सोमवार, 9 मई 2016

विदेशी मुस्लिम आक्रांताओं का वध कर राष्ट्र का स्वाभिमान जगाने वाले राजा सुहेल देव

मुस्लिम आक्रमणकारी सालार मसूद गाजी को बहराइच (उत्तर प्रदेश) में उसकी एक लाख बीस हजार सेना सहित नरक में पहुंचाने वाले महान क्रान्तिकारी राजा सुहेलदेव का जन्म श्रावस्ती के राजा त्रिलोकचंद के वंशज मंगलध्वज (मोरध्वज) के घर में माघ कृष्ण 4, विक्रम संवत 1053 (सकट चतुर्थी) को हुआ था। अत्यन्त तेजस्वी होने के कारण इनका नाम सुहेलदेव (चमकदार सितारा) रखा गया।
विक्रम संवत 1078 में इनका विवाह हुआ तथा पिता के देहांत के बाद वसंत पंचमी विक्रम संवत 1084 को ये राजा बने। इनके राज्य में आज के बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, बाराबंकी, फैजाबाद तथा श्रावस्ती के अधिकांश भाग आते थे। बहराइच में बालार्क (बाल+अर्क = बाल सूर्य) मंदिर था, जिस पर सूर्य की प्रातःकालीन किरणें पड़ती थीं। मंदिर में स्थित तालाब का जल गंधकयुक्त होने के कारण कुष्ठ व चर्म रोग में लाभ करता था। अतः दूर-दूर से लोग उस कुंड में स्नान करने आते थेे।

महमूद गजनवी ने भारत में अनेक राज्यों को लूटा तथा सोमनाथ सहित अनेक मंदिरों का विध्वंस किया। उसकी मृत्यु के बाद उसका भांजा सालार मसूद गाजी, सैयद हुसैन गाजी, सैयद हुसैन खातिम, सैयद हुसैन हातिम, सुल्तानुल सलाहीन महमी, बढ़वानिया, सालार, सैफुद्दीन, मीर इजाउद्दीन उर्फ मीर सैयद दौलतशाह, मियां रज्जब उर्फ हठीले, सैयद इब्राहिम बारह हजारी तथा मलिक फैसल जैसे क्रूर इस्लामिक साम्राज्यवादी साथियों को लेकर भारत पर आक्रमण कर दिया, वो भारत को इस्लामिक राज्य अर्थात दारूल इस्लाम बनाना चाहता था ।

वह सिन्ध, पंजाब, हरियाणा को रौंदता हुआ उत्तर प्रदेश के बहराइच जा पहुंचा। उसका अगला लक्ष्य बालार्क सूर्य मन्दिर तौड़कर मस्जिद बनाना था | रास्ते में भी उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम किया, लाखों हिन्दुओं को इस्लाम में धर्मान्तरित किया और लाखों हिन्दू औरतों के बलात्कार हुए, हजारों मन्दिरों व गुरूकुलों का विध्वंश कर दिया गया तथा इस्लाम के जिहाद की आंधी तेजी से चलने लगी |

ऐसे भयानक संकट के समय में उससे टकराने के लिए राजा सुहेलदेव भी पहले से तैयार थे। उन्होंने निकट के अनेक राजाओं के साथ मिलकर उससे लोहा लिया। एक लाख बीस हजार की इस्लामिक सेना को गाजर मूली की तरह काट दिया गया, कुटिला नदी के तट पर राजा सुहेलदेव के नेतृत्व में हुए इस धर्मयुद्ध में उनका साथ देने वाले राजाओं में प्रमुख थे रायब, रायसायब, अर्जुन, भग्गन, गंग, मकरन, शंकर, वीरबल, अजयपाल, श्रीपाल, हरकरन, हरपाल, हर, नरहर, भाखमर, रजुन्धारी, नरायन, दल्ला, नरसिंह, कल्यान आदि। वि.संवत 1091 के ज्येष्ठ मास के पहले गुरुवार के बाद पड़ने वाले रविवार (10.6.1034 ई.) को राजा सुहेलदेव ने उस आततायी पिशाच का वध कर दिया। देश के पूर्वोत्तर भाग की जनता तब से लेकर आज तक महाराजा सुहेल देव का विजयोत्सव चित्तौरा (बहराइच) में ज्येष्ठ मास के प्रथम रविवार को मनाती आ रही है। इस विजय के परिणामस्वरूप अगले 200 साल तक मुस्लिम हमलावरों का इस ओर आने का साहस नहीं हुआ।

विदेशी इतिहासकार शेख अब्दुर्रहमान चिश्ती ने सालार मसूद की जीवनी "मीरात-ए-मसूदी" में लिखा है "इस्लाम के नाम पर जो अंधड़ अयोध्या तक जा पहुंचा था, वह सब नष्ट हो गया। इस युद्ध में अरब-ईरान के हर घर का चिराग बुझा है। यही कारण है कि दो सौ वर्षों तक मुसलमान भारत पर हमले का मन न बना सके।"

