हम भारतीय माँ बहनों का पूजन अर्चन कर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नव-वर्ष के रूप में मनाते हैं, हमें उस गंदगी से लोहा लेना है जो इस देश की माँ बहनों को कलंकित कर उन्हें ईसाई (मेकोले) की शिक्षा के सहारे वेश्या बनाने का गोरख-धंधा बड़े पैमाने पर करते है, चाहें वेलेंटेंन-डे हो या चुम्मा-चाटी आयोजन या ईसाईयों का न्यू-इयर्स हो –ये अब भारत के लिए कोढ़ बन चुके हैं, अभी हाल ही मैं JNU में जो चंद- वैश्या-समाज, देशद्रोही अपने समर्थकों की मदद से- देश को बर्बाद करने का सपना लिए बैठे हैं , ये कैसे एक विषधर नाग पैदा कर कर पुरे भारत को अस्थिर कर अपनी नीचता का परिचय देते है, जो भारतीय समाज और चरित्र को नीचा दिखा कर चरित्रहीन समाज और गद्दार पैदा करते हैं, उनको अब देश भालीभाती जान चुका है, जो देश में JNU, FTII (फिल्म & टेलीविज़न संस्थान), क्रिकेट, मेडिकल, में जो इनके द्वारा ईसाई जश्न का आयोजन कर ,, जो नंगा नाच होता है अब वो भी अछुता नहीं है! इस प्रश्नों को उठा कर और आप सभी की जागरूकता और सराहना से हम इन कमीनों के चेहरों को अच्छी तरह समझ सके, और इनकी सही पहचान उजागर कर इनके नीच चरित्र और दोगली नीति और गहरी चालों पर प्रकाश डालें ?
मित्रों ये देव भूमि है हमें गर्व होना चाहिए की इस पवित्र भूमि पर हमने जन्म लिया और जो ऋषियों का वैदिक विज्ञान हम भारतियों को मिला है वो भी विश्व में सबसे ऊँचा है, इसके चरित्र, ज्ञान, और वनस्पति, युक्त औषधीय खानपान पूरी दुनियाँ को आज भी अपनी उंगलियों पर नचाता है, पर दुर्भाग्य से जब कोई उन महान संस्कारों को मिटाने और बर्बाद करने के मनसूबे बना चूका हो तो हमें उन्हें जड़-मूल से उखड फेकना चाहिए, चाणक्य लिखते है कि ऐसे लोगों को कठोर दण्ड देना चाहिए, ताकि कोई अन्य ऐसा करने के बारे में सोच भी न सके | हम चाहे कितना भी हिन्दू हिन्दू चिल्ला ले, पर जब तक असली शत्रु को पहचानकर उसको समाप्त नहीं करेंगे, तब तक सब व्यर्थ है ! यही हिन्दू हिन्दू चिल्लाने का काम हम पिछले 1100 वर्षों से करते आ रहे है, होता कुछ भी नहीं बस पेट भरते ही सब शांत हो जाते हैं,, अत्याचार करने वालों नें मंदिर तोड़ दिया, हिन्दुओं का धर्मान्तरण किया, ये प्रश्न उठाते है ? बस फिर सब अपने अपने घर ??? और फिर एक नये आयोजन के लिए ? हम अब न जाने कैसे ये नवरात्र पर्व मना लेते हैं उससे अधिक वो दरिंदे इस देश की माँ-बहनों को ईसाई वेश्या और लव-जिहाद में शामिल कर डालते है ----कैसे ?? यही मेरी आवाज़ है भारतीयों को झझकोर और जगाने की
अब देखना है की इस सनातन वैदिक नववर्ष को कितने लोग और कैसे मनाते हैं जबकि ईसाई न्यू-इयर्स को जबकि उस दिन शराब, वासना और फूहड़ पन का ऐसा नंगा नाच होता है विदेशी वेश्याओं, JNU, FTII (फिल्म & टेलीविज़न संस्थान) से लेकर बियोरोक्रेट्स विदेशी स्थानीय व्यापारी, मंत्री से लेकर संतरी दुआओं का अम्बार लगा देते हैं, दबा कर इन संगठनों में अय्याशी और नंग-पाना और नीचता की पराकाष्ठ होती है और हम गर्व से कहते है हैप्पी-न्यू-ईयर, सारा-का सारा झूठ और छल का कारोबार के साथ मौका-परस्ती व भोग के सहारे फायेदा उठाना ??
जबकि नव वर्ष में तप-तपस्या से उन शक्तियों का पूजन किया जाता है जो पुरे साल हमें समृद्धि आशीर्वाद और सरल जीवन जीने का चरित्र देती है जो शैलजा, शिखर पूजन जहाँ से ऋतुयें नियंत्रित होती हैं ! ब्रहम-चर्या पृथ्वी की अभोद्य सम्पदा का पूजन, चन्द-घटा अमावस्या के बाद पहला चन्द्र दर्शन जो मानव पिंड में मन के रूप में विधमान है सही निर्णय लेने का संकल्प शक्ति लेना और कुश-अंड जो इन दिव्य शक्तियों के द्वारा स्वयं-उत्पन्न होता है जो आहार का धोतक है और स्कंध माता जो विचार को जन्म देती है पूरा का पूरा स्कंधपुराण लिखा गया है जो चरित्र-बल दायनी है काल-रात्र बुरे वक्त से बचाना और संघर्ष करने का बल और महा-गौरी अर्थात शिव-शिखर पर जमी बर्फ जो ऋतुओं के सहारे सम्पूर्ण पृथ्वी से उठ कर शैल-शिखा पर जमती है और पवित्र को कर पूरी पृथ्वी सहित मानव को जीवन देती है महा-गौरी पूजन और चमत्कारी शिद्धियां देने वाली देवी और बाद में सम्पूर्ण देवी दुर्गा जो इन ईसाई देत्यों, और कुरानीको जो मौका-परस्त खून के प्यासे दरिन्दे दानव का वध करने वाली माँ को अबोध बालिकाओं को माँ कर उनके माध्यम से उन शक्तियों को पूजा और मनाया जाता है क्या ये विज्ञान है किसी अन्य के पास हमें गर्व होना चाहिए
जब ये समस्त शक्तियां अपना नया कलेवर लिए इस पूजा का इस धरती पर प्रतिक्षा करती है इस नवीन नूतन वर्ष पर तो पूरी मानवता को इसका लाभ मिलता है
---खुद जागिये और देश को जगाएं देत्यों और राक्षसों का अनुसरण न करें ?
जिनके अधीन सरकारें गुलाम बनकर काम करती है |
सनातन वैदिक नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा व नवरात्र की हार्दिक शुभकामनायें
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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वन्दे मातरम्
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