जो संविधान सब को धारण करने वाले धर्म से ही निरपेक्ष हो, उसे हटाकर, धर्म सापेक्ष संविधान की रचना होनी चाहिए...!!
*********************************************
हिंदू धर्म शास्त्र से सनातन धर्म का एक उदाहरण प्रस्तुत है..
संविधान धर्म निरपेक्ष है अर्थात -
"धृति क्षमा दमोस्तेय च शौच इन्द्रियनिग्रह ।
धी विद्या सत्य अक्रोधम दशकं धर्म लक्षणं" ,
इन लक्षणों का पालन करना साम्प्रदायिकता है धर्मनिरपेक्ष संविधान में /
धृति - धैर्य
क्षमा - क्षमा भाव को हृदयंगम करना
दम - 5 कर्मेन्द्रियों पर नियंत्रण
स्तेय - चोरी न करना
शौच - शारीरिक और मानसिक सुचिता या शुद्धता
इंद्रियनिग्रह - 5 ज्ञानेन्द्रियों पर नियंत्रण
धी - बुद्धि विवेक
विद्या - ज्ञान
सत्य - truth
अक्रोधम - क्रोध पर नियंत्रण
इन दश लक्षणों को यदि आपने अपने जीवन में धारण किया तो आप असंवैधानिक और communal होंगे /
तो आप का विवेक क्या कहता है...धार्मिक होना श्रेयस्कर है या सम्वैधानिक..??
- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
मित्रों आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी में कुछ भी हो सकता हैं, बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।