सोमवार, 26 दिसंबर 2016

इस्लामिक आतंकवादी तैमूर लंगड़े का विनाशक वीर हरबीर सिंह गुलिया

करीना कपूर खान द्वारा अपने बेटे का नाम इस्लामिक आतंकवादी *'तैमुर'* के नाम पर रखे जाने से कम से कम आज इस नाम के साथ भुला दिए गये हरियाणा के शूरवीर योद्धा श्रद्धेय *हरवीर सिंह गुलिया* तो देशवासियो के दिलो में जीवित हुए, जिन्होंने तैमूर लंगड़े की छाती में भाला ठोक कर उसके आतंक को समाप्त किया था।

आज देर से सही पर शीश झुकाकर कोटि कोटि नमन है उस परम योद्धा को जिसने भारतीय आन बान और शान का मस्तक ऊँचा किया।
उपप्रधान सेनापति हरबीर सिंह जी का गोत्र गुलिया था, जो उनके नाम के साथ जुड़ा हैं। यह हरयाणा के जिला रोहतक गांव बादली के रहने वाले थे। उनकी आयु 22 वर्ष की थी और उनका वजन 56 धड़ी (7 मन) था। यह निडर एवं शक्तिशाली वीर योद्धा था।......

उप-प्रधानसेनापति हरबीरसिंह गुलिया ने अपने पंचायती सेना के 25,000 वीर योद्धा सैनिकों के साथ तैमूर के घुड़सवारों के बड़े दल पर भयंकर धावा बोल दिया जहां पर तीरों* तथा भालों से घमासान युद्ध हुआ।
```इसी घुड़सवार सेना में तैमूर भी था। हरबीरसिंह गुलिया ने आगे बढ़कर शेर की तरह दहाड़ कर तैमूर की छाती में भाला मारा जिससे वह घोड़े से नीचे गिरने ही वाला था कि उसके एक सरदार खिज़र ने उसे सम्भालकर घोड़े से अलग कर लिया।``` (तैमूर इसी भाले के घाव से ही अपने देश समरकन्द में पहुंचकर मर गया)। वीर योद्धा हरबीरसिंह गुलिया पर शत्रु के 60 भाले तथा तलवारें एकदम टूट पड़ीं जिनकी मार से यह योद्धा अचेत होकर भूमि पर गिर पड़ा।```
भारत के इतिहास के पन्नो से ।

इस्लामिक आतंकवादी तैमूर लंगड़ा और दूध का कर्ज

एक बालक मदरसे से पढकर आया और अपनी अम्मी से पूछा, ‘अम्मी मैंने सुना है कि मुझे नवजात अवस्था में किसी काफिर औरत ने अपना दूध पिलाया था।’’
‘‘हां मेरे लाल।’’
‘‘मैं उसे देखना चाहता हूं, आजकल कहां रहती हैं।’’
‘‘मगर क्यों?’’
‘‘दूध का कर्ज अदा करना है।’’
‘‘अच्छी बात है।’’ उस औरत ने दायी का पता बता दिया। उस बालक ने जाकर उस औरत से कहा कि ‘मैंने सुना है कि तुमने मुझे अपना दूध पिलाया है, इसका कर्ज मुझे चुकाना है, इसलिए आप इस्लाम कबूल करें।’
उस औरत ने इस्लाम कबूलने से मना कर दिया तो उस बालक ने उस औरत के स्तन काटकर उसकी हत्या करते हुए कहा, ‘‘हरामजादी मुझे अपना दूध पिलाकर काफिरों के प्रति मेरे दिल में हमदर्दी भरना चाहती थी। भला हो उस्ताद का कि उसने मुझे अल्लाह का सही रास्ता बता दिया...’’ उसके बाद उसने अपनी अम्मी का सिर भी कलम किया और कहा, ‘‘बुढिया अपना दूध नहीं पिला सकी और काफिर का दूध मेरी नसों में भरवा दिया, मैंने गुनाह करने वाले और करवाने वाले दोनों को ही मार दिया, अब दुनिया के काफिरों का खात्मा करने के लिए मेरे हाथ नहीं कांपेंगे।’’
इस घटना के वर्षो बाद वह लुटेरा और आतंकवादी बन गया और कई राजाओं को मारकर अपनी तानाशाही स्थापित की और इस्लाम की तरक्की में जी जान से जुटकर काफिरों का कत्लेआम करने लगा।
एक बार एक नगर में उसके सामने बहुत सारे हिन्दु बंदी पकड़ कर लाये गए। तानाशाह को उनके जीवन का फैसला करना था। उन बंदियों में तुर्किस्तान का मशहूर कवि अहमदी भी था।
तानाशाह ने दो गुलामों कि ओर इशारा करके अहमदी से पूछा – “मैंने सुना है कि कवि लोग आदमियों के बड़े पारखी होते हैं। क्या तुम मेरे इन दो गुलामों की ठीक-ठीक कीमत बता सकते हो?”
