सोमवार, 13 जून 2016

कैराना कैराना कैराना ?

जब 80% हैं तो सोते हैं.
जब 8% हुए तो लात खा के रोते हैं..
ये जो रहा है यही नियति है.. "धर्म शिक्षा के अभाव में हिन्दू धर्म पतन के चरम पर है,अतः विनाश होना ही है"... हम तो गोपिकाओं वाले कृष्ण को पूजेंगे क्योंकि चक्र वाले कृष्ण तो अहिंसा रूपी नामर्दानगी के पीछे छिप गए हैं. गलती किसी मुसलमान या गांधीवादियों की नहीं, गलती आप की है जिस दिन पहली लड़की का रेप हुआ उस दिन अगर 80% इकठ्ठा हो जाते तो आज #कैराना नहीं होता...
मगर हमें क्या पडोसी की लड़की का रेप हुआ, पडोसी दुकानदार से रंगदारी मागी गयी क्योंकि वो हिन्दू है, मगर हमारे लिए पंडित, बनिया, तेली, अहीर, चमार है, फिर एक दिन पडोसी की हत्या हो गयी... हमें क्या?? आज पडोसी का बचा खुचा परिवार घर छोड़ कर चला गया...... अगला नंबर मेरा आ गया... अब दूसरा पड़ोसी कह रहा है हमें क्या?? होने दो इसकी बेटी का रेप... मरने दो इसे... हमारा कोई लेना देना नहीं... और ये क्रम चलता रहा... देर सबेर सबका नंबर आया और आप 80% से 8% होते गए... पहले पाकिस्तान से... बांग्लादेश से... कश्मीर से ,आसाम से, पश्चिम बंगाल से... मेवात से..... सैकड़ो नाम है.... कैराना उसी की अगली कड़ी है...
इस्लाम तो प्रकृति से ही विस्तारवादी और अग्रेसिव है, अरब साम्राज्यवादी विचारधारा है... ईराक के सिंजर से लेकर अफ्रीका का नाइजीरिया... सीरिया से लेकर पाकिस्तान सब इसके गवाह हैं... मगर आप का "गांडीव", " सुदर्शन" और "वज्र" कहाँ चला गया???? किसी मुसलमान को कोसने से पहले आत्मविश्लेषण जरूरी है ऐसा कैसे संभव है की 80% लोगो को 20% लोग लात मार के भगा दे और 80% जनता नपुंसक बनी रहे... गद्दार हमारे में है... आज कैराना को छिपाने या दबाने की सबसे ज्यादा कोशिश कौन कर रहा है?? कोई मुसलमान तो नहीं कर रहा?? मैंने अब तक किसी बड़े मुसलमान नेता का बयान इस पर नहीं सुना... क्योंकि उन्होंने जो किया वो उनकी स्वाभाविक प्रकृति का हिस्सा है... अतः कोई अफ़सोस नहीं... न कश्मीर पर था... न गोधरा के ट्रेन में जले लोगो का था, न ही कैराना पर है... मगर ये तथाकथित "हिन्दू" ही सेकुलर फ़ौज लेकर कैराना को छुपाने दबाने पर लगे हैं... यही पतन की प्रकाष्ठा है...
मैं धर्म के प्रति समर्पण के मामले में पिशाच धर्मी "इस्लाम के अनुयायियों " की इज्जत करता हूँ... घटना बर्मा में होती है मगर विरोध बिहार से लेकर लखनऊ तक होता है... सबके अपने अपने विरोध का तरीका है आप "चरखा कात के" और "अहिर पंडित तेली चमार बामन बनिया" खेल कर विरोध करते हैं वो 10-15 धमाके कर के विरोध कर देते हैं जिससे आगे कोई आँख न उठाये इसकी चेतावनी सबको मिल जाये..
नपुंसको बोलो जय अहिंसा, जय अम्बेडकर, जय गांधी, जय सेक्युलरिज्म ??

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन

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