शनिवार, 21 मई 2016

क्या सच में मौहम्मद ने अरब से अत्याचारों को दूर किया था ?

मित्रों, एक सत्य में आपको बताना चाहुँगा की मुहम्मद को लेकर मुसलमानों में जो भ्रम फैला है कि मुहम्मद ने अरब से अत्याचारों को दूर किया … केबल अत्याचारियो को मारा, समाज की बुराईयों को दूर किया, अरब में भाई- भाई का दुश्मन था, स्त्रियों की दशा सुधारी … मुहम्मद एक अनपढ़ (उम्मी ) था …. आदि ...

सत्य क्या है ? आप उस समय की जानकारियों से पता लगा सकते है … जबकि उस समय अरब में सनातन धर्म प्रचलित था, अरब समृद्ध था और स्त्रियों को पूर्ण अधिकार थे ...इसके कई प्रमाण है

१- जब मुहम्मद का जन्म हुआ तो पिता की मृत्यु हो चुकी थी ... माँ भी कुछ वर्षो बाद चल बसी ... मुहम्मद की देखभाल उनके चाचा ने की … यदि समाज में लालच , लोभ होता तो क्या उनके चाचा उनको पालते ?

२- खालिदा नामक पढ़ी लिखी स्त्री का स्वयं का व्यापार होना अरब में स्त्रियों की आजादी का प्रमाण है…

३- तीन बार शादी के बाद भी विधवा स्त्री का खुद मुहम्मद से शादी का प्रस्ताव ? स्त्रियों को स्वयं अपने लिए जीवन साथी चुनने और विधवा स्त्री होने पर भी शादी और व्यापार की आजादी …अरब के अंदर ...

४- खालिदा का स्वयं शिक्षित होना अरब में स्त्रियों को शिक्षा का प्रमाण है...

५- मुहम्मद का २५ साल का होकर ४० साल की स्त्री से विवाह ..किन्तु किसी ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया ...अरब में हर एक को आजादी थी ..कोई बंधन नहीं था....

६- मुहम्मद का धार्मिक प्रवचन देना किसी का कोई विरोध ना होना, सनातन धर्म सम्पूर्ण संसार में था और लोगो का विश्वास धर्म पर बहुत गहरा था , मुहम्मद ने जब सनातन धर्म के अंदर ही अपने धर्म का प्रचार किया था तो लोगो ने विरोध नहीं किया था ...लेकिन जब उसने सनातन धर्म का विरोध किया तो उसको मक्का छोडना पड़ा था …
मुहम्मद अरब साम्राज्यवादी था, वह चाहता था जैसे पूरब का देश (भारत) का धर्म सम्पूर्ण संसार में है और सब उसको सम्मान देते है वैसे ही वह अरब के लिए चाहता था …लेकिन जब उसको अपने ही शहर से निकला गया तो वह समझ गया की सनातन धर्म को कोई समाप्त नहीं कर सकता है, लेकिन वह इसका रूप बदल सकता है …जिससे लोगो में विद्रोह का डर भी नहीं रहेगा … जब उसने काबा को जीता और उसकी सारी ३६० मुर्तिया और शिवलिंग तोडा … उसको कुछ याद आया और उसने कुछ नीचे के भाग(शक्ति) को चांदी में करके काबा की दीवार से लगा दिया और अपनी गलती के लिए पत्थर को चूमा (क्योंकि उसका परिवार कई पीढ़ियों से इसकी रक्षा और पूजा करता आ रहा था ) और बोला तो केवल पत्थर है और कुछ और नहीं
मुहम्मद ने सनातन वैदिक धर्म के सिद्धांत को बोलना शुरू किया की अल्लाह का कोई आकार नहीं है वो निराकार है ...

