उपनाम अथवा जाति कब नाम के साथ लिखने लगे ?
क्या राम, भीष्म, अर्जुन, आदि के नाम के साथ सिंह - चौहान - राठौर आदि लगता था ? क्या परशुराम, वशिष्ठ, सुदामा, आदि अपने नाम के साथ शुक्ल, मिश्र, आदि लिखा करते थे ? क्या किसी भी प्राचीन व्यापारी के नाम के साथ गुप्ता, अग्रवाल, लिखा जाया करता था ? क्या उस समय तथाकथित छोटा काम करने वाले अपने नाम के साथ जाटव, रैगर, नागदेव, आदि लिखा करते थे ?
मुझे तो आज तक किसी पौराणिक कथा अथवा इतिहास की पुस्तक में यह देखने को नहीं मिला है. मुझे लगता है कि - विदेशी आक्रमणकारियों केे आने के बाद ही भारत में यह सब शुरू हुआ है. इस बिषय पर शोध किया जाये तो कुछ आश्चर्य जनक परिणाम अवश्य निकलेंगे.
वैसे यदि देखा जाय तो मनुष्यों की वृत्ति को समझने के लिए उनका कार्य के अनुसार वर्गीकरण अवश्य किया गया था लेकिन कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र से हटकर कार्य करेगा ऐसा कोई नियम नहीं था. ब्राह्मण माता पिता के घर जन्मे परशुराम क्षत्रीय वाले काम करते थे और क्षत्रिय राजवंश में जन्म लेने वाले विश्वमित्र ब्रह्मऋषि बने थे |
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वन्दे मातरम्
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