बड़ा याराना था, कश्मीर में रहने वाले हिन्दू और मुसलमानों के बीच.... ईद-दिपावली साथ मनाया करते थे.... एक-दूसरे के घर खूब खाया-पिया करते थे, विवाह-निकाह में आना जाना भी होता था, रोज़ दुआ-सलाम राम राम हुआ करती थी... बच्चे साथ में ही कश्मीरी "विलो" से बने बल्लों से क्रिकेट खेला करते थे.....
सचमुच....हिन्दुओं को बड़ा गर्व था अपने कश्मीरी मुस्लिम दोस्तों पर....
देखने में तो माहोल एकदम शांत और खुशनुमा दिखता था था.... लेकिन मज्जिद और मदरसों में मुसलमानों को कुछ और ही सिखाया जा रहा था.... आसमानी किताब कुरान के हवाले से एक ही बात सिखाई और पढाई जा रही थी कि जो अल्लाह को नहीं मानता और मुस्लिम नहीं है, उसे "जीने" का भी कोई अधिकार नहीं है... वह काफिर है, ...और काफ़िरो को ख़त्म करना, अल्लाह का हुकुम है...इसी हुकुम को पूरा करने के लिए अल्लाह के बन्दे मुसलमानों को सभी हिन्दुओ के खिलाफ जेहाद छेड़ देनी चहिये.... उन्हें ख़त्म कर देना चाहिए और उनका इस पवित्र कश्मीर से नामो-निशान मिटा देना चाहिए....
और फिर वो दिन आ ही गया, जब शांत दिखता कश्मीर मस्जिदों के लाउडस्पीकर्स से आती ज़हरीली और जानलेवा तकरीरों से गूँज उठा..... मस्जिद के हर लाउडस्पीकर से एक ही आवाज आती थी.....हिन्दुओं कश्मीर छोड़कर चले जाओ, नहीं तो ख़त्म कर दीजिये जाओगे...... कोई अपने घर को ऐसे कैसे छोड़ देता? और फिर हिन्दुओ को अपने पडोसी मुसलमानों की दोस्ती पर बड़ा नाज़ भी तो था! भला उनके अपने पडोसी असलम, शाहिद, अनवर, महमूद, सुलतान उन्हें क्यूँ मारेंगे? सब भले मानुष है....हमें यहाँ कोई क्यूँ मारेगा?.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ.....जान से प्यारे मुसलमान दोस्तों के सामने ही हिन्दुओ का सामूहिक नरसंहार कर दिया गया, और कोई भी मुसलमान किसी भी हिन्दू को बचाने नहीं आया....हिन्दू औरतो और लड़कियों के स्तन तलवारों से काट दिए गए, उनके साथ सामूहिक बलात्कार किये गए, लेकिन किसी भी मुसलमान को उनकी चीखें नहीं सुनाई दीं....छोटे-छोटे बच्चों तक को जालिमो ने नहीं बख्शा, उन्हें भी गोलिओं से भून दिया गया.....ना तो कोई पुलिस बचाने आयीं, और ना ही कोई पडोसी मुसलमान... हैवानियत का नंगा नाच कश्मीर में हुआ और कोई भी मदद को आगे नहीं आया....
जो कश्मीरी हिन्दू किस्मत से बच गए, वो सब आज दिल्ली इत्यादि शहरो में बेहद गरीबी में जी रहें है....उनके घर, मकानों पर मुसलमानों ने कब्ज़ा कर लिया है....बेशकीमती "सेब" के बागों पर भी अब मुसलमान काबिज़ हो गए है....कश्मीर घाटी को हिन्दू-विहीन कर दिया है....
अब अल्लाह के बन्दों के निशाने पर पश्चिम बंगाल, अासाम, केरल और अन्य कुछ राज्य है.....आपका राज्य, शहर और मोहल्ला बेशक इस समय शांत दिख रहा हो, और आपका मुस्लिम दोस्त बड़े ही अदब से आपके मिलता हो, लेकिन वह दिन दूर नहीं नहीं है जब आपके मोहल्ले में भी वही मुस्लिम दोस्त जिहाद छेड़ देंगे और आपको को कश्मीरी मुसलमानों की तरह गोलियों से भून देंगे....इस्लामिक अल तकिया उन्हें यही सिखाता है...
मुसलमानों की नज़रो में हर हिन्दू काफ़िर है, चाहे वह हिन्दू कहीं भी रहता हो, उसकी कोई भी जाति हो, ....उसे मारना ही उनका धर्म है, अल्लाह का फरमान है......इसलिए सतर्क हो जाओ.....जाति के नाम पर आपस में लड़ना छोड़ दो....एक दुसरे की मदद करो....और अल्लाह के बन्दों के किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार रहो.....
