आजकल ये नाम काफी सुनने को मिलता है, दुनिया भर के कई विद्वान दुनिया की समस्याओं के लिए काफी हद तक ‘इल्लुमिनाती’ को जिम्मेदार मानते हैं, हालाँकि इसे मानने वालों की संख्या काफी नगण्य है या कह सकते हैं करोड़ो में कोई एक मिलेगा जो इसके बारे में, इसके Principles के बारे में, इसके Tactics के बारे में व इसके प्रभाव के बारे में बात करता मिलेगा,
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ऐसे लोगों की बातों की ओर ध्यान देने वालों की संख्या बेहद कम होती है क्योंकि ये सामान्य मनुष्य के मानसिक स्तर से ऊपर की बातें होती हैं और Sheeples की दुनिया में इक्का दुक्का ही मिलेंगे जिन्होंने दुनियादारी से खुद को बचाए रखा है और सोचने की शक्ति रखते हैं,
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अगर बात करें ‘इल्लुमिनाती’ की तो : इल्लुमिनाती के बारे में बताया कम बल्कि डर और भ्रम ज्यादा फैलाया गया है, ऐसा भी देखा गया है जहाँ Conspiracy Theorists को सबूत नहीं मिलते वहां ‘इल्लू’ का नाम लेकर काम चला लेते हैं, जिस कारण सत्य थोड़ा दूर हो जाता है और अविश्वसनीयता कम होती है, इल्लुमिनाती को ज्यादातर लोग एक सेक्रेट सोसाइटी मानते हैं, हालांकि वो गलत नहीं हैं लेकिन फिर भी सत्य से जरा दूर हैं,
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इल्लुमिनाती कोई सेक्रेट सोसाइटी या संस्था नहीं है बल्कि एक ‘माहौल’ का नाम है जिसे कुछ Satanic Powers ने खड़ा किया है, Illuminati शब्द लैटिन के Illuminatio से लिया गया है, Illuminati = Illumination अर्थात प्रकाशित (ज्ञात हो कि हमारे देश भारत का अर्थ भी ‘प्रकाशित’ ही होता है) लेकिन फर्क यह है कि Illuminati दानवी शक्तियों का प्रकाश है और भारत दैवीय शक्तियों का, जहां Illuminati को Satanic Powers ने मिलकर बनाया है वहीं ‘भारत’ को ऋषियों ने, आर्यों ने,
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इल्लुमिनाती के लिए कार्य रहे लोगों का मुख्य लक्ष्य भारत (दैवीय प्रकाश) को ही समाप्त करना है, जिसके लिए वे सैकड़ों वर्षों से कार्यरत हैं, इसकी सफलता का राज यह है कि मानसिक तौर गुलाम ओ चुके Sheeples को इसका प्रभाव दिखाई नहीं पड़ता क्योंकि उनकी सोचने की छमता खत्म हो चुकी है, वो सिर्फ वही फॉलो करते है जो दुनिया करती है जिस कारण ना ही मात्र यह माहौल लगातार बढ़ रहा है बल्कि धरती से सकारात्मक शक्तियों का खात्मा करता जा रहा है,
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दानवी शक्तियों ने लगभग पूरी दुनिया में कब्जा जमाया और हर जगह सफलता प्राप्त की, आस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में करोड़ों लोगों का नरसंहार किया और वहां के मूलनिवासियों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया, कारण पता किया जाय अगर कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया तो सब कुछ साफ़ हो जाता है? लेकिन वो भारत के साथ ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि भारत की बाजुएँ इतनी मजबूत थीं और हैं कि आमने सामने की लड़ाई में इस धरती पर कोई हमसे नहीं टकरा सकता,
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जिस कारण दानवी शक्तियों ने नई ‘स्ट्रेटेजी’ अपनाई, तरह तरह की युक्तियाँ लगाकर भारत को बर्बाद करने की, पहले यहाँ की संस्कृति खत्म की, शिक्षा व्यवस्था खत्म की, गरीबी भुखमरी को जन्म दिया, भारत के उद्दोग धंधे बर्बाद किये, इतिहास खत्म किया, फर्जी इतिहास प्लांट किया, बॉलीवुड, क्रिकेट, लोकतंत्र व चुनावी नाटक, कुकुरमुत्तो की भांति समाज व जनता की सेवा के लिए नेता उग आये लेकिन आजतक देश का भला ना कर सके, इन सब में भारतीयों को व्यस्त कर दिया गया, जो लोग मुफ्त में किसी को अपना बुखार नहीं देते आज वो दुनिया को अपनी टेक्नोलॉजी दिए जा रहे हैं, फ्री में दुनिया को पोर्न दिया जा रहा है, जिन लोगों की दो वक्त की रोटी जुटाने की औकात नहीं वो एके 47 और एसएलआर चला रहे हैं
