सोमवार, 11 अप्रैल 2016

एक तथाकथित मूलनिवासी की कहानी

बांग्ला में योगेन्द्र को अक्सर जोगेंद्र कहा जाता है | बंगाल का मूलनिवासी नेता था जोगेंद्र नाथ मंडल | आपने उसका नाम नहीं सुना होगा | आम तौर पर मूलनिवासी चिन्तक उनका नाम लेने से कतराते नजर आयेंगे | आजकल जो जय भीम के साथ जय मीम जोड़ने की कवायद चल रही है ये नाम उसकी नींव ही खोद डालता है | इसलिए इसके बारे में जानने के लिए आपको खुद ही पढ़ना पड़ेगा |
उसका जन्म ब्रिटिश बंगाल में 29 जनवरी 1904 को हुआ था | पकिस्तान के जन्मदाताओं में से वो एक था | सन 1940 में कलकत्ता म्युनिसिपल कारपोरेशन में चुने जाने के बाद से ही मुस्लिम समुदाय की उसने खूब मदद की | उसने बंगाल की ए.के. फज़लुल हक़ और ख्वाजा नज़ीमुद्दीन (1943-45) की सरकारों की खूब मदद की और 1946-47 के दौरान मुस्लिम लीग में भी उसका योगदान खूब था | इस वजह से जब मोहम्मद अली जिन्ना को अंतरिम सरकार के लिए पांच मंत्रियों का नाम देना था तो एक नाम उसका भी रहा |

जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान का पहला कानून मंत्री था | जोगेंद्र नाथ मंडल के इस पद को स्वीकारने से कांग्रेस के उस निर्णय की बराबरी हो जाती थी जिसमें कांग्रेस ने अपनी तरफ से मौलाना अबुल कलाम आजाद को मनोनीत किया था |

आप सोचेंगे कि जोगेंद्र नाथ मंडल ने ऐसा क्या किया था कि जिन्ना ने उसे चुना ? 3 जून 1947 की घोषणा के बाद असम के सयलहेट जिले को मतदान से ये तय करना था कि वो पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा या भारत का | उस इलाके में हिन्दुओं और मुस्लिमों की जनसँख्या लगभग बराबर थी | चुनाव में नतीजे बराबरी के आने की संभावना थी | जिन्ना ने मंडल को वहां भेजा | मंडल ने षड़यन्त्र रचकर हिन्दू समाज के विरूद्ध हिन्दू समाज के अभावग्रस्त वर्ग को दलित कहकर अलग कर दिया और मुस्लिमों से मिले पैसे के बल पर उनका मत, मंडल ने पकिस्तान के समर्थन में झुका दिया | मतों की गिनती हुई तो सयलहेट पकिस्तान में गया | आज वो बांग्लादेश में है |

जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान का पहले श्रम मंत्री भी था | सन 1949 में जिन्ना ने उसे कॉमनवेल्थ और कश्मीर मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंप दी थी | इस 1947 से 1950 के बीच ही पकिस्तान में हिन्दुओं पर लौहमर्षक अत्याचार होने शुरू हो चुके थे | दरअसल हिन्दुओं को कुचलना कभी रुका ही नहीं था | बलात्कार आम बात थी | हिन्दुओं की स्त्रियों को उठा ले जाना आम बात थी | हिन्दुओं की हत्याएं होती रही | जमीन, घर, स्त्रियाँ लूटी जाती रही | एक समय ऐसा आया जब जोगेंद्र नाथ मंडल का परिवार व उसके समर्थक तथाकथित मूलनिवासी भी इस्लामिक जिहादियों की नजरो से बच न पाये | 

जोगेन्द्र नाथ ने कार्यवाही हेतु बार- बार चिट्ठीयां लिखी, पर इस्लामिक सरकार को न तो कुछ करना था, न किया | आखिर उसे समझ आ गया कि उसने किसपर भरोसा करने की मूर्खता कर दी है | जिन्ना की मौत होते ही 1950 में जोगेंद्र नाथ मंडल भारत लौट आया | पश्चिम बंगाल के बनगांव में वो गुमनामी की जिन्दगी जीता रहा | अपने किये पर 18 साल पछताते हुए आखिर 5 अक्टूबर 1968 को उसने गुमनामी में ही आखरी साँसे ली |
मण्डल तो वापस आ गया लेकिन उनके गरीब अनुयायी वहीं रह गये बहुत से मार दिये गये बाकी मुसलमान बन गये, मुसलमान बनने पर भी उनकी समस्याओं का अन्त नहीं हुआ, उन्हें मुसलमानों में अरजल जाति कहा गया, तथा उनसे मैला उठवाने जैसे काम करवाये गये जो लोग कहते है मुस्लिमों में जातिवाद नहीं वो उनसे अशरफ, अजलाफ और अरजल समुदाय के बारे मे पूछें, जो जाती इतिहास पर धूल फेंकती है भविष्य उनपर अंगारे बरसाता है अत इनकी असलियत समझें।
अब आपको शायद ये सोचकर थोड़ा आश्चर्य हो रहा होगा कि कैसे आपने कभी इस नेता का नाम तक नहीं सुना ? राजनीति में तो अच्छी खासी दिलचस्पी है ना आपकी ? अपने फायदे के लिए कैसे एक समुदाय विशेष ने एक हिन्दू को मूलनिवासी दलित बनाकर इस्तेमाल किया था उसका ये इकलौता उदाहरण भी नहीं है | आज भी मूलनिवासी चिन्तक आपका ब्रेनवाश करके आपको सिर्फ एक वोट बनाना चाहते हैं !
बाकी आपको किसी विदेशी फण्ड पर पलने वाले की पूँछ पकड़ कर चलना है, या खुद से स्वतन्त्र चिंतन करना है, ये फैसला तो आपको खुद ही करना होगा |

-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

1 टिप्पणी:

  1. यह नई जानकारी है आपने विस्तार में बताया और हमारे तथाकथित नेता भी जानते होंगे पर अपने लालच के कारण देश और समाज का घोर अहित करदेते है ऐसे लोगो पर धिक्कार है 😺👿👾😏😛

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