हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी में एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है उसके पीछे कुछ कारण हैं अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती |_____________________
क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए,क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये | च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये | त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये |
प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये ।हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये | इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा में नही है।हिंदी के सभी वर्णों की एक निश्चित ध्वनि है और उस ध्वनि को आधा डाल कर या हलन्त लगाकर अर्धकालीन भी बनाया जा सकता है जैसे अल्प में ल आधा किया है ये शक्ति अंग्रेजी तथा अनेक विदेशी भाषाओँ में नही है. हिंदी में अनेक शब्दों की संधि करके नए शब्द भी बनाए जा सकते हैं और वाक्य को छोटा भी किया जा सकता है जैसे सव+राज = स्वराज, पर+उपकार = परोपकार आदि.हिंदी ने अपनी माता संस्कृत से अनेक गुण धारण किए हैं और 62 लाख से अधिक शब्दों का भंडार है हिंदी के पास जो अंग्रेजी के 4 से 5 लाख के शब्द भण्डार से कई गुना बड़ा है. वैज्ञानिकों ने हाल ही हिंदी पर अनेक शोध की हैं और पाया है कि अन्य भाषाओँ की अपितु हिंदी बोलते और पढ़ते समय हमारे मस्तिष्क के अधिकतर भाग सक्रिय होते हैं जिस से दिमाग की कार्यक्षमता भी बढती है और मनुष्य अधिक फुर्तीला बनता है.
हिंदी का व्याकरण भी इतना मजबूत और सटीक है कि इसे एक बार भी संशोधित नही करना पड़ा जबकि अंग्रेजी में अब तक लगभग सौ बार संशोधन करने के बाद भी अनेक कमियां हैं जिन्हें आप ने भी अनुभव किया होगा. हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा और देवनागरी ही एकमात्र ऐसी लिपि है जिनमे संसार की समस्त भाषाओँ को लिखा जा सकता है. इसीलिए आज विश्व के अनेक देशों में हिंदी सीखने सिखाने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है और अधिकतर भाषा विज्ञानी इसे संस्कृत के बाद सबसे अच्छी ,वैज्ञानिक और सशक्त भाषा मानते हैं जिसमे विश्वभाषा बनने के पूरे गुण है. बस आवश्यकता है तो इसके महत्व को जानने समझने की ओर इसे गर्व और प्रसन्ता से अपनाने की प्रयोग करने की और अपनी नयी पीढ़ी को समझाने की. हिंदी अपनाएं देश को विकसित बनाए.
क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए,क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये | च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये | त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये |
प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये ।हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये | इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा में नही है।हिंदी के सभी वर्णों की एक निश्चित ध्वनि है और उस ध्वनि को आधा डाल कर या हलन्त लगाकर अर्धकालीन भी बनाया जा सकता है जैसे अल्प में ल आधा किया है ये शक्ति अंग्रेजी तथा अनेक विदेशी भाषाओँ में नही है. हिंदी में अनेक शब्दों की संधि करके नए शब्द भी बनाए जा सकते हैं और वाक्य को छोटा भी किया जा सकता है जैसे सव+राज = स्वराज, पर+उपकार = परोपकार आदि.हिंदी ने अपनी माता संस्कृत से अनेक गुण धारण किए हैं और 62 लाख से अधिक शब्दों का भंडार है हिंदी के पास जो अंग्रेजी के 4 से 5 लाख के शब्द भण्डार से कई गुना बड़ा है. वैज्ञानिकों ने हाल ही हिंदी पर अनेक शोध की हैं और पाया है कि अन्य भाषाओँ की अपितु हिंदी बोलते और पढ़ते समय हमारे मस्तिष्क के अधिकतर भाग सक्रिय होते हैं जिस से दिमाग की कार्यक्षमता भी बढती है और मनुष्य अधिक फुर्तीला बनता है.
हिंदी का व्याकरण भी इतना मजबूत और सटीक है कि इसे एक बार भी संशोधित नही करना पड़ा जबकि अंग्रेजी में अब तक लगभग सौ बार संशोधन करने के बाद भी अनेक कमियां हैं जिन्हें आप ने भी अनुभव किया होगा. हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा और देवनागरी ही एकमात्र ऐसी लिपि है जिनमे संसार की समस्त भाषाओँ को लिखा जा सकता है. इसीलिए आज विश्व के अनेक देशों में हिंदी सीखने सिखाने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है और अधिकतर भाषा विज्ञानी इसे संस्कृत के बाद सबसे अच्छी ,वैज्ञानिक और सशक्त भाषा मानते हैं जिसमे विश्वभाषा बनने के पूरे गुण है. बस आवश्यकता है तो इसके महत्व को जानने समझने की ओर इसे गर्व और प्रसन्ता से अपनाने की प्रयोग करने की और अपनी नयी पीढ़ी को समझाने की. हिंदी अपनाएं देश को विकसित बनाए.
एक ओर सम्पूर्ण विश्व संस्कृत हिन्दी को अपना रहा है, दूसरी ओर भारत के ही कुछ राज्य हिन्दी को समाप्त करना चाह रहे है ?
कल परसो एक समाचार पढ़ा था कि हिन्दी भाषी कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश में हिन्दी के स्थान पर अंग्रेजी मुख्य भाषा ! देखे राज्य भाषा की दुर्दशा का उदाहरण -मप्र में आठवी तक हिंदी शिक्षक की पोस्ट ही खत्म कर दी. जहाँ एक ओर विश्व हिंदी सम्मलेन कर के हिंदी को बढ़ावा के दावे किए जाते हैं वहीँ दूसरी ओर हिंदी के पद ही खत्म कर दिए गए.
-विश्वजीत सिंह अनन्तराष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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स्वदेशी स्वाभिमान, राष्ट्र- धर्म, संस्कृति की रक्षा व सम्वर्धन, गौ आधारित अर्थव्यवस्था एवं गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था की पुनर्स्थापना के लिए सनातन संस्कृति संघ के सदस्य बने |
🚩भारत स्वाभिमान दल, स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए तथा देश के अमर बलिदानियों के सपनों को पूरा करने के लिए भारत स्वाभिमान दल से जुड़े |
भारत स्वाभिमान दल के बारे में अधिक जानने के लिए तथा सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन, राजनैतिक शुचिता व राष्ट्र- धर्म रक्षा के आन्दोलन में तन मन धन से सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भारत स्वाभिमान दल की वेबसाइट पर जाये
http://www.bharatswabhimandal.org/member.php
आप संगठनो से जुड़ने हेतु हमसे 08126396457 पर वाट्सएप्प व हाईक द्वारा भी सम्पर्क कर सकते है |
वन्दे मातरम्
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