शनिवार, 23 अप्रैल 2016

मैं हूँ मतिदास

औरंगजेब ने पूछा “मतिदास कौन है” ? तो भाई मतिदास ने आगे बढ़कर कहा “मैं हूँ मतिदास, यदि गुरु जी आज्ञा दें तो मैं यहाँ बैठे बैठे दिल्ली और लाहौर का सभी हाल बता सकता हूँ और तेरे किले की ईंट-से-ईंट बजा सकता हूँ ।”
औरंगजेब गुर्राया और उसने भाई मतिदास को धर्म-परिवर्तन करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से अनेक प्रकार की यातनाएँ देने की धमकी दी । खौलते हुए गरम तेल के कड़ाहे दिखाकर उनके मन में भय उत्पन्न करने का प्रयत्न किया, परंतु धर्मवीर पुरुष अपने प्राणों की चिन्ता नहीं किया करते। धर्म के लिए वे अपना जीवन उत्सर्ग कर देना श्रेष्ठ समझते हैं ।
जब औरंगजेब की सभी धमकियाँ बेकार गयीं, सभी प्रयत्न असफल रहे, तो वह चिढ़ गया । उसने काजी को बुलाकर पूछाः “बताओ इसे क्या सजा दी जाये” ?
काजी ने कुरान का हवाला देकर हुक्म सुनाया कि “इस काफिर को इस्लाम ग्रहण न करने के आरोप में आरे से लकड़ी की तरह चीर दिया जाये ।”
औरंगजेब ने सिपाहियों को काजी के आदेश का पालन करने का हुक्म जारी कर दिया ।
दिल्ली के चाँदनी चौक में भाई मतिदास को दो खंभों के बीच रस्सों से कसकर बाँध दिया गया और सिपाहियों ने ऊपर से आरे के द्वारा उन्हें चीरना प्रारंभ किया। किंतु उन्होंने ‘सी’ तक नहीं की ।
औरंगजेब ने पाँच मिनट बाद फिर कहाः “अभी भी समय है । यदि तुम इस्लाम कबूल कर लो, तो तुम्हें छोड़ दिया जायेगा और धन-दौलत से मालामाल कर दिया जायेगा ।”
वीर मतिदास ने निर्भय होकर कहा “मैं जीते जी अपना सनातन धर्म नहीं छोड़ूँगा ।” ऐसे थे ‘धर्मवीर मतिदास’ जिन्हे अपना बलिदान देकर सनातन धर्म की रक्षा की ।
यह देखकर दयाला बोला “औरंगजेब तूने बाबर वंश को और अपनी बादशाहियत को चिरवाया है ।” यह सुनकर औरंगजेब ने दयाला को उबलते पानी के कढाहे में डलवाकर जिंदा ही जला दिया । भाई दयाला जी को गुरु तेगबहादुर जी की मौजूदगी में एक बड़ी देग, जो पानी से भरी थी, देग में बैठाया गया । देग को आग लगाई गई उबलते पानी में दयाला जी की शहादत हुई ।
भाई सतीदास के शरीर पर रुई लपेटकर आग लगा दी गयी, पर उसने भी सनातन धर्म त्याग कर इस्लाम कबूल करने से इनकार कर दिया ।
और इससे अधिक शर्म की बात क्या होगी । मुगलों के शासन समाप्त होने के बाद आज भी नई दिल्ली में ये गुरुओं के, हमारे पूर्वजों के हत्यारे औरंगजेब, शाहजहाँ, बाबर आदि के नाम से रोड है वहाँ से ये राजनेता दिन में दस बार गुजरते हैं। लेकिन सत्ता मद में अंधे इन लोगों ने सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए इन महान आत्माओं की कुर्बानीयों को दरकिनार कर दिया ।
मुझे गर्व है अपने पूर्वजों और अपनी मातृभूमि पर जहाँ देशभक्त अपने लिए नहीं अपनी मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करते हैं ।
भारत माता की जय ।
-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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