"कांग्रेस एक सम्प्रदाय है। इस सम्प्रदाय के गुरू, पीर, मुर्शीद, पैग़म्बर महात्मा गाँधी हैं और उन पर सम्प्रदाय के लोगों की अगाध श्रद्धा है। यह कांग्रेसी सम्प्रदाय हिन्दू-विरोधी और मुस्लिम-परस्त है।"
"मैं समझता था कि मैं कांग्रेस में सम्मिलित होकर देश तथा जाति की सेवा कर रहा हूँ। मेरा यह भ्रम भी दूर हुआ है और मुझको ऐसा प्रतीत होने लगा है कि मैं देश का गला काटने वाली छुरी की पैनी धार बना हुआ था।"
"मैं अपने किये पर पश्चाताप कर रहा हूँ और अपने भावी जीवन के मार्ग को स्पष्ट देखने लगा हूँ। यह मार्ग गाँधीवाद से विपरीत दिशा की ओर जाता है।"
महान साहित्यकार उपन्यासकार श्री गुरूदत्त द्वारा बँटवारे की पृष्ठभूमि पर लिखित उपन्यास "विश्वासघात" के अन्तिम परिच्छेद में नायक के बोल हैं ये। राजनैतिक पृष्ठभूमि पर लिखे इस उपन्यास से यह स्पष्टत: पता लगता है कांग्रेस अपने जन्म काल से ही राष्ट्र विरोधी और मुस्लिम परस्त रही है।
-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्
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