अहमदी बहुत निर्भीक और स्वाभिमानी कवि थे। उन्होंने गुलामों को एक नज़र देखकर निश्छल भाव से कहा – “इनमें से कोई भी गुलाम पांच सौ अशर्फियों से ज्यादा कीमत का नहीं है।”
“बहुत खूब” – तानाशाह ने कहा – “और मेरी कीमत क्या होनी चाहिए?”
अहमदी ने फ़ौरन उत्तर दिया -“पच्चीस अशर्फियाँ”।
यह सुनकर तानाशाह की आँखों में खून उतर आया। वह तिलमिलाकर बोला – “इन तुच्छ गुलामों की कीमत पांच सौ अशर्फी और मेरी कीमत सिर्फ पच्चीस अशर्फियाँ! इतने की तो मेरी टोपी है!”
अहमदी ने चट से कहा – “बस, वही तो सब कुछ है! इसीलिए मैंने तुम्हारी ठीक कीमत लगाई है”।
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जानते है ये तानाशाह कौन था.......???
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इस्लामिक आतंकवादी तैमूर लंगड़ा था वो।

शनिवार, 24 दिसंबर 2016

क्रान्ति संकल्प दिवस एक जनवरी

1 जनवरी क्रान्ति संकल्प दिवस
परतंत्र भारत में असहयोग आन्दोलन के जन्मदाता, 1669 की क्रान्ति के जननायक
राष्ट्र-धर्म रक्षक वीर गोकुल सिंह और उनके सात हजार क्रान्तिकारियों के बलिदान का दिवस
सन 1666 में इस्लामिक पिशाच औरंगजेब के अत्याचारों से हिन्दू जनता त्राहि- त्राहि कर रही थी। उस समय वीर गोकुल सिंह जी के आवाहन पर किसानों ने लगान देने से इंकार कर दिया और विदेशी सत्ता के विरूद्ध स्वतंत्रता समर का उद्घोष कर दिया।
मुगलों की तीन लाख की सेना को गोकुल सिंह की 20 हजार की सेना ने परास्त कर दिया। लेकिन छठवें दिन के महायुद्ध में दो अतिरिक्त विशाल सेनाओं के मुगलों के पक्ष में आ जाने के कारण गोकुल सिंह सहित 7 हजार साथियों को बंदी बना लिया गया।
औरंगजेब ने कहा : इस्लाम कबूल कर लो और कुरान के रास्ते पर चलो।
सभी ने कहा : धिक्कार है तुझे और तेरे इस्लाम को। हम इस्लाम कभी नहीं अपनाएंगे।
1 जनवरी 1670 को गोकुल सिंह सहित सभी क्रान्तिकारियों की इस्लामिक नरपिशाचों द्वारा टुकड़े टुकड़े कर हत्या कर दी गई।
वीर बलिदानियों को भारत स्वाभिमान दल का कोटि कोटि नमन करता हैं।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
भारत स्वाभिमान दल के तत्वाधान में विभिन्न राज्य ईकाइयों द्वारा 1 जनवरी को *क्रान्ति संकल्प दिवस* आयोजित किया जा रहा हैं।
आप भी अपने क्षेत्रों में क्रान्ति संकल्प दिवस का आयोजन कर देश के अमर बलिदानियों के अधूरे स्वप्नों को पूरा करने का संकल्प लें।

मिस्टर गांधी की दक्षिण अफ्रीका में भूमिका ?

