भाईयों और बहनो आज मैं भारत स्वाभिमान दल के मंच से आपके एक गम्भीर विषय पर बात करने जा रहा हूँ, वह विषय है भारतीय वर्ण व्यवस्था में शूद्रों का स्थान ! जो लोग आज शुद्रो के 'महान इतिहास' को पिछड़ा, दलित और पीड़ित बताकर पेश कर रहे हैं वो न सिर्फ महामूर्ख बल्कि अज्ञानी और महापापी लोग हैं जिन्हें कठोर दण्ड देने की जरूरत है
.
भाईयों और बहनों वैदिक काल के शूद्र आज के आज कल के तथाकथित शुद्रों की तरह, दलितों की तरह मानसिक रूप से गुलाम न थे, वे रोते-धोते, हर जगह माथा टेकते नहीं घुमते थे
.
बल्कि वो आत्मनिर्भर और औद्योगिक दक्षता से परिपूर्ण व्यक्ति थे
.
जिनके अंदर हर प्रकार का गुण हुआ करता था, वो आरक्षण की भीख नहीं मांगते थे बल्कि स्वाभिमानी जीवन जीते थे
.
कोई कपड़ा बनाता तो कोई जूता बनाता था,
.
कोई हथियार बनाता तो कोई बर्तन बनाता था
.
कोई बड़ी बड़ी बिल्डिंगे बनाता तो कोई उसे सजाने के लिए फूल मालाएं बनाता
.
कोई बड़ी बड़ी नहरें खोदता था तो कोई बड़ी बड़ी जुगाड़ भिड़ाकर उसमें पानी लाने का प्रयास करता था
.
सब खुद में इंजीनियर और व्यापारी थे
.
वो आज की तरह रोने धोने वाले लोग नहीं बल्कि 'हमें शूद्र होने पर गर्व है' ऐसा मानने वाले लोग थे
.
भाईयो और बहनों, प्राचीन आर्यो की वर्ण व्यवस्था में जैसे ब्राहमण होना गर्व की बात थी वैसे ही शुद्र होना भी उतने ही गर्व की बात थी | भारत सोने की चिड़िया कहा गया क्योंकि यहाँ का शुद्र संपन्न था | पॉप, चार्वाक, बौद्ध, मुस्लिम व अंग्रेजों ने इस देश की अर्थ व्यवस्था को हमारे तपस्वी शुद्र उद्योगपतियों की अपनी कुव्यवस्था, शास्त्रों को विकृत कर तथा अपने कानूनों से कमर तोड़ दी और आज हम वेदों से दूर जाती व्यवस्था के जाल में फस गए हैं |
भाईयों और बहनों, यजुर्वेद कहता है
तपसे शुद्रम
अर्थात- बहुत परिश्रमी ,कठिन कार्य करने वाला ,साहसी और परम उद्योगी आदि पुरुष का नाम शुद्र हैं।
यजुर्वेद आगे फिर कहता है
नमो निशादेभ्य
अर्थात- शिल्प-कारीगरी विद्या से युक्त जो परिश्रमी जन शुद्र निशाद हैं उनको नमस्कार अर्थात उनका सत्कार करे।
.
शुद्र किसी भी राज्य या राष्ट्र की आत्मा थे
.
बाद में पॉपों ने अपने स्वार्थ की पूर्ती हेतु अर्थ का अनर्थ कर दिया
.
भाईयों और बहनों वैदिक काल के शूद्र आज के आज कल के तथाकथित शुद्रों की तरह, दलितों की तरह मानसिक रूप से गुलाम न थे, वे रोते-धोते, हर जगह माथा टेकते नहीं घुमते थे
.
बल्कि वो आत्मनिर्भर और औद्योगिक दक्षता से परिपूर्ण व्यक्ति थे
.
जिनके अंदर हर प्रकार का गुण हुआ करता था, वो आरक्षण की भीख नहीं मांगते थे बल्कि स्वाभिमानी जीवन जीते थे
.
कोई कपड़ा बनाता तो कोई जूता बनाता था,
.
कोई हथियार बनाता तो कोई बर्तन बनाता था
.
कोई बड़ी बड़ी बिल्डिंगे बनाता तो कोई उसे सजाने के लिए फूल मालाएं बनाता
.
कोई बड़ी बड़ी नहरें खोदता था तो कोई बड़ी बड़ी जुगाड़ भिड़ाकर उसमें पानी लाने का प्रयास करता था
.
सब खुद में इंजीनियर और व्यापारी थे
.
वो आज की तरह रोने धोने वाले लोग नहीं बल्कि 'हमें शूद्र होने पर गर्व है' ऐसा मानने वाले लोग थे
.
