धर्मनिष्ठ और सेक्युलर में वही अन्तर है जो एक सुहागन और वैश्या में होता है ।
सुहागन अपने पति के प्यार में पक्की होती है । पति के घर को छोड़ किसी दूसरे के यहाँ देखना भी पसंद नहीं करती । ठीक वैसे ही धर्मनिष्ठ भी अपने
धर्म-कर्तव्य के प्रति निष्ठावान होता है और इधर उधर दूसरे के धर्म में जाना पसंद नहीं करता ।
वैश्या एक कोठे से दूसरे कोठे पर सभी मर्दों के प्यार को पाती है और दुतकारी जाती है । ठीक वैसे ही सेक्युलर न तो अपने ही धर्म का होता है न
दूसरे का ।
कुत्ते की तरह कभी इधर कभी उधर....
🔵धर्मनिष्ठ बनके रहोगे तो शेर भी घबरायेंगे 🔵
🚩सनातन संस्कृति संघ🚩
जिस गांव में बारिश न हो, वहाँ की फसलें खराब हो जाती है.
*और जिस घर मैं धर्म के संस्कार न हो, वहाँ की नस्लें खराब हो जाती है....*
🔴⛳🚩*जय श्री राम......🚩⛳🔴
🔵🚩भारत स्वाभिमान दल🚩🔵🚩
भारत के परमवैभव हेतु समर्पित। राष्ट्रीय अध्यक्ष - राष्ट्रीय सनातन पार्टी
सोमवार, 6 जून 2016
धर्मनिष्ठ और सेक्युलर में क्या भेद है ?
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