सरकारी टुकड़ों पर पलने वाले इतिहासकार लिखते है कि गांधी ने अफ्रीका में अफ्रीकनों व भारतीयों के हित में सत्याग्रह आंदोलन चलाया था।

इस कथित सत्याग्रह आन्दोलन के लिए गांधीवादियों द्वारा भारत से बड़ी मात्रा में धन संग्रह कर अफ्रीका ले जाया गया।

अब यह प्रश्न उठता है कि भारत से जो धन सत्याग्रह आंदोलन के नाम पर अफ्रीकनों व भारतीयों के हित के लिए अफ्रीका ले जाया गया, वो धन उनके हित में लगा भी था अथवा नहीं, यह एक संदेहस्पद विषय हैं।

क्योंकि जब हम इतिहास का निश्पक्ष अंवेष्ण करते है तो पाते हैं कि मोहनदास गांधी तो अफ्रीका में ब्रिटिशों की खुलकर सहायता कर रहे थें। 

गांधी, दक्षिणी अफ्रीका के जुलू आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से स्वयंसेवक बने, बाद में दक्षिण अफ्रीका में ही ब्रिटिशों से अपनी स्वतंत्रता का संघर्ष कर रहे बोअरों के आन्दोलन का दमन कराने के लिए ब्रिटिश की ओर से बोअर युद्ध में भी सक्रीय भाग लिया था।

तो फिर दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकनों व भारतीयों के हित की रक्षा के लिए सत्याग्रह चलाने वाले गांधी कौन थे ?

क्या किसी देश के मूल निवासियों के स्वतंत्रता आन्दोलन को दबाकर अपना हित चाहना ही सत्याग्रह कहलाता हैं ?

इस प्रश्न का उत्तर कौन देगा ?

विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

हमारे विद्यालयों में इन विषयों की पढाई क्यों नहीं होती

हमारे विद्यालयों में इन विषयों की पढाई क्यों नहीं होती
(1.) यदि हमारा ज्ञान-विज्ञान एवं इतिहास इतना गौरवशाली एवं समृद्ध हैतो भारत के छात्रों को इस जानकारी सेवंचित क्यों रखा जाता है ???
(2.) अंको का आविष्कार भारत में 300 ई. पू.हुआ। (Pro. O. M. Mathew, Bhavan'sJournal)
(3.) शून्य (जीरो, सिफर) की आधुनिक खोज भारत में ब्रह्मगुप्त ने की।
(4.)अंकगणित का आविष्कार 200ई.पू. भास्कराचार्य ने किया। (EncyclopaediaBritannica)
(5.) बीजगणित का आविष्कार भारत मेंआर्यभट्ट ने किया। (EncyclopaediaBritannica)
(6.) सर्वप्रथम ग्रहों की गणना आर्यभट्ट ने499 ई. पू. में की।(JewishEncyclopaedia)
(7.) मोहनजोदडों व हडप्पा में मिले अवशेषों केअनुसार भारतीयों को त्रिकोणमिति वरेखागणित का 2500ई. पू. में ज्ञान था।
(8.) जर्मन लेखक थॉमस आर्य के अनुसार सिन्धुघाटी सभ्यता में मिले भार-माप यन्त्रभारतीयों के दशमलव प्रणाली के ज्ञानको दर्शाते हैं।
(9.) समय और काल की गणना करनेवाला विश्व का पहला कैलेण्डर भारत मेंलतादेव ने 505 ई. पू. सूर्य सिद्धान्त नामकअपनी पुस्तक में वर्णित किया।
(10.) न्यूटन से भी पहले गुरुत्वाकर्षणकासिद्धान्त भास्कराचार्य ने प्रतिपादितकिया था। (Jewish Encyclopaedia)
(11.) 3000 ई. पू. लोहे के प्रयोग के प्रमाणवेदों में वर्णित है, अशोक स्तम्भ भारतीयों केतत्त्वज्ञान का स्पष्ट प्रमाण है। (TheCurrent Science)
(12.) सिन्धु घाटी सभ्यता में मिले प्रमाणसिद्ध करते हैं कि भारतीयों को 2500 ई. पू.ताम्बे तथा जस्ते की जानकारी थी।
(13) विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं एवंरासायनिक रंगों का प्रयोगपाँचवी शताब्दी में भारतद्वारा किया गया। (National ScienceCenter, New Delhi)
