बुधवार, 28 सितंबर 2016

कब तक अत्याचार सहता रहेगा हिन्दू समाज...?

1200 वर्षों से भारत भूमि विदेशी आक्रान्तों को झेलती आ रही है। पहले इस्लामिक आक्रमणकारी पिशाच आये फिर ईसाई आये।

कहने को 1947 में हमारा देश स्वतंत्र हुआ मगर तब तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, तिब्बत, बांग्लादेश, श्री लंका आदि भारत भूमि से अलग हो चुके थे।

यह जगप्रसिद्ध है कि इंडियन संविधान की दोहरी व्यवस्थाओं के चलते भारत में हिंदुओं की आज भी वैसी ही दुर्दशा है जैसी मुगलों और अंग्रेजों के राज में थी।

भारत में हिन्दुओं को आज भी समानता का अधिकार प्राप्त नहीं हैं। गैर हिन्दुओं को इंडियन संविधान में विशेषाधिकार दिये गये हैं।

सत्ता में कोई भी दल क्यों न हो।
हिन्दू हितों की अनदेखी सदा होती आयी है। आज भी गौ माता कसाई खानों में वैसी ही कटती है।

आज भी ईसाई मिशनरियाँ निर्धन हिंदुओं का खुलेआम धर्मान्तरण कर रही हैं। 

आज भी लव जिहाद के नाम पर हिन्दू लड़कियों को धर्मान्तरित किया जा रहा है।

आज भी सरकार करोड़ों रुपये हज सब्सिडी और हज टर्मिनल बनाने के लिए देती है जबकि हिन्दू तीर्थ यात्राओं पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है ।
और ये लेकर भी हिन्दू मंदिरों का एकत्रित दान सरकारी कोष में जाता है, जिससे मौलवियों को मासिक भत्ता मिलता है।

आज भी हिन्दू यात्राओं पर पत्थरबाजी होती है और हिन्दू मंदिरों के लाऊड स्पीकर उतरवा दिए जाते है।

आज भी हिंदुओं के महान चरित्र मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम जी को कोई मिथक बताते है तो योगिराज श्री कृष्ण जी को कोई चरित्रहीन बताते हैं ।

आज भी हिन्दू देवी-देवताओं की मजाक उड़ाई जाती है और उनके मंदिर तोड़े जाते है ।

आज भी षड्यंत्र तहत निर्दोष हिन्दू संत जेल में हैं और अधर्मी लोग बाहर हैं ।

आज भी वेदादि धर्मशास्त्रों और संस्कृत का उपहास उड़ाया जाता है और अंग्रेजी को वरीयता दी जाती है।

आज भी 1200 वर्षों से हो रहे हिंदुओं पर अत्याचारों को बीती चर्चा बताते हैं और गुजरात दंगों को प्रासंगिक बताते हैं ।

किसी ने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है ???
क्या इसका कारण जानना आवश्यक नहीं है ?

सबसे बड़ा कारण हिंदुओं का जातिवादी, भाग्यवादी और सत्ता का दलाल होना है।
इसका समाधान जातिवादी मानसिकता व सत्ता की दलाली को त्याग दें, भाग्य की अपेक्षा कर्म करने पर ध्यान दें। पार्टी के स्थान पर व्यक्ति को महत्व दें, जो व्यक्ति हिन्दू धर्म की रक्षा व सम्वर्धन का कार्य कर रहा हो, उसको वोट दें। पार्टीभक्त न बनकर राष्ट्रभक्त बने।

हिन्दू समाज ने कभी भी राजसत्ता पर बैठकर हिंदुत्व के लिए कार्य करने का नहीं सोचा । कारण हिंदुओं का पार्टी भक्त और उद्देश्य की कमी होना है।

राजनेता उसकी सुनता है जिसमें शक्ति होती है और संगठन होता है। जो अपना अधिकार छीनना जानते है। मुस्लिम समाज संगठित है। आक्रामक रहता है। इसलिए राजनेता उसके अनपढ़ मौलवियों के तलवे चाटते हैं ।

साम्प्रदायिक असमानता, तीन तलाक और बहुविवाह के मुद्दे पर सरकार चुप है। गौरक्षा और मदरसों में दी जा रही आतंकवादी शिक्षा को लेकर सरकार चुप है।

ईसाई समाज भी संगठित व आक्रामक नीतियां अपनाता है। इसलिए सभी जानते थे कि मदर टेरेसा धर्मान्तरण का कार्य करती थी फिर भी विदेश मंत्री से लेकर दो प्रदेशों के मुख्यमंत्री अपनी उपस्थिति दिखाने वेटिकन गए।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में भारत माता के दो बाजू तो पहले ही कट चुके हैं । कश्मीर के रूप में मस्तक पर भी खतरा मंडरा रहा है। आज यह हालात हैं तो सन 2030 में हालात कैसे होंगे ?
जब भारत की मुस्लिम आबादी 50% से अधिक हो जाएगी।

इसलिए हिंदुओं अभी भी समय है। जातिवाद छोड़कर एक हो जाओ। पार्टी के स्थान पर हिन्दू हित को प्रधानता दो।

अन्यथा......हिंदुओं का भविष्य खतरें में हैं !!!

!!! जागो भारत जागो !!!

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