आप शायद ही जानते हों कि अनेक बड़े बड़े उद्योगपतियों के घरों में आज भी हाथ की चक्की का आटा और मिट्टी के बर्तनों बना भोजन प्रयोग होता है. आज वैज्ञानिकों के शोध से ये सिद्ध हुआ है कि हाथ की चक्की से प्राप्त आटा अनेक बिमारियों को दूर करके आपको स्वस्थ रख सकता है. आइए देखें : दादी के हाथ की रोटी में स्वाद, शक्ति और हमारी सेहत का खजाना छुपा था, जिसे आधुनिकता की चकाचौंध में हम भूलते गए। जब न संतोष आया और न तृप्ति मिली तो कुछ हाईप्रोफाइल परिवारों ने मोटा खाना, मोटा पहनना की परंपरा को अपनाया। हाथ की आटा चक्की से आटा तैयार करने लगे और मिट्टी के बर्तन में भोजन बनने लगा तो जिंदगी और सेहत दाेनों शानदार हो गई। हो भी क्यों नहीं। इसके वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रभाव जो हैं। हम आपको एेसे ही कुछ परिवारों से रूबरू करा रहे हैं, जो खुद नौकरीपेशा और बच्चे भी बड़े ओहदों पर हैं, लेकिन थाली पर आधुनिकता जरा भी हावी नहीं। और तो और रोटी-सब्जी भी मिट्टी के बर्तनों में बनाते हैं। सेक्टर सहित पॉश एरिया में कई परिवारों में हाथ की चक्की से आटा निकाला जाता है। उनका कहना है कि घर में पिसा आटा ठंडा निकलता है, जबकि बाहर की चक्की का आटा इतना गर्म हो जाता है कि उसके सारे पोषक तत्व जल जाते हैं।
स्वाद की खातिर अपनाया रास्ता :-
ससुर कोऑपरेटिव विभाग में इंस्पेक्टर तथा सास लेक्चरर पद से रिटायर। पति भी एयरफोर्स से वीआरएस लेकर आए हैं। हाई प्रोफाइल परिवार से होने के बाद भी मधुबाला हाथ की चक्की से रोजाना आटा पीसती हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें यह पसंद नहीं था। एक बार सास रिश्तेदारी में चली गईं और उनके हाथों का पिसा आटा खत्म हो गया। बाहर की चक्की से आटा पिसवाया, लेकिन रोटी में स्वाद ही नहीं आया। जिसके चलते मैंने भी घर में ही आटा पीसना शुरू कर दिया। इससे घर में ही मेरी कसरत हो जाती है और मैं पूरा दिन चुस्त महसूस करती हूं।
मिट्टी के बर्तन में 18 सूक्ष्म पोषक तत्व
सेक्टर-3 निवासी दीपक खत्री के घर में आज दाल, रोटी सभी मिट्टी के बर्तन में ही बनता है। जिसके लिए मिट्टी का स्पेशल तवा बनाया जाता है। इसमें महीन-महीन छेद होते हैं, जिससे रोटी न तो जलती है न ही चिपकती है। उनका कहना है कि खेत की उपजाऊ मिट्टी से बने बर्तन में 18 सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा कांसा, पीतल व लोहे के बर्तन पर बना भोजन भी शरीर को पोषण देता है, जबकि एल्युमिनियम व कुकर का इस्तेमाल करना शरीर के लिए हानिकारक है।
पता चली खूबी तो चलने लगी हाथ की चक्की
पति सोनीपत में सिंचाई विभाग के अधिकारी हैं, लेकिन रोटी हाथ की चक्की से पिसे आटे की ही खाते हैं। सेक्टर-3 निवासी कृष्णा देवी का कहना है कि जब उन्हें हाथ की चक्की के आटे के गुण पता चले तो घर में चक्की लगा ली। इसके प्रयोग से हमारे पूरे शरीर की कसरत हो जाती है, जिसके लिए लोग जिम में हजारों रुपए खर्च करते हैं।
सास की डगर पर चली बहू
74 वर्षीय कृष्णा देवी में युवाओं से कम जोश नहीं है। खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करती हैं। उन्होंने बताया कि हाथ की चक्की चलाने पर न सिर्फ हाथ ही चलते हैं, बल्कि पेट, नसें व गर्दन की भी कसरत होती है। इंजीनियर बेटे को भी हाथ की चक्की से पिसी रोटियां पसंद हैं, इसलिए बहू भी हाथ की चक्की से ही आटा पीसती है।
अगर आप बाजार के आटे की बजाय घर में ताजा पिसे आटे का इस्तेमाल करें तो इससे शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व तो मिलेंगे ही, साथ ही सेहत भी दुरुस्त रहेगी। ताजा आटा विटामिन बी और विटामिन ई से भरपूर होता है।
जब घर में ताजा पिसा आटा होता है तो हर किसी की इच्छा होती है कि वह घर की बनी हुई स्वादिष्ट चपातियों का आनंद ले। घर पर पिसा ताजा आटा विटामिन बी और विटामिन ई से पूरी तरह भरपूर होता है। इस आटे में फाइबर भी होता है, जो कि शरीरिक पोषण के लिए आवश्यक है। यही नहीं, ताजा पिसा आटा साफ व रुचिकर तो होता ही है, साथ ही इससे आप अन्य चीजें बनाते हैं तो उनका स्वाद भी बढ़ा देता है और शरीर में आसानी से पच भी जाता है। न्यूट्रीशनिस्ट्स मानते हैं कि जो आटा ताजा पिसा हुआ होता है, उसमें पौष्टिक तत्त्व उन आटों से बहुत ज्यादा होते हैं, जो कुछ दिनों या सप्ताहों पुराने हैं। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे खुद के लिए और अपने परिवार के लिए ऐसे आटे का इस्तेमाल करें जो पौष्टिकता और स्वाद में सबसे बेहतर हो, और ये पोषण संबंधी लाभ मिलेंगे सिर्फ नटराज होम फ्लोर मिल से।
घरेलू आटा चक्की के फायदे :-
घर में ताजा पिसा आटा मिलेगा।
ताजे पिसे हुए आटे में स्वास्थ्य से जुड़े फायदे तो मिलते ही हैं, इसका स्वाद व सुंगध भी बरकरार रहते हैं।
शुद्धता के मामले में घरेलू आटा चक्की का आटा शत प्रतिशत खरा होता है।
इसके बने आटे में शरीर के लिए पोषण संबंधी सभी आवश्यक तत्व मौजूद रहते हैं। वैसे शरीर को अपना काम करने के लिए 49 पोषक तत्वों की रोजाना आवश्यकता होती है।
सबसे बड़ी बात यह कि जब जरूरत हो तब आटा पीस लें।
सबसे बड़ा फायदा यह कि फसल के मौसम में पूरे साल के लिए अनाज खरीद लें, जो सस्ता भी पड़ेगा और पूरे साल शुद्ध ताजे आटे की रोटियां का मजा लेंगे।
- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
सनातन संस्कृति संघ का सहयोगी संगठन
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