(14.) विश्व का सबसे पहला औषधि विज्ञानभारतीयोंने आयुर्वेद के रूप में किया। चरक ने2500 वर्ष पूर्व औषधि विज्ञान को आयुर्वेदके रूप में संकलित किया।
(15.) लिम्बा बुक ऑफ रिकाॉर्ड्स के अनुसार400 ई. पू. सुश्रुत (भारतीय चिकित्सक) नेसर्वप्रथम प्लास्टिक सर्जरी का प्रयोगकिया।
(16.) राईट ब्रदर्स से भी अनेक वर्ष पूर्वमहर्षि दयानन्द सरस्वती के पटु शिष्यश्री बापूजी तलपदे महाराष्ट्र निवासी नेमुम्बई के चौपाटी स्थान पर वैदिक विधि सेबना वर्तमान युग का प्रथम विमान बनाकरउडाया था।
(17.) विश्व का पहले लेखन कार्य का प्रमाण5500 वर्ष पूर्व हडप्पा संस्कृति के अन्तर्गतमिलता है। (Science Reporter, June1999)
(18.) संस्कृत दुनिया की सबसे पहली भाषा हैतथा यह सभी यूरोपियन भाषाओंकी जननी है। संस्कृत ही कम्प्यूटर सॉप्टवेयरहेतु सर्वाधिक उपयुक्त भाषा है।(ForbesMagazine, July 1987)
(19.)विश्व का पहला विश्वविद्यालयतक्षशिला के रूप में 700 ई. पू. भारत मेंकार्यरत था। जहाँ पर दुनिया भर के 10,500विद्यार्थी 60 विषयों का अध्ययन करते थे।
(20.) बारूद की खोज 8000 ई. पू. सर्वप्रथमभारत में हुई थी।
(21.) वनस्पतिशास्त्रकी उत्पत्ति सर्वप्रथम भारत में हुई,जिसका प्रमाण वेदों में सुनियोजित रूप सेवर्गीकृत विभिन्न वनस्पतियों से मिलता है।
(22.) दुनिया की सबसे पहली सुनियोजितआवासीय
सभ्यता हडप्पा और मोहन जोदडो केरूप में 2500 ई. पू. भारत में स्थापित हुई।
(23.) सूर्य से पृथिवी पर पहुँचने वाले प्रकाशकी गणना भास्कराचार्य ने सर्वप्रथम भारतमें की।
(24.) यूरोपीय गणितज्ञों से पूर्वही छठी शताब्दी में बौधायन ने पाई के मानकी गणना की थी जो कि पाइथागोरस प्रमेयके रूप में जाना जाता है।
हमें झूठा इतिहास औरझूठी जानकारिया क्यों दी जाती है |
आइए, वर्षों से भारतीयों को अनेक ज्ञान सेवंचित रखने के लिए चलाए जा रहे इस सुनियोजित षड्यन्त्र का हम सब मिलकर प्रतिकार करें।

-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

धर्मयुद्ध में तटस्थ रहकर अपराधी न बनें

अभी ५२०० वर्ष पुरानी घटना है. दुर्योधन के साथ वार्ता विफल होने के पश्चात् युद्ध अवश्यम्भावी हो गया था. श्रीकृष्ण ने विश्व के समस्त राजाओं के पास अपने दूतों को पाण्डवों के पक्ष में युद्ध करने का निमन्त्रण लेकर भेजा.
धर्मनिष्ठ राजा तो इसी दिन की प्रतीक्षा कर रहे थे.उन्होंने सोचा कि स्वयं श्रीकृष्ण का निमन्त्रण भला कौन मूर्ख ठुकराएगा? उन्होंने अति प्रसन्नता पूर्वक युद्ध के निमन्त्रण को स्वीकार कर लिया. परन्तु कुछ धर्मभ्रष्ट राजाओं ने कहा कि मै कृष्ण वृष्ण को नहीं मानता. कृष्ण तो केवल अपने पक्ष को अच्छा बताते हैं. केवल अपने धर्म को अच्छा बताते हैं. उनकी सोच एकपक्षीय है. जबकि हम ठहरे ऊंची और व्यापक सोच वाले. हम ये सब नहीं मानते. हमारे लिए सब बराबर हैं.... तमाम कौरव तो हमारे दोस्त हैं... वो तो बहुत अच्छे हैं... घर आते हैं तो बहुत मीठी मीठी बातें करते हैं...... हमको तो बिरयानी खिलाते हैं.... आदि आदि...... इसलिए हम तो साहब न्यूट्रल रहेंगे... सेक्युलर रहेंगे.... .
.
