स्वयं के मुँह से स्वयं को कट्टर हिन्दू कहने वालों का हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के लिए अथाह प्रेम और सम्मान कम से कम मेरी समझ से परे है ......
इनके पिता का नाम सोमेश्वर सिंह था ,, वो ब्रिटिश आर्मी में नौकरी करते थे ... उन्होंने अंग्रेजों की रक्षा के लिए विदेशो में जा कर जंग लड़ी ...
फिर स्वयं ध्यानचंद , , ये ब्रिटिश फ़ौज में शामिल हुए ... ठीक उस समय जब भगत सिंह , बिस्मिल , आज़ाद , बटुकेश्वर , राजगुरु , सुखदेव गुलामी की लोहे की जंजीरों को अपनी हड्डियों से तोड़ने का प्रयास कर रहे थे ....
फिर इन्होंने जितने भी खेल में अपना जलवा दिखाया वो सब गुलाम भारत में अंग्रेजों के अधीन काल के थे ,,,,
*वायसराय कमीशन सिर्फ उसे मिलता था जो अंग्रेजों के प्रति कुत्ते से भी ज्यादा वफादारी दिखाता था ,,, ब्रिटिश मेजर ध्यान चन्द को ये सम्मान मिला था*.....
द्वितीय विश्व युद्ध ,, जिसका फायदा उठा कर महान सुभाष चन्द्र बोस अंग्रेजों को भारत की मिट्टी में दफ़न कर देना चाहते थे , उस विश्व युद्ध में इन ध्यानचंद जी को अंग्रेजों के प्रति जबरदस्त स्वामिभक्ति दिखाने के कारण प्रमोशन दिया गया था ........निश्चित रूप से सुभाष चन्द्र बोस की हार में योगदान देने के लिए ......
गुलाम भारत में अंग्रेजो को ताबड़तोड़ खेल दिखाने वाले ध्यानचंद जी ने तथाकथित स्वतन्त्रता आते ही और अंतिम वायसराय माउंटबेटन के इंग्लैण्ड वापस जाते ही इन्होंने खेल से संन्यास ले लिया ....
ध्यानचंद के पूजक तथाकथित राष्ट्रवादियों ,, यदि इनका सम्मान जायज़ है तो मोहनदास गांधी में क्या कमी है ?
सुभाष चन्द्र बोस , भगत सिंह , बिस्मिल , आज़ाद , राजगुरु , सुखदेव के कट्टर दुश्मन को पूजने वाले तथाकथित हिंदुओं ......
हिंदुत्व की इस दुर्दशा के पीछे मुसलमान से भी अधिक तुम स्वयं जिम्मेदार हो ।।।।।।।।।।।।
-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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