मैं अपने बचाव के पक्ष में कुछ नहीं कहना चाहता , सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ अंग्रेजों की कोई भी न्याय - व्यवस्था मुझे सजा देने का हक नहीं रखती है । इसी वजह से मैंने कोई वकील मुकर्रर करना मुनासिब नहीं समझा । जैसे जर्मनी के खिलाप लडना अंग्रेजों की देशभक्ति है , वैसे ही अंग्रेजों के खिलाप आजादी की लडाई हमारी देशभक्ति है । मैं अंग्रेजों को 8 करोड भारतीयों का हत्यारा मानता हूँ , जिनको गत 50 वर्षो में बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया है ।
अंग्रेज प्रति वर्ष दस करोड रूपया भारत से इंग्लैंड लाते है और भारत को चूस कर मौज उडाते हैं । अंग्रेजी हुकूमत ने मेरे देशवासियों को फाँसी की सजा और आजीवन कारावास दिया है । इंग्लैंड से एक अंग्रेज 100 रूपया पौंड की नौकरी पर भारत इसलिये भेजा जाता है कि वहा जाकर 1000 भारतीयों को मौत का निशाना बनाए क्योंकि 100 में 1000 भारतीय गुजर बसर करते है । अंग्रेजों की यह हवस साम्राज्य विस्तार के साथ - साथ भारतीयों के शोषण की दास्तान कहती है । जैसे जर्मनी को इंग्लैंड पर कब्जा जमा कर उसे गुलाम बनाने का कोई अधिकार नहीं है , वैसे ही अंग्रेजों को भारत को पराधीनता की बेडियों में रखने का कोई अधिकार नहीं है ।
मुझे अंग्रेजों के उस न्याय और कानून पर हंसी आती है जो पीडित मानवता की हमदर्दी पर घडियाली आंसू बहाता है और ढोंग - पाखण्ड का नाटक करता है । जब जर्मन को मार कर अंग्रेज अपने को देशभक्त कहता है तो निश्चित रूप से मैं भी देशभक्त हूँ । मातृभूमि का अपमान करने वालों की हत्या करना एक देशभक्त का पवित्र कर्तव्य है । मैंने वही किया है जो सच्चे देशप्रेमी को करना चाहिए । मुझे मृत्यु की जरा भी परवाह नहीं है । अंग्रेजों का काला कानून मुझे फाँसी की सजा दे सकता है , पर वह देशभक्ति की भावना को दफन नहीं कर सकता है । मेरी फाँसी के बाद देश में अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की जंग ओर तेज होगी ।
अंग्रेज प्रति वर्ष दस करोड रूपया भारत से इंग्लैंड लाते है और भारत को चूस कर मौज उडाते हैं । अंग्रेजी हुकूमत ने मेरे देशवासियों को फाँसी की सजा और आजीवन कारावास दिया है । इंग्लैंड से एक अंग्रेज 100 रूपया पौंड की नौकरी पर भारत इसलिये भेजा जाता है कि वहा जाकर 1000 भारतीयों को मौत का निशाना बनाए क्योंकि 100 में 1000 भारतीय गुजर बसर करते है । अंग्रेजों की यह हवस साम्राज्य विस्तार के साथ - साथ भारतीयों के शोषण की दास्तान कहती है । जैसे जर्मनी को इंग्लैंड पर कब्जा जमा कर उसे गुलाम बनाने का कोई अधिकार नहीं है , वैसे ही अंग्रेजों को भारत को पराधीनता की बेडियों में रखने का कोई अधिकार नहीं है ।
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