मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

वेदों में है गौ हत्यारों के लिए मृत्युदंड का विधान

बहुत से लोग पूछते हैं कि वेद में गौहत्या करने वाले के लिए क्या आदेश है? इसलिए हमने वेदों को खंगाला की वेद में गौहत्या करने
वाले के लिए क्या आदेश है? गौहत्यारे के लिए मृत्युदण्ड का विधान वेदों में है हमें इसके कई प्रमाण मिले| समस्त वेद गौमाता की
महिमा गाते हैं, और कुछ गौमांस खाने वाले और कम्युनिस्ट वेदों में गौमांस खाने की बात कहते हैं, ऐसे धूर्तों ने वेद का एक भी मन्त्र नहीं पढ़ा ….
वेद सनातन धर्म का आधार हैं, देखिये वेद गौहत्या पर क्या कह रहे
हैं, ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए :-
यः पौरुषेयेण क्रविषा समङ्क्ते यो अश्व्येन पशुना यातुधानः|
यो अघ्न्याया भरति क्षीरमग्ने तेषां शीर्षाणि हरसापि वृश्च||
~अथर्ववेद 8.3.15/ ऋग्वेद 10.87.16
अर्थात जो मनुष्य, घोड़े या अन्य पशुओं जैसे गाय के मांस को खाता है तथा दूध देने वाली कभी न मारने योग्य अघ्न्या गायों के दूध को हर लेता है और प्राणियों को उसके दूध से वंचित करता है, राजा तलवार के तेज प्रहार से उनके सरों को काट दे|
यदि नो गां हंसि यद्यश्वं यदि पुरुषम्|
त्वं त्वा सीसेन विध्यामो यथा नो असो अवीरहा||
~अथर्ववेद 1.16.4
हे शत्रु! जो तू हमारी गाय को मारेगा, घोड़े को मारेगा और मनुष्य को मारेगा तो हम तुझे सीसे की गोलियों से ही बेध देंगे ताकि तू हमारे वीरों को न मार पाए|
अक्षराजाय कितवं कृतायादिनवदर्शं त्रेतायै कल्पिनं
द्वापरायाधिकल्पिनमास्कन्दाय स्भास्थाणुम् मृत्यवे गोव्यच्छमन्तकाय गोघातं
क्षुधे यो गां विकृन्तन्तं भिक्षमाणउप तिष्ठति दुष्कृताय चरकाचार्यं पाप्मने सैलगम||
~यजुर्वेद 30.18
पासों से खेलने वाले जुआरियों के बीच राजा चतुर पुरुष को नियुक्त करे| राष्ट्र के रसों (करों) को कार्य व्यवस्था के लिए लेने के लिए मुख्य
पदाधिकारी को नियुक्त करे | गौ आदि कल्याणकारी पशुओं पर कष्टदायी चेष्टा करने वाले को मृत्युदंड दे दो| गौ को मारने वाले पुरुष को अंत कर देने वाले जल्लाद के हाथ सौंप दो| जो अन्न की भीख मांगता हुआ प्रजाजन उपस्थित हो तो उसकी भूख की निवृत्ति के लिए कृषक को नियुक्त करो| भोज्य पदार्थों के उपर आचार्य को नियुक्त करो जो पुष्टिकारक भोजन का उपदेश करे और बुरे भोजन की हानियाँ बताता रहे, इससे लोग बुरे आचार-व्यवहार को छोडकर उत्तम आहार-विहार करना सीख जाएँगे| पाप कार्य को रोकने के लिए दुष्ट पुरुषों के संतानों, शिष्यों तथा साथियों को भी दण्डित करो|
देखिये सिद्ध हुआ की वेद में गौहत्यारे के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है……
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पंडित, पुजारी बनने के ब्राह्मण होना जरूरी है: पंडित और पुजारी तो ब्राह्मण ही बनेगा, लेकिन उसका जन्मगत ब्राह्मण होना जरूरी नहीं है। यहां ब्राह्मण से मतलब श्रेष्ठ व्यक्ति से है न कि जातिगत व्यक्ति से। आज भी मनु की व्यवस्था अनुसार सेना में धर्मगुरु पद के लिए जातिगत रूप से ब्राह्मण होना जरूरी नहीं है बल्कि योग्य होना आवश्यक है। ऋषि दयानंद की संस्था आर्यसमाज में हजारों विद्वान हैं जो जन्म से ब्राह्मण नहीं हैं। इनमें सैकड़ों पूरोहित जन्म से दलित वर्ग से आते हैं।
शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम।
क्षत्रियाज्जातमेवं तु विद्याद्वैश्यात्तथैव च।
(10/65) महर्षि मनु कहते हैं कि कर्म के अनुसार ब्राह्मण शूद्रता को प्राप्त हो जाता है और शूद्र ब्राह्मणत्व को। इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य से उत्पन्न संतान भी अन्य वर्णों को प्राप्त हो जाया करती हैं। विद्या और योग्यता के अनुसार सभी वर्णों की संतानें अन्य वर्ण में जा सकती हैं, आज भी संसार के सभी लोकतांत्रिक देश मनु के इसी आदेश का पालन कर रहे है। 

-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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