मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

शरीयत अनुसार देवर के साथ सुहागरात के बाद मिलेगा पति !

गाज़ियाबाद: शौहर ने फोन पर बीवी को तलाक दे दिया , लेकिन अब उसे अपनी गलती पर पछतावा है । वह बीवी को दोबारा से साथ रखना चाहता है , लेकिन पंथनिरपेक्ष देश भारत में लागू मुस्लिम साम्प्रदायिक कानून शरीयत के अनुसार वह ऐसा तभी कर सकता है ,जब उसकी बीवी दूसरे मर्द से शादी करे , और सुहागरात मनाये । इसके बाद फिर दूसरा शौहर उसे तलाक दे । इसे हलाला कहते है ।
अब दोनों को दोबारा साथ रहने के लिए हलाला प्रक्रिया से गुजरना होगा। काफ़ी जद्दोजहद के बाद सोमवार को दोनों ऐसा करने के लिए राज़ी हो गए । अब महिला एक रात के लिए अपने देवर से शादी करके शारीरिक सम्बन्ध बनायेगी । अगले दिन वह उसे तलाक देगा । इसके बाद पहले वाले शौहर से उसका फिर से निकाह हो जायेगा ।
यह मामला महिला थाने में आया हुआ था । महिला खोड़ा कालोनी की रहने वाली है ,उसकी शादी धौलाना में अगस्त 2013 में हुई थी । पाँच माह पहले अनबन होने पर महिला मायके चली गयी । शौहर ने उसे तीन बार तलाक तलाक तलाक कह कर निकाह ख़त्म कर दिया ।
पिछले महीने महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की । महिला थाने में दोनों परिवारो की काउंसलिंग हुई तो तलाक की बात सामने आई । सोमवार को दोनों पक्ष एक बार फिर साथ रहने को तैयार हो गए । लेकिन इस्लामिक कट्टपंथियों ने इस्लामिक कानून शरीयत का अमानवीय पेंच हलाला बीच में डाल दिया । महिला इसके लिए राजी नहीं थी लेकिन अपनी शादी बचाने के लिए उसे विवशतावश ऐसा करना पड़ेगा । दूसरी तरफ शौहर का कहना है कि वह शर्मिंदा है उसे तलाक नहीं देना चाहिए था । हलाला उसके लिए भी किसी सजा से कम नही ।
वहीँ इस्लामिक कट्टरपंथी मौलाना चौदहवीं सदीं के कबिलाई इस्लामिक कानून शरीयत का हवाला देकर उस दंपत्ति को हलाला करने के लिए विवश कर रहे है, हलाला में महिला को दूसरे पुरूष के साथ एक रात का शारीरिक सम्बन्ध बनाना होता है ।
महिला थाना इंचार्ज अंजू तेवतिया ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्ष शरीयत तरीके से हलाला करके फिर से निकाह को राजी हो गए है ।
लेकिन सवाल उठता है कि भारत जैसे पंथनिर्पेक्ष देश में दो कानून क्यों ? आज के इस आधुनिक युग में हलाला जैसा कबीलाई रिवाज़ क्यों ? महिला की क्या गलती जो उस पर इस तरह का बेहूदा और शर्मनाक रिवाज़ थोपा जाये ?
मुसलमानो इंसानियत की बात करते हो तो ये इंसानियत करो
*मुसलमानो एक इंसानियत करो बुरखाप्रथा हटाओ
*औरतो को भी तलाक देने की स्वतंत्रता दो
*खुद की औरतो को मस्जिदों अादि सभी जगह समान अधिकार दो
*मुसलमानो में लड़कियो के शादी की उम्र 15 के बजाय उम्र 18 करो लड़को को उम्र 21 वर्ष हो।
*एक शादी का कानून बनाकर औरत को समान अधिकार दो |
*देश की सभी समस्याओ की जड़ बढ़ती हुई जनसंख्या है जिसे रोकने के लिए स्वयं पर एक कानून बनवाओ
इसके बाद सदभाव व इंसानियत की बात करों
मित्रो ! क्यों सही कहा ? आपकी क्या राय है ?

-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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वन्दे मातरम्

2 टिप्‍पणियां:

  1. इन राक्षसो की अजीब परम्परा है जब इनकी औरत ही सब मानती है तो कोई क्या करेगा जो स्वयं का भला नही सोचता भगवान भी उष्का कुछ नहीं कर सकता है हिंदुस्तान में तो फिर भी इनकी औरतों की इज्जत है अरब और मुश्लिम देशों में तो इनकी बहुत दुर्गति है यही लोग प्रयास करें तो हिंदुस्तान में कोई सुधार संभव है

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