1.जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातः उठकर गौमाताजी को सर्वदेवमयी मानकर श्रद्धा से प्रणाम करे।
2.प्रतिदिन गौमूत्र में श्री गंगा जी की उपस्थिति जानकर प्रातः गौमूत्र का पान करें।
3.दूध देती गोमाताजी के दो थन का दूध गोवत्स को पिलाकर शेष दो थन का दूध ही दुहे।
4.प्रतिदिन भोजन से पूर्व उत्तम् रोटी पात्र में रखकर घी गुड़ से युक्त कर श्रद्धा से गोमाताजी को जिमावें।
5.गोमाताजी को सदा स्वच्छ जल पिलावें। भैंस इत्यादि पशुओं का झूठा जल या बासी जल नहीं पिलावें।
6.उत्तम चारे और दाने से गोमाताजी को तृप्त करें।
7.प्रतिदिन गोमाताजी को सहलावें और उनसे वार्तालाप करें।
8.गौ माताजी को जंगल में या गोचर क्षेत्र में साथ जाकर चरावें ।उन्हें अकेला चरने को नहीं भेजें ।
9.गौ माताजी के वृद्ध होने पर भी उनकी पूर्व की भांति ही उत्तम सेवा करें । वृद्ध गोमाताजी को घर से निकालें नहीं या गोमाताजी को बेचें नहीं ।
10.गोमाताजी से प्राप्त दूध,दही एवम् घी का उपयोग करें, भैंस का नहीं ।
जय गोमाता
जय गोपाल
-विश्वजीत सिंह अनन्तजय गोपाल
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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वन्दे मातरम्
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