भाईयो और बहनों, प्राचीन आर्यो की वर्ण व्यवस्था में जैसे ब्राहमण होना गर्व की बात थी वैसे ही शुद्र होना भी उतने ही गर्व की बात थी | भारत सोने की चिड़िया कहा गया क्योंकि यहाँ का शुद्र संपन्न था | पॉप, चार्वाक, बौद्ध, मुस्लिम व अंग्रेजों ने इस देश की अर्थ व्यवस्था को हमारे तपस्वी शुद्र उद्योगपतियों की अपनी कुव्यवस्था, शास्त्रों को विकृत कर तथा अपने कानूनों से कमर तोड़ दी और आज हम वेदों से दूर जाती व्यवस्था के जाल में फस गए हैं |
भाईयों और बहनों, यजुर्वेद कहता है
तपसे शुद्रम
अर्थात- बहुत परिश्रमी ,कठिन कार्य करने वाला ,साहसी और परम उद्योगी आदि पुरुष का नाम शुद्र हैं।
यजुर्वेद आगे फिर कहता है
नमो निशादेभ्य
अर्थात- शिल्प-कारीगरी विद्या से युक्त जो परिश्रमी जन शुद्र निशाद हैं उनको नमस्कार अर्थात उनका सत्कार करे।
.
शुद्र किसी भी राज्य या राष्ट्र की आत्मा थे
.
बाद में पॉपों ने अपने स्वार्थ की पूर्ती हेतु अर्थ का अनर्थ कर दिया
भाईयो और बहनो यहाँ पॉप का अर्थ ब्राह्मण न समझे, ब्राह्मण सदैव सम्मानीय था और सम्मानीय रहेगा क्योंकि वो ज्ञान विज्ञान का देने वाला है, ब्राह्मण सभी के साथ समानता का व्यवहार करने वाला होता है, वो किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता, इसीलिए अंगीरा, अग्नि, ऐतरीय, वाल्मिकी, व्यास, व रविदास आदि ब्राह्मण सदैव पूजनीय माने जाते रहे है, सनातन वैदिक परम्परा में कोई भी व्यक्ति चाहे वो किसी भी कुल वंश का हो अपने गुण कर्म स्वभाव के अनुसार कोई भी वर्ण अपना सकता था | पॉप वो होता है जो जन्म के आधार पर समाज को बाटने का पाप करता है |
भाईयों और बहनों, आज मैं आपसे कहना चाहूँगा कि जो हुआ सो हुआ, अब हमें केवल यही नारा देना है-
हिन्दू हिन्दु भाई भाई, बाकि कौम कहा से आई
साथ ही मैं भारतीय इतिहास को कलंकित करने वाले अधर्मियों से भी कहना चाहूँगा कि अधर्मियों होश में आओ ......
वरना इस महापाप का कठोर दण्ड तुम्हे भुगतना ही होगा..
-विश्वजीत सिंह अनन्तहिन्दू हिन्दु भाई भाई, बाकि कौम कहा से आई
साथ ही मैं भारतीय इतिहास को कलंकित करने वाले अधर्मियों से भी कहना चाहूँगा कि अधर्मियों होश में आओ ......
वरना इस महापाप का कठोर दण्ड तुम्हे भुगतना ही होगा..
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन
🚩सनातन संस्कृति संघ ट्रस्ट, सनातन धर्म- संस्कृति व स्वदेशी के प्रचार- प्रसार के लिए कार्यरत संगठन |
स्वदेशी स्वाभिमान, राष्ट्र- धर्म, संस्कृति की रक्षा व सम्वर्धन, गौ आधारित अर्थव्यवस्था एवं गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था की पुनर्स्थापना के लिए सनातन संस्कृति संघ के सदस्य बने |
🚩भारत स्वाभिमान दल, स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए तथा देश के अमर बलिदानियों के सपनों को पूरा करने के लिए भारत स्वाभिमान दल से जुड़े |
भारत स्वाभिमान दल के बारे में अधिक जानने के लिए तथा सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन, राजनैतिक शुचिता व राष्ट्र- धर्म रक्षा के आन्दोलन में तन मन धन से सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भारत स्वाभिमान दल की वेबसाइट पर जाये
http://www.bharatswabhimandal.org/member.php
आप संगठनो से जुड़ने हेतु हमसे 08126396457 पर वाट्सएप्प व हाईक द्वारा भी सम्पर्क कर सकते है |
वन्दे मातरम्
बहुत अच्छा ज्ञान दिया है भाइ आपने
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
मुग़ल काल, अंग्रेजों के 100 वर्षों के शाशन में इन्ही लोगों ने शुद्र बनाया और ब्राह्मणों को बदनाम किया ब्राह्मण तो कल भी ज्ञान देता था आज भी ज्ञान ही देता है और हमेशा ज्ञान ही देता रहेगा इन सेक्युलरों ने हिन्दुस्थान का व् ब्राह्मणों का नाम खराब किया है इश्क दण्ड इन्हें देर सवेर भुगतना ही पड़ेगा 🚩🚩🚩🚩
जवाब देंहटाएंमुग़ल काल, अंग्रेजों के 100 वर्षों के शाशन में इन्ही लोगों ने शुद्र बनाया और ब्राह्मणों को बदनाम किया ब्राह्मण तो कल भी ज्ञान देता था आज भी ज्ञान ही देता है और हमेशा ज्ञान ही देता रहेगा इन सेक्युलरों ने हिन्दुस्थान का व् ब्राह्मणों का नाम खराब किया है इश्क दण्ड इन्हें देर सवेर भुगतना ही पड़ेगा 🚩🚩🚩🚩
जवाब देंहटाएं