जहां आज सैय्यद सालार मसूद, जिसे गैर मुस्लिमों की हत्या करने पर गाजी की उपाधि दी गई थी, की दरगाह है, वहां 11वीं शताब्दी में एक बड़ा जंगल था। उस जंगल के बीच एक तालाब था, जिसे सूर्यकुण्ड कहा जाता था। उस समय सूर्यकुण्ड के किनारे भगवान सूर्य की एक बड़ी मूर्ति थी, जहां जेठ (ज्येष्ठ) माह के पहले रविवार को बहुत बड़ा मेला लगता था, जिसमें सम्पूर्ण भारत के लोग आते थे। ऐसी मान्यता थी कि उस दिन इस सूर्यकुण्ड में उफान आता था, जिसके पानी से नहाने पर सभी प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते थे। यहां तक कि कुष्ठ रोगी भी ठीक हो जाते थे। जब युद्ध भूमि में राजा सुहेल देव के तीर से सालार मसूद मारा गया तो वह जिस घोड़े पर बैठा था उसी पर लटक गया। मसूद का घोड़ा चलते-चलते उसे इसी सूर्यकुण्ड के पास ले आया। यहीं मसूद का पड़ाव भी था, जहां उसे दफना दिया गया। सालार मसूद की मृत्यु के लगभग 300 साल बाद एक और मुगल आक्रांता फिरोजशाह तुगलक ने बालार्क ऋषि के आश्रम को ध्वस्त कर और सूर्यकुण्ड को पाटकर यहां मसूद की दरगाह बनवाई और उसे इस्लाम का सच्चा सिपाही घोषित कर दिया। तब से आज तक इस स्थान को लेकर निरन्तर संघर्ष चल रहा है।

आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे, हिन्दू औरतों के बलात्कारी, मूर्ती भंजक, दुर्दांत दानव को हिन्दू समाज एक देवता की भांति पूजता है, सालार गाजी हिन्दुओं का पीर गाजी बाबा हो गया है ? जिसने जितने अधिक हिन्दुओं का कत्लेआम किया, हिन्दुओं को इस्लाम में धर्मान्तरित किया, वो उतना बड़ा पीर | जबकि हिन्दूवीर शिरोमणि राजा सुहेलदेव केवल कुछ जातियों के नायक बनकर रह गये है !

कालान्तर में सालार मसूद गाजी के साथ कई अंधविश्वास जुड़ गये। वह चमत्कारी तालाब तो फिरोजशाह तुगलक द्वारा नष्ट कर दिया गया था; पर एक छोटे पोखर में ही लोग चर्म रोगों से मुक्ति के लिए डुबकी लगाने लगे। ऐसे ही अंधों को आंख और निःसंतानों को संतान मिलने की बातें होने लगीं। हिन्दुओं की इसी मूर्खता को देखकर तुलसी बाबा ने कहा था –
लही आंख कब आंधरो, बांझ पूत कब जाय
कब कोढ़ी काया लही, जग बहराइच जाय।।

सालार मसूद की दरगाह आज भी भारत की स्वतंत्रता और हिन्दुओं की आस्था के लिए चुनौती ही नहीं बल्कि गुलामी की प्रतीक भी है।जैसे राममंदिर निर्माण और काशी, मथुरा के मंदिरों की मुक्ति आवश्यक है वैसे ही बहराइच के सूर्यकुण्ड मंदिर की मुक्ति के लिए भी हिन्दुओं को संगठित होने की आवश्यकता है।

इस्लामिक जिहादी आक्रांताओं पर विजय प्राप्त कर भारतीयों का सुप्त स्वाभिमान जगाने वाले व हिन्दुत्व की ध्वज पताका फैराने वाले वीर हिन्दू राजा सुहेल देव जी का विजय दिवस कार्यक्रम 10 जून को भारत स्वाभिमान दल द्वारा सम्पूर्ण भारत वर्ष में मनाया जायेगा | जो मित्र इस कार्यक्रम को अपने ग्राम, विकास खण्ड, तहसील, जिले अथवा राज्य में आयोजित कर सकते है, वे हमसे सम्पर्क करें, राजा सुहेल देव जी किसी एक जाती के नायक नहीं थे, वे हम सब सनातन धर्मी हिन्दुओं के नायक थे, है और रहेंगे | हमें उनके दिखाये रास्ते पर चलकर भारतीयों का स्वाभिमान जगाते हुए अपने राष्ट्र-धर्म की रक्षा करनी है |
जय सुहेलदेव
जय सनातन धर्म
जय भारत स्वाभिमान दल
सम्पर्क: 09412458954, 08126396457

http://www.bharatswabhimandal.org


-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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वन्दे मातरम्

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