शनिवार, 23 अप्रैल 2016

वैश्या और फिल्म अभिनेत्री में अंतर- कडवा सत्य

एक मिनट लगेगा जरूर पढें
एक वैश्या और एक फिल्म ऐक्ट्रैस में क्या अंतर है ........ ??
फेसबुक पर किसी एक पोस्ट पर गरमा गरम बहस के दौरान एक बुद्धिजीवी ने एक से पूछा आपकी नजर में एक वैश्या और एक फिल्म ऐक्ट्रैस में क्या अंतर है .......??
उस व्यक्ति ने जो जवाब दिया , उसने मुझे भीतर तक झकझोर दिया है उसने कहा :
वैश्या वो है जो देश के 80 प्रतिशत बलात्कारियों से हमारी बहन बेटी की सुरक्षा करती है उन भूखे भेडियो की भूख चंद सिक्को के लिऐ अपना बदन बेच कर मिटाती हैं .....
......... और ........
फिल्म ऐक्ट्रेस वो बिमारी है जो देश के 100 प्रतिशत बलात्कारियो को जन्म देती है और अपने बदन की नूमाईश करके हमारी बहन बेटियो के लिये असुरक्षा पैदा करती हैं !!
जब कोई लडका बलात्कार करता है तो उसका मूल कारण होता है कामुक मनोवृत्ति और कुसंस्कार, जिससे कि वो अपनी वासना पर काबू नही कर पाता और समाज में बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देता है, फिर हम सब लोग उसके लिए सजा की मांग करते है कि इसको फांसी दो, कोई कहता है कि इसे सडक के बीच खड़ा करके पत्थरों से मार डालो...!!!!
जब शिवाजी महाराज बचपन में सुने गये रामायण, महाभारत के इतिहास को स्मरण करके हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना कर सकते है तो एक मैकाले की चरित्रनाशक शिक्षा में दीक्षिक युवक जो बाल्य अवस्था से युवा अवस्था तक सैकड़ो बार वासना के- बलात्कार के चित्र फिल्मों में देख चुका होता है, उसकी क्या मनोदशा होगी ?
सब लोग लड़को की ही गलती निकालते हैं,
क्या कोई लडका बचपन से बलात्कारी पैदा होता है.. ???
यदि मेरी बात किसी महिला संगठन तक पहुंच रही हैं तो कृपया मेरी बात का उत्तर दें...!!
आप सभी महिलाएं बलात्कारियो का विरोध करती हो, मगर कोई इन एक्ट्रेस का विरोध नही करता, कोई टीवी पर दिखाई जाने वाली अश्लील फिल्मों का विरोध नहीं करता, कोई विदेश से आने वाली गंदी फिल्मों का विरोध नहीं करता।
भगवान न करे कि कभी आपका बेटा ऐसी फिल्मों को देखकर दुष्कर्म कर दें फिर आप अपनी परवरिश को दोष देंगी या टीवी एक्ट्रेस को...???
मैं बलात्कारियो के पक्ष में बिल्कुल नहीं हूँ, मैं बलात्कारियों का यौनांग काट कर फाँसी दिये जाने का समर्थक हूँ, मैं तो केवल आपको ये समझाना चाहता हूँ कि बलात्कार की जड़ क्या है और हम अधूरी लड़ाई लड रहे हैं।
अगर आपको किसी का विरोध करना है तो हर उस चीज का विरोध करें जो हमारी संस्कृति को नष्ट कर रही है, टीवी पर बॉलीवुड फिल्मों की जगह श्री मद् भगवत गीता का पाठ दिखाया जा सकता है, सिनेमाघरों में हमारे शूरवीरों व क्रांतिकारीयों का इतिहास दिखाया जा सकता है।
अंत में बस इतना कहना चाहता हूं कि अभी भी संभलने का वक्त है कही ऐसा न हो कि हर रिश्ता वासना की सूली न चड़ जाए....!!!
यदि मैंने कुछ गलत लिखा है तो कृपया कमेंट बाक्स में जरूर बताएँ।
-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

4 टिप्‍पणियां:

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