सरकारी टुकड़ों पर पलने वाले इतिहासकार लिखते है कि गांधी ने अफ्रीका में अफ्रीकनों व भारतीयों के हित में सत्याग्रह आंदोलन चलाया था।
इस कथित सत्याग्रह आन्दोलन के लिए गांधीवादियों द्वारा भारत से बड़ी मात्रा में धन संग्रह कर अफ्रीका ले जाया गया।
अब यह प्रश्न उठता है कि भारत से जो धन सत्याग्रह आंदोलन के नाम पर अफ्रीकनों व भारतीयों के हित के लिए अफ्रीका ले जाया गया, वो धन उनके हित में लगा भी था अथवा नहीं, यह एक संदेहस्पद विषय हैं।
क्योंकि जब हम इतिहास का निश्पक्ष अंवेष्ण करते है तो पाते हैं कि मोहनदास गांधी तो अफ्रीका में ब्रिटिशों की खुलकर सहायता कर रहे थें।
गांधी, दक्षिणी अफ्रीका के जुलू आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से स्वयंसेवक बने, बाद में दक्षिण अफ्रीका में ही ब्रिटिशों से अपनी स्वतंत्रता का संघर्ष कर रहे बोअरों के आन्दोलन का दमन कराने के लिए ब्रिटिश की ओर से बोअर युद्ध में भी सक्रीय भाग लिया था।
तो फिर दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकनों व भारतीयों के हित की रक्षा के लिए सत्याग्रह चलाने वाले गांधी कौन थे ?
क्या किसी देश के मूल निवासियों के स्वतंत्रता आन्दोलन को दबाकर अपना हित चाहना ही सत्याग्रह कहलाता हैं ?
इस प्रश्न का उत्तर कौन देगा ?
विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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