रविवार, 25 सितंबर 2016

सनातन धर्म को नष्ट करने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं।

कड़वा सत्य
सनातन धर्म की रचना स्वयं विधाता ने की है ये धर्म अनन्त समय से चला आ रहा है जैसे जैसे समय बढ़ता गया बाकि धर्म भी बनने लगे । बहुत समय से सनातन धर्म को समाप्त करने के प्रयास तेजी से चल रहे है लेकिन आज तक कोई इसे समाप्त नहीं कर पाया । ना जाने कितने कष्ट सहन किये है हमारे पूर्वजों ने जो आज हम अपने आपको सनातन धर्मी कह पा रहे है । लेकिन आजका सनातनधर्मी हिन्दू भटक गया है क्योंकि उन्हें कोई पथ दिखाने वाला बचा ही नहीं । जो धर्म पुजारी है उनको भोग विलाश और नए नए करोडो के आश्रम बनाने से फुर्सत नहीं मिलती धर्म की स्थापना क्या खाक करेंगे । हमें समझ नहीं आता उन आश्रमो में होता क्या है क्योकि धर्म से सम्बंधित कोई बात तो होती नहीं । आज प्रमुख मठ जो शंकराचार्य जी ने अपने जीवन काल में स्थापित किये थे ये सोचकर की मेरे शिष्य होगे वो इनका प्रयोग धर्म स्थपना के लिए करेगे लेकिन उन्होंने सिर्फ इनको ऐसो आराम और भोग विलाश के लिए ही प्रयोग करने लगे, इनका खान पान रहन सहन देखो पूरा राजा महाराजो जैसा है तो फिर भगवा पहनकर लोगो को क्यों धोखा दिया जा रहा है । इन्होंने धर्म को बेच दिया है साधु का सीधा सा अर्थ है त्याग । जो शंकराचार्य जी हुए , महात्मा रविदास हुए, वाल्मिकी जी हुए वो उनके शिष्य कभी नहीं हुए उन्होंने इन महान आत्माओं का व्यापारीकरण कर दिया । और आज का समय देखो सनातन धर्म में रोज नए नए भगवान जन्म ले रहे है जिसे देखो भगवा पहनकर अपने आपको भगवान घोषित कर देता है ऐसा सिर्फ सनातन धर्म में ही हो रहा है क्योंकि हिन्दू टूट चुके है भटक चुके है अपनी बुद्धि का थोड़ा सा भी इस्तेमाल नहीं करते । कुछ संस्था जिन्होंने किताबे छापी और अपना प्रचार किया उन किताबो में कुछ अलग नहीं लिखा जो भी लिखा सनातन धर्म के ग्रन्थों से निकाल कर लिखा है । आज ब्रह्मकुमारी जिसे ॐ शांति कहते , राधा स्वामी , ॐ साई राम ये सब संस्था सनातन धर्म के विरुद्ध कार्य कर रही है और हिन्दू पागलो की तरह इनके अनुयायी बने जा रहे है । अगर ॐ शांति से ॐ निकाल ले राधा स्वामी से राधा निकाल ले ॐ साई राम से ॐ और राम निकाल ले तो इनका कोई अस्तित्व नही बचता । अगर सिर्फ सनातन धर्मियो का नाम जोड़ लेने से ये इतने प्रसिद्ध हो सकते है तो सोचो इनका नाम जपने से आपको कितना फल मिलेगा । आजतक जो भी हमारे वेद ग्रथो में लिखा है उसे कोई भी गलत सिद्ध नहीं कर पाया है इसी से हमारे धर्म की महानता का पता चलता है । हमारे ऋषि मुनियों ने जो कठिन तप करके अपनी सन्तानो के लिए ज्ञान अर्जित किया वो अनमोल है लेकिन उन्हें क्या पता था हमारी सन्ताने ही हमारा मजाक उड़ाएगी । जो भी इन संस्था से जुड़ा है वो मुझे बताये कोन सा नया ज्ञान प्राप्त किया है जो सनातन धर्म में नही है । और ये भगवान बने हुए है वो किस कारण आपको सनातन धर्म का त्याग करके अपने साथ शामिल होने को कह रहे है और ये आपको  कैसे मोक्ष दिला सकते है क्योकी मृत्यु तो इन नकली भगवान की भी होनी है तो फिर ये कैसे भगवान । भगवान तो तब माने जब ये अपनी इच्छा से अनन्त समय तक जवान रहे अपनी इच्छा से शरीर का त्याग करे । ऐसा कुछ नहीं कर सकते , प्रथम तो ये है जो अपने नाम के आगे जगत गुरु लगाए फिरते है उनको ये भी नही पता जगत गुरु का अर्थ क्या होता है जिसने जगत की रचना की भगवान शिव सिर्फ वही जगत गुरु है और कोई जगत गुरु नहीं हो सकता इनकी कुण्डली भी जागृत नहीं है ये भी सामान्य व्यक्ति की तरह मूलाधार में चक्र में सुप्त कुण्डलनी के साथ जी रहे है । इतना पाखण्ड फैला हुआ हुआ है धर्म के नाम पर की कहना मुश्किल है और लोग ये सोचते है हमे धर्म से क्या लेना जिस दिन ये धर्म आपके सर से हट गया उस दिन पता चलेगा इसका महत्व । जब लोग जंगलो में नंगे घूमते थे तब भारतवर्ष के लोग घर बना कर रहते थे और आज ये लोग सनातन धर्म को ज्ञान का पाठ पढ़ाने चले है । ये आज के ऐसे भगवान है 1 अपराधिक मामला दर्ज होते ही अपने आपको जेल से नहीं निकाल पाते और अपने आपको भगवान बताते है । ऐसे पाप कर्मियों की आत्मा अनन्त समय तक भटकेगी और जो ऐसे लोगो के अनुयायी बने है सनातन धर्म का त्याग करके वो इससे भी ज्यादा भटकेंगे । जैसे ही आप सनातन धर्म का त्याग करते है आपके ऊपर से आपके पितृ, इष्ट, कुलदेव सबकी किरपा हट जाती है आपके पितृ प्रेत योनि में चले जाते है जिससे उनकी आत्मा को बहुत दुःख पहुचता है । इसलिये कभी भी सनातन धर्म का त्याग मत करना जिसको थोड़ा सी भी संका हो वो भगवद् गीता का पाठ करे आपको सत्य का बोध होगा । ऐसी किसी भी संस्था के अनुयायी ना बने जो आपको सनातन धर्म छोड़ने को कहे अरे पागल इंसान जो अपने आपको जगतगुरु बता कर बैठा है उसे तो तेरा नाम भी नही पता तुझे मोक्ष कैसे दिलाएगा ।  मेरा कार्य आपको सत्य बताना है आगे आपका कार्य किस राह पर चलना है ।

जय महाकाल

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मित्रों आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी में कुछ भी हो सकता हैं, बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।