☀ ध्यान रहे, चिल्लाना नहीं ☀
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एक बार एक सन्त अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा कि "हम गुस्से में चिल्लाते क्यों हैं ? जब दो लोग एक-दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं ?
शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक शिष्य ने उत्तर दिया - "गुरु जी, उस समय हम अपनी शान्ति खो चुके होते हैं । इसलिए चिल्लाने लगते हैं ।"
सन्त ने मुस्कुराते हुए कहा - "दोनों लोग एक-दूसरे के काफी करीब होते हैं तो फिर धीरे-धीरे भी तो बात कर सकते हैं । आखिर वे चिल्लाते क्यों हैं ?"
कुछ और शिष्यों ने भी जवाब दिया । लेकिन सन्त सन्तुष्ट नहीं हुए और उन्होंने खुद उत्तर देना शुरु किया । सन्त बोले - "जब दो लोग एक-दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियाँ बहुत बढ़ जाती हैं । जब दूरियाँ बढ़ जायें तो आवाज को पहुँचाने के लिए उसका तेज होना जरुरी है । दूरियाँ जितनी ज्यादा होंगी, उतनी तेज चिल्लाना पड़ेगा । दिलों की ये दूरियाँ ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं ।"
सन्त ने आगे कहा - "जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वे एक-दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बातें करते हैं । प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुँचाने के लिए चिल्लाने की जरुरत नहीं होती ।
जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह फुसफुसा कर भी एक-दूसरे तक अपनी बात पहुँचा लेते हैं । इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि फुसफुसाने की जरुरत भी नहीं पड़ती । एक-दूसरे की आँख में देखकर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है ।"
शिष्यों की तरफ देखते हुए सन्त बोले - "अब, जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें । शान्त चित्त और धीमी आवाज में ही बात करें । ध्यान रखें कि कहीं दूरियाँ इतनी न बढ़ जायें कि वापिस आना ही मुश्किल हो जाये ।"
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एक बार एक सन्त अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा कि "हम गुस्से में चिल्लाते क्यों हैं ? जब दो लोग एक-दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं ?
शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक शिष्य ने उत्तर दिया - "गुरु जी, उस समय हम अपनी शान्ति खो चुके होते हैं । इसलिए चिल्लाने लगते हैं ।"
सन्त ने मुस्कुराते हुए कहा - "दोनों लोग एक-दूसरे के काफी करीब होते हैं तो फिर धीरे-धीरे भी तो बात कर सकते हैं । आखिर वे चिल्लाते क्यों हैं ?"
कुछ और शिष्यों ने भी जवाब दिया । लेकिन सन्त सन्तुष्ट नहीं हुए और उन्होंने खुद उत्तर देना शुरु किया । सन्त बोले - "जब दो लोग एक-दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियाँ बहुत बढ़ जाती हैं । जब दूरियाँ बढ़ जायें तो आवाज को पहुँचाने के लिए उसका तेज होना जरुरी है । दूरियाँ जितनी ज्यादा होंगी, उतनी तेज चिल्लाना पड़ेगा । दिलों की ये दूरियाँ ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं ।"
सन्त ने आगे कहा - "जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वे एक-दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बातें करते हैं । प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुँचाने के लिए चिल्लाने की जरुरत नहीं होती ।
जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह फुसफुसा कर भी एक-दूसरे तक अपनी बात पहुँचा लेते हैं । इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि फुसफुसाने की जरुरत भी नहीं पड़ती । एक-दूसरे की आँख में देखकर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है ।"
शिष्यों की तरफ देखते हुए सन्त बोले - "अब, जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें । शान्त चित्त और धीमी आवाज में ही बात करें । ध्यान रखें कि कहीं दूरियाँ इतनी न बढ़ जायें कि वापिस आना ही मुश्किल हो जाये ।"
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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🚩सनातन संस्कृति संघ ट्रस्ट, सनातन धर्म- संस्कृति व स्वदेशी के प्रचार- प्रसार के लिए कार्यरत संगठन |
स्वदेशी स्वाभिमान, राष्ट्र- धर्म, संस्कृति की रक्षा व सम्वर्धन, गौ आधारित अर्थव्यवस्था एवं गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था की पुनर्स्थापना के लिए सनातन संस्कृति संघ के सदस्य बने |
🚩भारत स्वाभिमान दल, स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए तथा देश के अमर बलिदानियों के सपनों को पूरा करने के लिए भारत स्वाभिमान दल से जुड़े |
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वन्दे मातरम्
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