७- मुहम्मद यदि अनपढ़ होते तो क्या व्यापार कर सकते थे ? नहीं ...मुहम्मद पहले अनपढ़ थे, लेकिन बाद में उनकी पत्नी और साले ने उनको पढ़ना लिखना सीखा दिया था … सबूत मरते समय मुहम्मद का कोई वसीयत ना बनाने पर कलम और कागज का ना मिलना ...और कुछ लोगो का उनपर वसीयत ना बनाने पर रोष करना …

मुहम्मद को उनकी पत्नी ने सारे धार्मिक पुस्तकों जैसे रामायण , गीता , महाभारत , वेद, बाईबल, और यहूदी धार्मिक पुस्तकों को पढ़ कर सुनाया था और पढ़ना लिखना सीखा दिया था , आप किसी को लिखना पढ़ना सीखा सकते हो लेकिन बुद्धि का क्या ?…जो आज तक उसके मानने बालो की बुद्धि पर निर्भर करता है ...जो कुरान और हदीश में मुहम्मद ने लिखा या उनके कहानुसार लिखा गया बाद में , लेकिन किसी को कितना ही कुछ भी सुना दो लेकिन व्यक्ति की सोच को कौन बदल सकता है, कुरान में वेदों , रामायण, पुराणों का ज्ञान मिलेगा लेकिन उसका अर्थ गलत मिलेगा ……

• अल्लाह कौन था ?
मोहम्मद का जन्म हुआ Qurayshi जनजाति में, उसे देवी को समर्पित किया गया था. इसलिए जब मुहम्मद के अन्दर सनातन धर्म से अलग धर्म बनाने का विचार आया तो उसने अपनी इष्ट देवी के नाम पर ही धर्म बनाने का फैसला किया, वह अल्लाह (पार्वती देवी) को निर्गुण मानता था और उसने प्रतिक चिन्ह के लिए ७८६ (जिससे अंको में ओ३म बनता है) अपनाया …मुहम्मद ने भारतीय देवी- देवताओं के नाम अपने धर्म से हटाने के लिए उन्हें इस्लाम के नबी और पैगम्बर बोलना शुरु कर दिया और सनातन धर्म से उल्टा काम करना शुरू कर दिया … जैसे काबा के ७ चक्कर उलटे काटना आदि.... जिससे उनको कोई परेशानी हुई उसको उसने समाप्त कर दिया …

• दिन की जगह रात में पूजा .?..
क्योंकि तंत्रशास्त्र में भगवान शिव और शक्ति की रात्रि पूजा का विधान है और सनातन धर्म का नाम इस्लाम रख दिया कुछ समय बाद जब बहुत कुछ उसके हाथो में आ गया ….

• कलमा में क्या है ?
ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मद उर-रसूलुल्लाह इस कलमे का अर्थ मुहम्मद ने बताया है की ईश्वर एक है और मुहम्मद उसके पैगम्बर है … अब जबकि सब जानते है की इला और इल एक थे , जिनकी पूजा होती थी और अल्लाह (पार्वती शक्ति ) थी ..और मुहम्मद शक्ति मत को मानने और फैलाने वाले ,

2. इस्लाम के आदम और ईव कौन कौन थे ?
इस कथा के अनुसार राजा इल ही आदम था और वो ही ईव … क्युकि आदम से ही ईव पैदा हुयी ऐसा इस्लाम और ईसाई मत है …और बाद में आदम और ईव (राजा इल ) को अपना देश छोडना देना ..इस मत को सिद्ध करता है

3. इस्लाम में हरा रंग क्यों ? चाँद और तारा क्यों ?
इस्लाम में अपने पूर्वजो को पूजता है ये जग जाहिर है … हिन्दुओ में सब जानते है की नव ग्रह में बुध एक ग्रह है और बो स्याम वर्ण और हरा रंग पहनते है ज्ञान के देवता कहलाते है .. लकिन उनके जन्म पर कुछ अजीब किस्सा है जिससे कुछ मुस्लिम हिन्दू धर्म को बदनाम करते है जबकि ये इसके ही पूर्वजो की कहानी है … चंदमा के द्वारा देवताओ के गुरु ब्रस्पति की पत्नी तारा के संयोग से उत्पन्न हुए थे जिसके कारण आज भी मुसलमान चाँद तारा को देख कर अपना रोजा खोते है और ईद मानते है ...

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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