एक बार एक सच्चा मुसलमान डिप्रेशन में आकर पागल हो गया और वो डॉक्टर के पास गया।
डॉक्टर - तुम पागल कैसे हुए ?
मुसलमान - मैने अपने “मजहब” के अनुसार एक विधवा से शादी की, उसकी जवान बेटी से मेरे बाप ने सेटिंग कर ली और शादी कर ली, तो इस तरह मेरी वो बेटी - मेरी मां बन गई।
उनके घर बेटी हुई तो वह मेरी बहन हुई, मगर मैं उसकी नानी का शौहर था। इसलिए वह मेरी नवासी भी हुई।
इसी तरह मेरा बेटा अपनी दादी का भाई बन गया, और मैं अपने बेटे का भांजा।
और मेरा बाप मेरा दामाद बन गया, और मेरा बेटा अपने दादा का साला बन गया और..
फिर …
डॉक्टर - अरे नीच चुपकर…
मुझे भी पागल करेगा क्या..?
डॉक्टर - तुम पागल कैसे हुए ?
मुसलमान - मैने अपने “मजहब” के अनुसार एक विधवा से शादी की, उसकी जवान बेटी से मेरे बाप ने सेटिंग कर ली और शादी कर ली, तो इस तरह मेरी वो बेटी - मेरी मां बन गई।
उनके घर बेटी हुई तो वह मेरी बहन हुई, मगर मैं उसकी नानी का शौहर था। इसलिए वह मेरी नवासी भी हुई।
इसी तरह मेरा बेटा अपनी दादी का भाई बन गया, और मैं अपने बेटे का भांजा।
और मेरा बाप मेरा दामाद बन गया, और मेरा बेटा अपने दादा का साला बन गया और..
फिर …
डॉक्टर - अरे नीच चुपकर…
मुझे भी पागल करेगा क्या..?
इस बात को आप इस उदाहरण से भी समझ सकते है:-
जावेद ने एक ''गैर मुस्लिम'' लड़की का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा
देख करीना मैं तुमसे ''निकाह'' तो कर रहा हूँ लेकिन -----
कल कुछ ऐसा वैसा हो जाए तो 'शरीयत' के मुताबिक़ सही हो, कबूल कर लेना !
कुछ ऐसा वैसा से तुम्हारा क्या ''मतलब'' है, करीना ने पूछा ? -----
जावेद ने बताया देखो करीना, कल मेरे 'अब्बा' तुम्हारे 'शौहर' हो सकते है ,
मेरी 'खाला' तुम्हारी 'सौतन' भी हो सकती है मेरी 'चचेरी बहन' तेरी 'सास'
भी हो सकती है, मेरी 'बहन' तेरे 'बेटे की बहू' और मेरा 'फूफा' तेरा 'शौहर' हो सकता है और तो और मेरी 'खाला' तेरी 'देवरानी' और 'तेरी ननद' तेरी सास भी हो सकती है ! -----
बस रुको जावेद !
करीना ने चीखते हुए कहा - मैं समझ गयी तुम्हारे धर्म में औरत को 'ढोल' समझा जाता है और उसे कोई भी ''बज़ा'' सकता है !
इस पर जावेद ने कहा - तुम्हे जो अच्छा लगता हो कहो !. हो सकता है , तुम्हे इससे घिन्न भी आये, मगर हमारे शरीयत की यही ''ख़ूबसूरती'' है कि हमारे यहां रिश्ते नाते की कोई ''बंदिश' नहीं होती, जो जिससे चाहे निक़ाह के बाद जिस्मानि ''रिश्ता'' बना सकता है ! .....
😡😡
ऐसी होती है मुसलमानों की रिश्तेदारियां......
आप को भी ये रिश्ते समझेंने में थोड़ा मस्तिष्क पर जोर देना होगा…...
- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन
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वन्दे मातरम्
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