शुक्रवार, 3 जून 2016

जन-गण-मन अधिनायक जय हे

जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता
पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्कल-बंग
विन्ध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशिष मांगे
गाहे तव जय गाथा
जन-गण-मंगलदायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय-जय-जय, जय हे
पतन-अभ्युदय-वन्धुर-पंथा
युग-युग धावित यात्री
हे चिर-सारथी
तव रथचक्रे मुखरित पथ दिन-रात्रि
दारुण विप्लव-माँझे
तव शंखध्वनि बाजे
संकट-दुख-श्राता
जन-गण-पथ-परिचायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय-जय-जय, जय हे
घोर-तिमिर-घन-निविड़-निशीथ
पीड़ित मूर्च्छित-देशे
जागृत दिल तव अविचल मंगल
नत-नत-नयन अनिमेष
दुस्वप्ने आतंके
रक्षा करिजे अंके
स्नेहमयी तुमि माता
जन-गण-मन-दुखत्रायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय-जय-जय, जय हे
रात्रि प्रभातिल उदिल रविच्छवि
पूरब-उदय-गिरि-भाले
साहे विहंगम, पूर्ण समीरण
नव-जीवन-रस ढाले
तव करुणारुण-रागे
निद्रित भारत जागे
तव चरणे नत माथा
जय-जय-जय हे, जय राजेश्वर, भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय-जय-जय, जय हे
अंग्रेज राजा "जार्ज पंचम्" को सादर समर्पित - रविन्द्रनाथ टैगोर

रविन्द्र नाथ टैगोर ने आज के दिन ( ) में अंग्रेज राजा की स्तुति लिखी थी , जिससे खुश होकर अंग्रेज राजा ने उनको, उनकी दुसरी किताब को बिना पढ़े ही नोबल प्राइज दिलवा दिया था.
अंग्रेज राजा की स्तुति आजाद भारत में भी निरंतर चलती रहे इसके लिए आपके कथित चाचा ने उसको राष्ट्रगान बनवा दिया था .

- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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वन्दे मातरम्

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