इसपर श्रीकृष्ण के दूतों ने कहा कि द्वारिकाधीश ने एक सन्देश और दिया है. उन्होंने यह भी कहा है कि आगामी युद्ध धर्म युद्ध है.. और इसमें जो भी धर्म के पक्ष में युद्ध करने नहीं आएगा वह अधर्म के पक्ष में माना जायेगा और उसके साथ ठीक वैसा ही व्यवहार किया जायेगा जैसा दुर्योधन के साथ.....
आज पुनः हम सबको धर्म और अधर्म के बीच निर्णायक युद्ध में सहभागी बनने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हो रहा है....और इसका निर्णय होने में भी बहुत समय नहीं लगेगा.
हम सभी को स्पष्ट रूप से तय करना है कि हम धर्म के पक्ष में हैं या अधर्म के.....
किसी भी कारण से तटस्थ रहने वाले लोग अधर्म के पक्ष में माने जायेंगे और इतिहास के पन्नों पे अपना नाम एक अपराधी के तौर पर दर्ज करवा लेंगे. बोलिए,
भारत माता की जय !!!
भारत स्वाभिमान दल

धर्मयुद्ध में तटस्थ रहकर अपराधी न बनें

अभी ५२०० वर्ष पुरानी घटना है. दुर्योधन के साथ वार्ता विफल होने के पश्चात् युद्ध अवश्यम्भावी हो गया था. श्रीकृष्ण ने विश्व के समस्त राजाओं के पास अपने दूतों को पाण्डवों के पक्ष में युद्ध करने का निमन्त्रण लेकर भेजा.
धर्मनिष्ठ राजा तो इसी दिन की प्रतीक्षा कर रहे थे.उन्होंने सोचा कि स्वयं श्रीकृष्ण का निमन्त्रण भला कौन मूर्ख ठुकराएगा? उन्होंने अति प्रसन्नता पूर्वक युद्ध के निमन्त्रण को स्वीकार कर लिया. परन्तु कुछ धर्मभ्रष्ट राजाओं ने कहा कि मै कृष्ण वृष्ण को नहीं मानता. कृष्ण तो केवल अपने पक्ष को अच्छा बताते हैं. केवल अपने धर्म को अच्छा बताते हैं. उनकी सोच एकपक्षीय है. जबकि हम ठहरे ऊंची और व्यापक सोच वाले. हम ये सब नहीं मानते. हमारे लिए सब बराबर हैं.... तमाम कौरव तो हमारे दोस्त हैं... वो तो बहुत अच्छे हैं... घर आते हैं तो बहुत मीठी मीठी बातें करते हैं...... हमको तो बिरयानी खिलाते हैं.... आदि आदि...... इसलिए हम तो साहब न्यूट्रल रहेंगे... सेक्युलर रहेंगे.... .
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इसपर श्रीकृष्ण के दूतों ने कहा कि द्वारिकाधीश ने एक सन्देश और दिया है. उन्होंने यह भी कहा है कि आगामी युद्ध धर्म युद्ध है.. और इसमें जो भी धर्म के पक्ष में युद्ध करने नहीं आएगा वह अधर्म के पक्ष में माना जायेगा और उसके साथ ठीक वैसा ही व्यवहार किया जायेगा जैसा दुर्योधन के साथ.....
आज पुनः हम सबको धर्म और अधर्म के बीच निर्णायक युद्ध में सहभागी बनने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हो रहा है....और इसका निर्णय होने में भी बहुत समय नहीं लगेगा.
हम सभी को स्पष्ट रूप से तय करना है कि हम धर्म के पक्ष में हैं या अधर्म के.....
किसी भी कारण से तटस्थ रहने वाले लोग अधर्म के पक्ष में माने जायेंगे और इतिहास के पन्नों पे अपना नाम एक अपराधी के तौर पर दर्ज करवा लेंगे. बोलिए,
भारत माता की जय !!!
