सोमवार, 30 मई 2016

आज के अलबरुनी ?

अलबरुनी अर्थात गणित , विज्ञान , ज्योतिष , अरबी , फारसी ....संस्कृत का ज्ञाता , इतिहास के पन्नों में दर्ज महान विद्वान ...सायद कम ही लोगों को ज्ञात होगा कि अलबरूनी इस्लामिक आक्रांता मोहम्मद गजनवी के दरबार में प्रमुख ज्योतिष और सलाहकार की भूमिका में नियुक्त था | मोहम्मद गजनवी को सोमनाथ का मंदिर लूटने की सलाह अलबरूनी ने ही दी थी | कारण था , अपार धन का लालच और उनका विश्वास कि मंदिर विध्वंस के पश्चात भारत में सनातन धर्म मर जायेगा और अरब साम्राज्यवादी पंथ इस्लाम की जड़ें हमेशा के लिए पुख्ता हो जाएँगी | गजनवी के लिए यह काम अत्यंत कठिन था क्योंकि सोमनाथ कोई सीमावर्ती इलाके में नहीं सुदूर गुजरात में था .... , तो इस काम के लिए अलबरूनी को भारत भेजा गया | यहाँ रहकर उसने संस्कृत का ज्ञान अर्जित किया , अपने तमाम शिष्य भी बनाये जिसमे पंजाब नरेश जयपाल प्रमुख थे , कारण था उनको संतान प्राप्ति के लिए अलबरूनी ने कोई ख़ास जड़ी – बूटी दी थी | अलबरूनी पूरे दो सालों तक अन्य तमाम लोगों को छोटे- छोटे कार्यो से उपकृत करता रहा , सोमनाथ के मंदिर प्रवंधन के सारे राज अर्थात उनके बीच के मन- मुटाव अच्छे से समझ लिए | मंदिर के आस – पास अपने चहेतों का जाल बुन दिया | इस प्रकार गजनवी के प्रमुख ज्योतिष सलाहकार ने उपयुक्त माहौल बनाकर , उचित समय पर सन्देश भेज दिया | गजनवी को सिंध और पंजाब ने सीधा रास्ता दिया ...यानी कोई प्रतिकार नहीं ; कारण था दोनों अलबरूनी के एहसानों तले दबे थे ....फिर उसने सीधा मार्ग ना चुनकर रेगिस्तानी मार्ग चुना ताकी बिना किसी युद्ध के रास्ता अबाध्य रहे | इस प्रकार गजनवी आसानी से बिना किसी बड़े नुकसान के सोमनाथ पहुँच गया ...आगे जो हुवा वह सर्वबिदित है | सोमनाथ तोडा गया , वहां की अकूत सम्पदा गजनी लूट ले गया , भेड़ों – बकरीयों की तरह तमाम हिन्दुओं को गुलाम बना लिया और भारतीय औरतें दो – दो दीनारों में गजनी के बाजारों में बिकती रहीं ...| उसका सपना सच हो गया जो लोग अरबों तथा तुर्की लुटेरों से अपनी औरतों और बेटियों की सुरक्षा न कर सके...? वो आज हमारे देश में अल्पसंख्यक मुसलमान बन गए..!! आज वो मुसलमान बनकर अपने ही हिन्दू पूर्वजों को आँखें दिखा रहे हैं....!!
तो मित्रों ..ये जो विद्वान दार्शनिक टाइप मुसलमान शायर , फिल्ममेकर , अभिनेता , बुद्धिजीवी .....कहानीकार ; हमारे आप के बीच दिखते हैं ना ....वो कोई कलंदर – फकीर नहीं हैं......बल्कि आज के अलबरूनी हैं ...ये सब किसी ना किसी तरह से अलबरूनी की भूमिका अदा कर रहे हैं ... कोई लव – जिहाद का माहौल तैयार करवा रहा है तो कोई इस्लाम को शान्ति का मजहब बताता फिरता है तो कोई सांस्कृतिक अधपतन को गंगा – जमुनी तहजीब बताता फिरता है | अब फैंसला हमारे – आप के हांथों में है कि हम इनके जाल में फंसकर , मीठी – मीठी बातें सुनकर , इनकी दोस्ती के झांसे में आकर सोमनाथ जैसे या उससे भी बड़े बिध्वंश करवायेंगे या अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखेंगे ......

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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