शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

कामुक वहशी दरिंदा था शाहजहाँ

शाहजहाँ कामुकता के लिए इतना कुख्यात था की कई इतिहासकारों ने उसे, उसकी अपनी अविवाहिता बेटी जहाँआरा के साथ स्वयं सम्भोग करने का दोषी कहा है-प्रख्यात राष्ट्रवादी इतिहासकार एवं शोधकर्ता पुरुषोत्तम नागेश ओक.
कहा जाता है की शाहजहाँ और मुमताज महल की बड़ी बेटी जहाँआरा बिल्कुल अपनी माँ की तरह लगती थी. इसीलिए १६३१ में १४ वें बच्चे को जन्म देते समय मुमताज की मृत्यु के बाद लम्पट शाहजहाँ ने अपनी ही बेटी जहाँआरा को फंसाकर भोगना शुरू कर दिया था. इतना ही नहीं जहाँआरा के किसी भी आशिक को वह उसके पास फटकने नहीं देता था. कहा जाता है की एकबार जहाँआरा जब अपने एक आशिक के साथ इश्क लड़ा रही थी तो शाहजहाँ आ गया जिससे डरकर वह हरम के तंदूर में छिप गया. शाहजहाँ ने तंदूर में आग लगवा दिया और उसे जिन्दा जला दिया. दरअसल अकबर ने यह नियम बना दिया था की मुगलिया खानदान की बेटियों की शादी नहीं होगी. इतिहासकार इसके लिए कई कारन बताते है. इसका परिणाम यह होता था की मुग़ल खानदान की लड़कियां अपने जिस्मानी भूख मिटाने के लिए अवैध तरीके से दरबारी, नौकर के साथ साथ रिश्तेदार यहाँ तक की सगे सम्बन्धियों का भी सहारा लेती थी. जहाँआरा जहाँ अपने ही बाप शाहजहाँ की रखैल थी तो दूसरी बेटी रोशनारा नरपिशाच औरंगजेब की रखैल थी. तीसरी बेटी मेहरुन्निसा शिवाजी के बेटे शम्भाजी के चक्कर में फंस गयी थी. इतना ही नहीं जहाँआरा अपने लम्पट बाप के लिए लड़कियां भी फंसाकर लाती थी. शाहजहाँ के राजज्योतिष की १३ वर्षीय ब्रह्मण लडकी को जहाँआरा अपने महल में बुलाकर धोके से नशा करा अपने लम्पट बाप के हवाले कर दिया था. सम्भोग की पीड़ा से जब उसकी आँखे खुल गयी तो वह पहचाने जाने के डर से भाग खड़ा हुआ परन्तु उस ब्राह्मण कुमारी ने उसे पहचानने की हिम्मत दिखाई और अंततः शाहजहाँ को ५८ वें वर्ष में उस १३ वर्ष की ब्राह्मण कन्या से निकाह करना पड़ा. उसके कुछ साल बाद ही वह बीमार पड़ा और औरंगजेब ने उसे उसकी रखैल जहाँआरा के साथ आगरा के किले में बंद कर दिया. दिल्ली आकर आपने बाप के हजारों रखैलों में से कुछ गिने चुने बीबियों/रखैलों को अपने हरम में डालकर बाकी को उसने किले से बाहर निकाल दिया जिसकी औलादें आज दिल्ली के रेड लाईट एरिया जीबी रोड की शोभा बढ़ाती है. उन्ही बीबियों में से एक खूबसूरत बीबी वही ब्राह्मण कन्या थी जिसे वह अपनी बेगम बनाने के लिए उतावला था परन्तु उस ब्राह्मण कन्या ने एक पतिव्रता हिंदू संस्कार का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया. बाद में औरंगजेब के लम्पटता से बचने के लिए उसने अपने ही हाथों अपने चेहरे पर तेजाब उड़ेल ली थी।
हमारे भारत की शैक्षणिक पाठ्य पुस्तकों में ऐसे नरपिशाचों को प्रेमी व महान बताकर पढ़ाया जा रहा हैं, सोचो इस देश का क्या होगा ?

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