भोपाल के गायत्री मंदिर में नमाज पढ़ी जाती है तो सामाजिक सद्भावना का उदाहरण......... आगरा के हनुमान मंदिर में दो मुस्लिम महिलाओं को नवाज पढ़ने दी जाए तो गंगा-जमुनी तहजीब........ मुम्बई के एक गणेश पंडाल में ठीक गणेश जी की मूर्ति के सामने नमाज पढ़ी जाती है तो हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल वाह...... लेकिन फीरोजाबाद में एक मस्जिद के सामने विवेकानंद जी की मूर्ति को ढक दिया जाए तो सब चुप्प, खामोश, सबकी जुबान हलक से चिपक जाती है......... न सेक्युलर रोये और ना मीडिया में मातम मना, क्यों भई, मंदिर पंडालों में जब नमाज़ पढ़ने दी जाए तो वो सामाजिक सद्भावना, गंगा जमुनी तहजीब, हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल हो जाती है लेकिन स्वामी विवेकानंद की मूर्ति को ढ़क दिया जाए तो सबकी जुबानों को लकवा मार जाता है....... इसे भी तो कोई उपमा दो, इसके लिए भी तो कोई जुमला सुझाओ, इस बात पर भी तो कोई tv डिबेट बुलाओ.............
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हम ही मंदिरों से लाउड स्पीकर उतारें, हम ही अपनी शोभा यात्राओं का रास्ता बदलें, हम ही अजान के लिए आरती रोक दें, हम ही नमाज़ पढ़ने के लिए अपने मंदिरों के दरवाजे खोलें और आखिर में हम ही साम्प्रदायिक कहलायें....... क्या सांप्रदायिक सद्भावना बनाये रखने की जिम्मेदारी सिर्फ हम हिंदुओं की है इस देश में....... तुम्हारे लिए हम ही हर कुर्बानी दें और बदले में तुम हमारे महापुरुषों, देवी-देवताओं से इतनी नफरत करो कि उनका मुंह देखना तक बर्दाश्त नहीं कर पाओ.......... क्या इतना कमजोर है तुम्हारा खुदा और तुम्हारा मजहब........... ??
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ए ईमान वालो क्या तुम्हारा अल्लाह इतना बुजदिल है कि एक बुत से घबरा जाता है या तुम इतने डरपोक हो कि एक बुत के पास ठीक से नमाज भी नहीं पढ़ सकते......... फीरोजाबाद में एक बुत की वजह से तुम्हारी नमाज़ कुबूल नहीं हो पाती लेकिन भोपाल, आगरा और मुम्बई के मंदिर-पांडालों में मूर्तियों के चरणों में बैठकर तुम्हारी नमाज़ क़ुबूल हो जाती है.............. ऐसा क्यों भई.........??
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कहीं ऐसा तो नहीं कि हिन्दुस्थान के अलग अलग शहरों में अलग-अलग इस्लाम चलता हो....... भोपाल, आगरा, मुम्बई में अलग इस्लाम और फीरोजाबाद में अलग इस्लाम...........
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एक किताब और एक खुदा को मानने वालों का ऐसा दोगला स्टैण्डर्ड क्यूं है ??
-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
राष्ट्र-धर्म रक्षा के लिए भारत स्वाभिमान दल के सदस्य बने
http://www.bharatswabhimandal.org
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