शुक्रवार, 20 मई 2016

अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम

अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम;
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।।

संत मलूक दास जी कह रहै है अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि पंछी तथा अजगर कुछ काम नहीं करते, तुम भी कुछ काम मत करो, यह इसका अर्थ नहीं है।

अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम

देखों पंछी कितने काम में लगे हुए हैं! घास- पात ला रहे है, घोंसले बना रहे है, गेहूं, चावल, दाल आदि भोजन इकट्ठा करके स्वयं खा रहे है, अपने बच्चों को खिला रहे है, काम तो बहुत कर रहे है। अजगर भी सरक रहा है। अजगर भी काम में लगा है। लेकिन मलूक दास का अर्थ कुछ और है, वह भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिये गये समत्व योग के दिव्य ज्ञान को सरल शब्दों में समझा रहे है।

मलूक दास यह कह रहे हैं कि पंछी इतना काम कर रहे हैं फिर भी उसमें उनकी आसक्ति नहीं है, जो हो रहा है, सो हो रहा है। इसमें योजना नहीं है। इसमें अहंकार नहीं है। इसमें कर्तृत्व का भाव नहीं है। लेकिन लोग तो अपने ही ढंग से समझते हैं। लोग अपनी बुद्धि से समझते हैं। लोगों ने समझा कि यह तो आलस्य का पाठ है तो चांदर ओढ़कर सोये रहो। लेकिन यदि तुम चांदर ओढ़कर भी सोये तो तुम्हीं कर्ता हो, क्योंकि उसमें तुम्हारी आसक्ति है।

दास मलूका कह गए, सबके दाता राम

मलूक दास कह रहे है परमात्मा को करने दो, तुम मत करो, यह गूढ़ शब्द है, इसका अर्थ होता है सब कुछ परमात्मा को समर्पित कर देना, परमात्मा के शरणागत हो जाना। जो हाथ दिखाई नहीं पड़ते उनमें अपने को छोड़ दो। जिसने सब सम्हाला है, तुम्हें भी सम्हाल लेगा। फिर तुम काम तो करोगे, लेकिन उसमें तुम्हारी आसक्ति नहीं होगी।

छोटी सा जीवन है तुम्हारा। एक दिन मरे, दूसरे दिन गये। दो दिन का जीवन है। इतना सब कुछ उस विराट परमात्मा ने सम्हला हुआ है, तुम अपने इस दो दिन के जीवन को छोड़ नहीं सकते इस विराट परमात्मा पर? और न छोड्कर भी क्या कर लोगे ! मरोगे। न तो जन्म तुमने स्वयं लिया है, न मौत तुम ले सकोगे। जन्म भी हुआ, मौत भी होगी, बीच में ये थोड़े से दिन हैं, तुम नाहक कर्तापन का उत्पात कर रहे हो।

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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