सोमवार, 11 अप्रैल 2016

चीनी की जगह रसायन मुक्त गुड़ अपनाने के लाभ

चीनी की जगह रसायन मुक्त गुड़ अपनाने के लाभ
चीनी का सामान्य अर्थ शुगर है और इसका रासायनिक नाम सुक्रोज है। चीनी का उत्पादन सबसे पहले लगभग 500 ई.पू. में भारत में ही होने का प्रमाण मिलता है। शुगर शब्द संस्कृत के शर्करा शब्द से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ बजरीदार होता है। प्राचीन पश्चिमी दुनिया एक स्तर तक गन्‍ने से अनभिज्ञ थी। सिकंदर की सेना का एक कमांडर नाचोस गन्ने के बारे में सबसे पहले जानने वाले यूनानियों में था। उसने सिंधु नदी के आस-पास अपनी यात्राओं के दौरान ऐसा सरकंडा मिलने का जिक्र किया है, जिसमें मधुमक्खियों के बगैर मधु का उत्पादन होता था!
आज बाजार में उपलब्ध अधिकतर चीनी अपने कच्चे प्रकार का रासायनिक तरीके से संशोधित रूप है। संयुक्त राज्‍य राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, ऐसी परिशोधित चीनी से केवल कैलोरिज मिलती हैं क्योंकि परिष्करण की विधि से उसके लगभग सारे विटामिन और खनिज नष्‍ट हो जाते हैं, जिससे चीनी की पौष्टिकता जबर्दस्त रूप से कम हो जाती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन प्राकृतिक या प्राकृतिक रूप से उत्पन्न चीनी और बाहरी या कृत्रिम चीनी के बीच का अंतर बताता है। प्राकृतिक चीनी फलों, सब्जियों और दुग्ध उत्पादों के एक अभिन्‍न घटक के रूप में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली चीनी है जबकि सुक्रोज या शीतल पेयों, भोजन और फलों के रसों में ऊपर से मिलाई जाने वाली चीनी कृत्रिम चीनी होती है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह बात साबित हो सकती है कि अधिक मात्रा में चीनी लेना आर्टीरीओस्क्लरोसिस (धमनियों की एक बीमारी) को बढ़ा सकता है और मधुमेह तथा पोषण से जुड़ी कमियों को उत्पन्‍न कर सकता है।
शोध से पता चला है कि अधिक मात्रा में चीनी लेने से हानिकारक भोजन-संबंधी आदतें हो सकती हैं। चीनी खाने से बहुत से लोगों में और चीनी खाने की इच्छा होने लगती है जिससे बिंज ईटिंग (बीच-बीच में छुटपुट खाना) की आदत हो सकती है।
चीनी एक जहर है जो अनेक रोगों का कारण है, जानिये कैसे...
(1)-- चीनी बनाने की प्रक्रिया में गंधक का सबसे अधिक प्रयोग होता है । गंधक माने पटाखों का मसाला ।
(2)-- गंधक अत्यंत कठोर धातु है जो शरीर में चला तो जाता है परंतु बाहर नहीँ निकलता ।
(3)-- चीनी कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाती है जिसके कारण हृदयघात या हार्ट अटैक आता है ।
(4)-- चीनी शरीर के वजन को अनियन्त्रित कर देती है जिसके कारण मोटापा होता है ।
(5)-- चीनी रक्तचाप या ब्लड प्रैशर को बढ़ाती है ।
(6)-- चीनी ब्रेन अटैक का एक प्रमुख कारण है ।
(7)-- चीनी की मिठास को आधुनिक चिकित्सा में सूक्रोज़ कहते हैँ जो मनुष्य और पशु दोनो पचा नहीं पाते ।
(8)-- चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ तेइस हानिकारक रसायनों का प्रयोग किया जाता है ।
(9)-- चीनी डाइबिटीज़ का एक प्रमुख कारण है ।
(10)-- चीनी पेट की जलन का एक प्रमुख कारण है ।
(11)-- चीनी शरीर में ट्राइ ग्लिसराइड को बढ़ाती है ।
(12)-- चीनी पेरेलिसिस अटैक या लकवा होने का एक प्रमुख कारण है।
पहले भारतवासी शुद्ध देशी गुड़ खाते थे और कभी बीमार नहीँ पड़ते थे । कृपया जितना हो सके, चीनी से गुड़ पे आएँ |आज भी भारत और दक्षिण एशिया में बड़े पैमाने पर भोजन में मिठास लाने के लिए गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें गन्‍ने के रस में मौजूद खनिज, पोषक तत्व और विटामिन बरकरार रहते हैं और प्राचीन भारत की चिकित्सा व्यवस्था – आयुर्वेद में सूखी खांसी का उपचार, पाचन बेहतर करने और बहुत सी अन्य बीमारियों के चिकित्सा में उसका प्रयोग किया जाता है।
सावधानी-
गुड़ कह कर बेचे जाने वाले कुछ उत्पादों में सुपर-फॉस्फेट नामक एक रसायन होता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होता है। सफेद, साफ-सुथरा दिखने वाला गुड़ सुपर-फॉस्फेट वाला गुड़ होता है, जिससे बचना चाहिए। रसायन मुक्त, जैविक कृषि से उत्पन्न गहरे रंग का गुड़ आम तौर पर असली गुड़ होता है, वही खाना चाहिये ।
-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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