शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

क्या सत्य में ही गाँधी जी ने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी ?

क्या सत्य में ही गाँधी जी ने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी ?

गांधी जैसे कालनेमिवादी नेताओं के कारण ही राष्ट्र विभाजन के मूल्य पर भारतवासियों को 15.08.1947 के अशुभ दिवस पर धर्मनिरपेक्ष काले अंग्रेजों का दास बनने को विवश होना पड़ा.

लगभग 70 वर्षों बाद भी इस दासता से मुक्ति क्षीण ही दृष्टिगोचर होती है.

"भारत माता की जय" बोलने पर भी भारत के भावी कर्णधार पीटे जाते हैं.

"भारत मुर्दाबाद" बोलने वाले देशद्रोहियों को महिमामंडित किया जाता है.
उन्हें नायक बनाकर प्रस्तुत किया जाता है.

धर्मनिरपेक्ष काले अंग्रेजों की दासता के हम भारतवासी अभिशप्त हो चुके हैं,अभ्यस्त हो चुके हैं.

सड़कों पर निकलने का भारतवासियों का साहस मृत प्राय हो चुका है.

महाराणा प्रताप, शिवाजी, गोकुल सिंह, मंगल पाण्डेय, लक्ष्मी बाई का स्मरण करो,,

जागो भारतवासियों, जागो !!

धर्मनिरपेक्ष काले अंग्रेजों की दासता से मुक्त होने की दिशा में कार्य करों, अन्यथा आने वाली तुम्हारी नस्ले विधर्मी बनके ही भारत में रहने को विवश होगी,,

-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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