जो धर्मनिरपेक्ष नेता वोट लालसा में आतंकवादी शक्तियों का साथ दे रहे है, उन्हें बेनकाब करके नष्ट कर दो ।
सचमुच....हिन्दुओं को बड़ा गर्व था अपने कश्मीरी मुस्लिम दोस्तों पर....
देखने में तो माहोल एकदम शांत और खुशनुमा दिखता था था.... लेकिन मज्जिद और मदरसों में मुसलमानों को कुछ और ही सिखाया जा रहा था.... आसमानी किताब कुरान के हवाले से एक ही बात सिखाई और पढाई जा रही थी कि जो अल्लाह को नहीं मानता और मुस्लिम नहीं है, उसे "जीने" का भी कोई अधिकार नहीं है... वह काफिर है, ...और काफ़िरो को ख़त्म करना, अल्लाह का हुकुम है...इसी हुकुम को पूरा करने के लिए अल्लाह के बन्दे मुसलमानों को सभी हिन्दुओ के खिलाफ जेहाद छेड़ देनी चहिये.... उन्हें ख़त्म कर देना चाहिए और उनका इस पवित्र कश्मीर से नामो-निशान मिटा देना चाहिए....
और फिर वो दिन आ ही गया, जब शांत दिखता कश्मीर मस्जिदों के लाउडस्पीकर्स से आती ज़हरीली और जानलेवा तकरीरों से गूँज उठा..... मस्जिद के हर लाउडस्पीकर से एक ही आवाज आती थी.....हिन्दुओं कश्मीर छोड़कर चले जाओ, नहीं तो ख़त्म कर दीजिये जाओगे...... कोई अपने घर को ऐसे कैसे छोड़ देता? और फिर हिन्दुओ को अपने पडोसी मुसलमानों की दोस्ती पर बड़ा नाज़ भी तो था! भला उनके अपने पडोसी असलम, शाहिद, अनवर, महमूद, सुलतान उन्हें क्यूँ मारेंगे? सब भले मानुष है....हमें यहाँ कोई क्यूँ मारेगा?.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ.....जान से प्यारे मुसलमान दोस्तों के सामने ही हिन्दुओ का सामूहिक नरसंहार कर दिया गया, और कोई भी मुसलमान किसी भी हिन्दू को बचाने नहीं आया....हिन्दू औरतो और लड़कियों के स्तन तलवारों से काट दिए गए, उनके साथ सामूहिक बलात्कार किये गए, लेकिन किसी भी मुसलमान को उनकी चीखें नहीं सुनाई दीं....छोटे-छोटे बच्चों तक को जालिमो ने नहीं बख्शा, उन्हें भी गोलिओं से भून दिया गया.....ना तो कोई पुलिस बचाने आयीं, और ना ही कोई पडोसी मुसलमान... हैवानियत का नंगा नाच कश्मीर में हुआ और कोई भी मदद को आगे नहीं आया....
जो कश्मीरी हिन्दू किस्मत से बच गए, वो सब आज दिल्ली इत्यादि शहरो में बेहद गरीबी में जी रहें है....उनके घर, मकानों पर मुसलमानों ने कब्ज़ा कर लिया है....बेशकीमती "सेब" के बागों पर भी अब मुसलमान काबिज़ हो गए है....कश्मीर घाटी को हिन्दू-विहीन कर दिया है....
अब अल्लाह के बन्दों के निशाने पर पश्चिम बंगाल, अासाम, केरल और अन्य कुछ राज्य है.....आपका राज्य, शहर और मोहल्ला बेशक इस समय शांत दिख रहा हो, और आपका मुस्लिम दोस्त बड़े ही अदब से आपके मिलता हो, लेकिन वह दिन दूर नहीं नहीं है जब आपके मोहल्ले में भी वही मुस्लिम दोस्त जिहाद छेड़ देंगे और आपको को कश्मीरी मुसलमानों की तरह गोलियों से भून देंगे....इस्लामिक अल तकिया उन्हें यही सिखाता है...
मुसलमानों की नज़रो में हर हिन्दू काफ़िर है, चाहे वह हिन्दू कहीं भी रहता हो, उसकी कोई भी जाति हो, ....उसे मारना ही उनका धर्म है, अल्लाह का फरमान है......इसलिए सतर्क हो जाओ.....जाति के नाम पर आपस में लड़ना छोड़ दो....एक दुसरे की मदद करो....और अल्लाह के बन्दों के किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार रहो.....
जो धर्मनिरपेक्ष नेता वोट लालसा में आतंकवादी शक्तियों का साथ दे रहे है, उन्हें बेनकाब करके नष्ट कर दो ।
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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वन्दे मातरम्
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