भारत स्वाभिमान दल

रविवार, 18 दिसंबर 2016

शत-शत नमन बलिदानी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी

अनगिनत झूले फांसी के फंदे पर, अनगिनत ने गोलिया खाई थी, लेकिन विकृत मानसिक सोच रखने वाले गांधीवादी कहते है कि चरखे से आजादी पाई थी। शत-शत नमन बलिदानी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी, बलिदान- 17 दिसंबर,  1927,  गोंडा जेल, उत्तर प्रदेश) भारत के अमर बलिदानी प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में से एक थे। आज़ादी के आन्दोलन को गति देने के लिये धन की तत्काल व्यवस्था की जरूरत के मद्देनजर शाहजहाँपुर में हुई बैठक के दौरान रामप्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेज़ी खजाना लूटने की योजना बनायी थी। योजनानुसार दल के प्रमुख सदस्य राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी 'आठ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन' को चेन खींच कर रोका और क्रान्तिकारी बिस्मिल के नेतृत्व में अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, चन्द्रशेखर आज़ाद व छ: अन्य सहयोगियों की मदद से सरकारी खजाना लूट लिया गया। अंग्रेज़ सरकार ने मुकदमा चलाकर राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला ख़ाँ आदि को फ़ाँसी की सज़ा सुनाई।

जन्म तथा शिक्षा:
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का जन्म 23 जून 1901 को बंगाल के पाबना ज़िले के भड़गा नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम क्षिति मोहन शर्मा और माता बसंत कुमारी था। बाद के समय में इनका परिवार 1909 ई. में बंगाल से वाराणसी चला आया था, अत: राजेन्द्रनाथ की शिक्षा-दीक्षा वाराणसी से ही हुई। राजेन्द्रनाथ के जन्म के समय पिता क्षिति मोहन लाहिड़ी व बड़े भाई बंगाल में चल रही अनुशीलन दल की गुप्त गतिविधियों में योगदान देने के आरोप में कारावास की सलाखों के पीछे कैद थे। काकोरी काण्ड के दौरान लाहिड़ी 'काशी हिन्दू विश्वविद्यालय' में इतिहास विषय में एम. ए. प्रथम वर्ष के छात्र थे।

क्रांतिकारियों से सम्पर्क:
जिस समय राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी एम. ए. में पढ़ रहे थे, तभी उनका संपर्क क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल से हुआ। सान्याल बंगाल के क्रांतिकारी 'युगांतर' दल से संबद्ध थे। वहाँ एक दूसरे दल 'अनुशीलन' में वे काम करने लगे। राजेन्द्रनाथ इस संघ की प्रतीय समिति के सदस्य थे। अन्य सदस्यों में रामप्रसाद बिस्मिल भी सम्मिलित थे। 'काकोरी ट्रेन कांड' में जिन क्रांतिकारियों ने प्रत्यक्ष भाग लिया, उनमें राजेन्द्रनाथ भी थे। बाद में वे बम बनाने की शिक्षा प्राप्त करने और बंगाल के क्रांतिकारी दलों से संपर्क बढाने के उद्देश्य से कोलकाता गए। वहाँ दक्षिणेश्वर बम फैक्ट्री कांड में पकड़े गए और इस मामले में दस वर्ष की सज़ा हुई।

काकोरी काण्ड:
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी बलिदानी जत्थों की गुप्त बैठकों में बुलाये जाने लगे थे। क्रान्तिकारियों द्वारा चलाए जा रहे आज़ादी के आन्दोलन को गति देने के लिये धन की तत्काल व्यवस्था की जरूरत के मद्देनजर शाहजहाँपुर में एक गुप्त बैठक हुई। बैठक के दौरान रामप्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेज़ी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनायी। इस योजनानुसार दल के ही प्रमुख सदस्य राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी 'आठ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन' को चेन खींच कर रोका और क्रान्तिकारी पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, चन्द्रशेखर आज़ाद व छ: अन्य सहयोगियों की मदद से समूची ट्रेन पर धावा बोलते हुए सरकारी खजाना लूट लिया गया।

सज़ा:
