आत्मविश्वास एवं शान्ति
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खुश रहें और डिप्रेशन को दूर रखें । डिप्रेशन एक डिसऑर्डर है । इस स्थिति में उदासी की भावना काफी लम्बे समय तक बनी रहती है । लम्बे समय तक उदास और जीवन से नाखुश रहने पर नकारात्मक भाव बढ़ने लगते हैं । इस नकारात्मकता के कारण व्यक्ति कभी भी सकारात्मक बात सोच नहीं पाता और जीने की इच्छा कम होने लगती है ।
जो व्यक्ति डिप्रेशन में होता है, वह अपना एनर्जी लेवल लगातार घटता हुआ महसूस करता है । ऐसे ही नकारात्मक भावों को डिप्रेशन कहते हैं ।
डिप्रेशन के लक्षण :
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लम्बे समय तक दु:खी रहना । बेचैन रहना । किसी न किसी वजह से मूड़ हमेशा खराब रहना ।
जीवन में कोई सकारात्मक भाव न होना ।
जीवन को एक बोझ की तरह मानना ।
जो बातें और कार्य पसन्द हैं, उनकी ओर रुचि कम होना ।
शारीरिक रुप से भी खुद को कमजोर महसूस करना ।
नींद न आना ।
खान-पान अनियमित हो जाना ।
लगातार उदासी के कारण सुसाइड के ख्याल आना या सुसाइड की कौशिश करना ।
इसलिए ध्यान रखें :
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डिप्रेशन को दूर करने का सबसे बड़ा तरीका है, आत्मविश्वास बनाए रखें । आत्मविश्वास बनाए रखने से डिप्रेशन पर काबू पाया जा सकता है । खुद पर विश्वास रखें कि बुरा समय जल्दी ही दूर हो जाएगा ।
किसी भी परिस्थिति में एनर्जी लेवल कम नहीं होने देना चाहिए । खान-पान और नियमित दिनचर्या का पूरा ध्यान रखें ।
हर हाल में खुश रहें । खुशी ही अच्छी सेहत का मूल मन्त्र है । अपने आस-पास खुशी का वातावरण बनाए रखें । अच्छी किताबें पढ़ें । अच्छे धारावाहिक या अच्छी फिल्में देखें, जो सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हों । ऐसे लोगों के सम्पर्क में रहें, जो आपको हमेशा खुशी देते हों ।
यदि डिप्रेशन हावी हो रहा है तो अपनी जीवन शैली में थोड़ा बदलाव करें । काम करने के तरीकों में बदलाव करें । वर्किंग लाइफ में छोटे-छोटे टारगेट बनाएं । छोटे-छोटे टारगेट पूरे होने लगेंगे तो धीरे-धीरे आत्मविश्वास फिर से बढ़ने लगेगा और डिप्रेशन दूर हो जाएगा ।
घर-परिवार के लोगों से और अच्छे दोस्तों से अपने डिप्रेशन को लेकर बात करें । दोस्तों के साथ और परिवार के साथ बात करने से डिप्रेशन दूर होता है ।
नियमित रुप से प्राणायाम एवं योग करते रहें ।
यदि बहुत से प्रयासों के बाद भी डिप्रेशन दूर नहीं हो पा रहा है तो भागवत कथा या रामकथा में पहुँचकर सन्तों का सत्संग सुनें । परमात्मा की मंगलमयी कथा व्यक्ति के जीवन से अज्ञान रुपी अन्धकार दूर करती है और ज्ञान रुपी दिव्य प्रकाश भरकर नव जीवन प्रदान करती है । भागवद् कृपा से आत्मिक शान्ति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है । धार्मिक कार्य करने से उदासी भी दूर होती है |
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वन्दे मातरम्
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