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हम इसे ‘इल्लुमिनाती’ का प्रभाव कहें या कुछ और लेकिन यह तो स्वीकारना ही होगा कि आज दुनिया ‘दानवी शक्तियों’ की जद में है जिसने मानव जाति को अपना गुलाम बना लिया है,
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हमारा खान-पान, रहन-सहन, जीने का तरीका सब बदल गया है, हमारे जीवन में मशीनों ने चमत्कारिक रूप से ऐसी घुसपैठ कर ली है कि हमें मानवों से ज्यादा मशीनों व गैजेटो से प्रेम हो गया है
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जहां हम पहले जिया करते थे वहीं अब हमारा जीवन नोट कमाने में सीमित रह गया है और जितना कमाओ उतना ही कम, गरीब तो खाने के लिए कमाता ही है अमर और अमीर होने के लिए कमाता है, जिस चक्कर में ना गरीब अपना जीवन जी पाता है ना अमीर,
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नोटों का चलन तो चला ही दिया गया है लेकिन नोट मिलना मुश्किल है फिर भी इसके उपर अगर नोट मिल भी जयं मेहनत करके तो नोटों को फिर से खींचने के जुगाड़ भी बन गये हैं,
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रोटी कपड़ा और मकान ऐसी चीजें हैं जिसे प्रकृति ने पूरे प्राणी जगत को प्रदान किया हुआ है, धरती पर कोई भी जीव भूखा नहीं मरता सिवाय मनुष्य के, धरती पर कोई भी जीव खाने के लिए पैसे नहीं कमाता और ना ही घर बनाने के लिए मिटटी खरीदता है,
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अपने देश का ही उदाहरण लें, हमारा देश ऐसे देशों में आता था जो भोगवाद या उपभोक्तावाद के मायाजाल के बजाय अध्यात्मिकता और जीवन जीने की कला सिखाता था लेकिन आज हम भी अन्य की तरह वही कर रहे हैं जो हमसे कोई करवाना चाहता है, गधे से हम खच्चर होते जा रहे हैं लेकिन हमें पता भी नहीं चल्र रहा हम कहाँ जा रहे हैं,
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दुनिया का हर देश नियमों में बंधा है, कि वो सिर्फ ये कर सकता है इससे ज्यादा नहीं, अगर कोई देश अपनी मनमर्जी करता है या इन शक्तियों की राह में बाधा बनता है तो उसका क्या हाल होता है हम कुछ देशों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं,
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दुनिया के सबसे अमीर देश भी कर्जे में, दुनिया के सबसे गरीब देश भी कर्ज में फिर साहूकार कौन ? पहले हम कहीं भी आ जा सकते थे ना वीजा की जरूरत ना पासपोर्ट की लेकिन अब पचास तरह की कागजी कार्यवाही, आखिर इन नियमों ने जन्म कहाँ से लिया ???
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हम फिर कहते हैं Illuminati कोई सेक्रेट सोसाइटी या ख़ुफ़िया संगठन नहीं बल्कि एक माहौल है एक प्रकाश है जिसका आसीमित प्रभाव आज आपके जीवन पर है, जो आज दुनियाभर में फैला हुआ है और ये प्रकाश अर्थात Illumination फ़ैलाने वाले कौन से लोग हैं और वो चाहते क्या है ........अगले भाग में
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(ये लेख शायद ज्यादातर लोगों की समझ में ना आये, इसमें उनका दोष नहीं है, क्योंकि उन्हें सोचना नहीं सिखाया जाता, सिर्फ बताया जाता है)
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