बाद में अंग्रेज़ी हुकूमत ने उनकी पार्टी 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन' के कुल 40 क्रान्तिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खजाना लूटने व मुसाफिरों की हत्या करने का मुकदमा चलाया, जिसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ तथा ठाकुर रोशन सिंह को मृत्यु दण्ड (फाँसी की सज़ा) सुनायी गयी। इस मुकदमें में 16 अन्य क्रान्तिकारियों को कम से कम चार वर्षकी सज़ा से लेकर अधिकतम काला पानी (आजीवन कारावास) तक का दण्ड दिया गया था। 'काकोरी काण्ड में लखनऊ की विशेष अदालत ने 6 अप्रैल, 1927 को जलियांवाला बाग़ दिवस पर रामप्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, रोशन सिंह तथा अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ को एक साथ फांसी देने का निर्णय लेते हुए सज़ा सुनाई।

सूबेदार से झड़प:
काकोरी काण्ड की विशेष अदालत आज के मुख्य डाकघर में लगायी गयी थी। काकोरी काण्ड में संलिप्तता साबित होने पर लाहिड़ी को कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) से लखनऊ लाया गया। बेड़ियों में ही सारे अभियोगी आते-जाते थे। आते-जाते सभी मिलकर गीत गाते। एक दिन अदालत से निकलते समय सभी क्रांतिकारी 'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है', गाने लगे। सूबेदार बरबण्डसिंह ने इन्हें चुप रहने को कहा, लेकिन क्रांतिकारी सामूहिक गीत गाते रहे। बरबण्डसिंह ने सबसे आगे चल रहे राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का गला पकड़ लिया, लाहिड़ी के एक भरपूर तमाचे और साथी क्रांतिकारियों की तन चुकी भुजाओं ने बरबण्डसिंह के होश उड़ा दिए। जज को बाहर आना पड़ा। इसका अभियोग भी पुलिस ने चलाया, परन्तु वापस लेना पड़ा।

लाहिड़ी-जेलर संवाद:
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी अध्ययन और व्यायाम में अपना सारा समय व्यतीत करते थे। 6 अप्रैल, 1927 केा फाँसी के फैसले के बाद सभी को अलग कर दिया गया, परन्तु लाहिड़ी ने अपनी दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं किया। जेलर ने पूछा कि- "प्रार्थना तो ठीक है, परन्तु अन्तिम समय इतनी भारी कसरत क्यो?" राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने उत्तर दिया- व्यायाम मेरा नित्य का नियम है। मृत्यु के भय से मैं नियम क्यों छोड़ दूँ? दूसरा और महत्वपूर्ण कारण है कि हम पुर्नजन्म में विश्वास रखते हैं। व्यायाम इसलिए किया कि दूसरे जन्म में भी बलिष्ठ शरीर मिलें, जो ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ़ युद्ध में काम आ सके।

बलिदान:
अंग्रेज़ी सरकार ने डर से राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को गोण्डा कारागार भेजकर अन्य क्रांतिकारियों से दो दिन पूर्व ही 17 दिसम्बर, 1927 को फांसी दे दी। बलिदानी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने हंसते-हंसते फांसी का फन्दा चूमने के पहले 'वन्देमातरम' की जोरदार हुंकार भरकर जयघोष करते हुए कहा- मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि स्वतंत्र भारत में पुर्नजन्म लेने जा रहा हूँ। क्रांतिकारी की इस जुनून भरी हुंकार को सुनकर अंग्रेज़ ठिठक गये थे। उन्हें लग गया था कि इस धरती के सपूत उन्हें अब चैन से नहीं जीने देंगे।
वन्दे मातरम्
जय भारत स्वाभिमान दल

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

गीता जयंती के उपलक्ष्य में

।। ॐ ।। गीता जयंती के उपलक्ष्य में l
आज गीता जयंती है . भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह दिव्य सन्देश तब दिया था जब वह दुविद्या में था । एक ओर मोह था और दूसरी ओर युद्ध क्षेत्र में आये योद्धा का कर्तव्य । मोह ने अर्जुन को इतना निर्जीव बना दिया था कि वह अपना धुनष तक नही उठा पा रहा था , इस किंकर्तव्य की स्थिति में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का दिव्य सन्देश दिया और महाभारत का युद्ध जीत लिया गया ।
ज्ञान की इस अलौकिक धरोहर को अगर हम ने अभी तक नहीं पढ़ा और समझा तो गीता जयंती के उपलक्ष्य में गीता के 18 अध्याय आगामी 18 दिनों के पढ़ें और जाने कैसे जीवन के युद्ध क्षेत्र में जब भी कोई दुविद्या हो तब उससे अर्जुन की भांति कैसे उस पर विजय पायी जाये ।
श्री गीता जयंती पर सभी सनातन धर्मी मनुष्यों का अभिवादन एवं शुभकामनाएँ।ईश्वर करें हमारे जीवन में भी कृष्ण चेतना घट जाये और हम अपने कर्तव्य पथ पर आरूढ़ हो जाये। ॐ ॐ ॐ
सनातन संस्कृति संघ/भारत स्वाभिमान दल