गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

सांप को मारिए वर्ना वो आपको मार डालेगा

एक मोहल्ले में एक सांप था , ज़मीन से पांच फुट नीचे रहता , नालियों में सैर करता , गटर के रास्ते आगे बढ़ता , एक दिन सांप ने adventure करने की ठानी , सांप ने सोचा कब तक वह ऐसी हिकारत की ज़िंदगी जियेगा , कब बाकी मोहल्ले वालों की तरह इज्जत से जियेगा , उसने तय किया की एक बार वह नालियों की बजाये बीच सड़क से दिन के उजाले में निकलेगा चाहे फिर मौत को ही गले क्यों ना लगाना पड़े , उसे अंजाम का अंदाज़ा था , उसे ये भी पता था की सड़क के उस पार उसकी लाश ही पहुंचेगी , फिर भी सांप ने अपनी "विचारधारा" की खातिर risk ली , सांप बीच सड़क से सैकड़ों लोगों के सामने दिन के उजाले में निकला , फुफकारता , काटता निकला , मोहल्ले के कुछ लोग उसे मारने दौड़े , पर सभ्य शालीन लोगों के बहुमत ने उन्हें दुत्कारते हुए रोक दिया , सभी सभ्य समाज के सम्मानित नागरिकों ने सांप के इस दुस्साहस की घोर भर्त्सना की , कड़े शब्दों में निंदा की और मानकर की उनकी इस भर्त्सना से सांप डर गया होगा , as usual सब अपने अपने कामों में लग गए !! पर किसी ने सांप के नज़रिए से सोचने की कोशिश नहीं की, सांप के लिए तो ये adventure "grand success" सिद्द हो हुआ था , सांप बहरा होता है , उसे भर्त्सना ना सुनाई देती है ना ही उसे उससे कोई फर्क पड़ता है , सांप के लिए अब अगला पड़ाव इस adventure को routine बनाने का है !!
मेरे एक दोस्त ने जो ना लिबरल सेक्युलर है ना हम जैसा राष्ट्रवादी , मुझे हाल ही में ये कहकर चुप करने की कोशिश की कि " ये जेएनयू , ये देओबन्द के भारत माता की जय के खिलाफ फतवों को ज्यादा उछाल कर नफरत मत घोलो , इन घटनाओं की हम सबने खूब भर्त्सना की है , इससे ज्यादा और क्या चाहिए तुम्हे ? " ....हाँ दोस्त .... मुझे कुछ नहीं चाहिए .....बस ये याद रखना की सांप को अपने इस adventure में grand success मिली है .... !! भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे और भारत माता की जय के खिलाफ फतवे की दो चार साल पहले तक किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी और आज ये बातें कैसी सामान्य सी हो गयी हैं ? क्या डर नहीं लगता तुम्हे ? ? सांप डरा नहीं embolden हुआ है दोस्त !!
पहले राष्ट्रगीत , फिर राष्ट्रगान , अब भारत माता की जय और सुप्रीम कोर्ट में ये कहना की उनका पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर है , सांप अपने एडवेंचर को रूटीन में बदल चुका है और हम या तो नित नए भर्त्सना के तरीकों में उलझे हैं या उनकी इस हिमाकत को मन के किसी कोने में स्वीकार कर चुके हैं !! ये "स्वीकार्य" ही हमारे धिम्मी बनने की प्रक्रिया का पहला हिस्सा है , धीरे धीरे हम जैसे लाखों फिर करोड़ों इस गिरफ्त में आएंगे , फिर सब "सामान्य" हो जायेगा , देश मर चुका होगा , और वो क्रूर सभ्यता हमारे बीच "शासक" के रूप में बस चुकी होगी !! हो सकता है लाल किले पर तिरंगा ही रहे , पर नियम कानून उनके होंगे , exception हम मांगेंगे , की हमें पूजा पाठ करने की छूट दी जाए , की हमें महाआरती , भंडारा , सुन्दर काण्ड करने का मौका मिले , की हम मंदिर बना सकें , हमारे बच्चे स्कूलों में तिलक लगा सकें , जनेऊ पहन सकें !! और किसी मुगालते में मत रहिये , ये सब बहुत जल्दी होगा बिना किसी इस्लामिक सत्ता के दिल्ली में स्थापित हुए , बिना किसी जेहादी "तख्तापलट" के !!
इंसान और सांप एक मोहल्ले में बराबरी से नहीं रह सकते !! सांप को मारिए वर्ना वो आपको मार डालेगा , लोग इस सामान्य सी binary को क्यों नहीं समझ पाते ?

-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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वन्दे मातरम्

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