बैंकों के बारे में कहा जाता है कि, "अगर आपको बैंक लूटना हो तो एक बन्दूक खरीद लो और अगर पूरा शहर लूटना हो तो एक बैंक खोल लो"
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आजकल इस्लामिक बैंक की काफी चर्चा है, मोदी और उनके मित्र जफर सरशेवाला ने भारत में इस्लामिक बैंक तो खुलवा दिया लेकिन वो अभी ना ही इसकी असलियत और परिणामो से परिचित हैं और ना ही उसके साइड इफ़ेक्ट के बारे में, कोई भी ऐसा बैंक अगर वो बाहरी है या प्राइवेट तो देश के लिए खतरा ही है,
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उसमे भी शरिया कानून पर आधारित इस्लामी बैंक, शरिया का काम ही गैर मुस्लिम देशों में शरियत का प्रभाव जमाना है, इस तरह ये बैंक भारत में शरियत आधारित एक और संस्थान के रुप में खड़ा होगा,
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लोग आतंकवाद के लिए ख़ुफ़िया एजेंसियों, मुल्लों मौलवियों और आतंकी संगठनो का ही कनेक्शन जानते हैं पर कम ही लोग जानते हैं कि, सबसे बड़ा आतंकी संगठन इस्लामिक बैंक व HSBC जैसे बैंक ही हैं,
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आतंक और ड्रग्स का सारा पैसा इन्हीं बैंकों के जरिये आता जाता है और HSBC बैंक तो ड्रग्स के पैसे से ही बना था (ड्रग्स रैकेट और आतंकी हमलो को लेकर की गयी कई जांचों में इस बैंक का नाम सामने आया है)
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इसी तरह इस्लामिक बैंक है, इसका लक्ष्य इस्लामिक देशों का डेवलपमेंट कम आतंकवाद फैलाना और सऊदी अरब की इच्छाओ की पूर्ति करना ज्यादा है, आतंक की ज्यादातर फंडिंग सऊदी इसी के जरिये करता है, इस्लामिक डेवलॅपमेंट बैंक के 56 सदस्य देश हैं जिनसे जुटाए गए पैसों का प्रयोग दुनिया भर में फैले सऊदी मिशनों पर खर्च किया जाता है,
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इस बैंक पर ये भी आरोप हैं कि CAIR (Council on American–Islamic Relations) नामक संस्था को इसी ने फंड किया था, बता दें कि CAIR ही वह माध्यम है जिसके जरिये सऊदी जैसे इस्लामिक देशो के साथ मिलकर अमेरिका आतंकवाद फैलाता है,
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मोदी सरकार अनजाने में देश का बंटाधार कर ही रही है, अब इस्लामिक आतंकियों को फंड देने के लिए एक और माध्यम मिल जाएगा, ये किसी से छुपा नही है कि आतंकवाद का ज्यादातर फंड वाया सऊदी होकर ही आता है फिर सऊदी प्रभुत्व वाले इस्लामिक बैंक खोलना कहाँ की समझदारी हैं ?
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- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन
भारत के परमवैभव हेतु समर्पित। राष्ट्रीय अध्यक्ष - राष्ट्रीय सनातन पार्टी
सोमवार, 30 मई 2016
इस्लामिक बैंक देश-धर्म को बर्बाद कर देगा
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