटैक एवं पेरालिसिस से बचने हेतु वनस्पति घी, मक्खन, मांस-मछली, अंडे का सेवन न करें एवं नियमित रूप से व्यायाम करें व टेंशन से बचें।

28. बाथरूम में चिकने फर्श न लगवायें एवं साबुन या फिसलन न रहने दें। वृध्दावस्था के फ्रेक्चर प्रायः बाथरूम में ही होते हैं।

29. मुंह के कैंसर से बचने हेतु तम्बाकू को घंटों मुंह में दबाकर न रखें। टेढ़े-मेढ़े दांत जो मुंह में बार-बार घाव बनाते हों तुरन्त ठीक करवायें।

30. कमर दर्द से बचने हेतु फोमदार गद्दों का प्रयोग न करें केवल समतल जगह में पतली गद्दी डालकर सोयें।

31. गर्दन दर्द से बचने हेतु बड़े तकिया का प्रयोग न करें या पतला तकिया लगायें।

32. वस्त्र हमेशा कुछ ढीले पहनें, त्वचा निर्मल एवं स्निग्ध रखें।

गुड़ खाने से 18 फायदे

🙏गुड़ खाने से 18 फायदे :🙏

1>गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत
2>खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी रह सकते हैं
3> पाचन क्रिया को सही रखना
4> गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं
5> गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है
6> त्वचा के लिए -- गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है।
7> गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
8> एनर्जी के लिए -- बुहत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।
9> गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।
10> जोड़ों के दर्द में आराम -- रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी।
11> गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।
12> गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है।
13> जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं।
14> गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
15> भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती ।
16> पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
17> गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।
18> पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।
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