जानिये सत्य
1-परशुराम जी की शत्रुता सिर्फ महिष्मती के हैहय वंशी अर्जुन से थी जिसने उसके पिता का वध किया था। परशुराम जी ने हैहय वंश के क्षत्रियो का विनाश किया था न कि सभी क्षत्रियो का।
2-ये घटना भगवान श्रीराम से भी पहले की है अगर उससे पहले ही क्षत्रिय खत्म हो गये होते तो अयोध्या का सुर्यवंश जिसमें दशरथ राम लक्ष्मण और मिथिला के जनक जैसे दुसरे क्षत्रिय वंश कैसे बचे रहे? जबकि जब भगवान शिव जी का धनुष टूटा था तो वहां परशुराम जी के आने और उनके लक्ष्मण से वाद विवाद कैसे होता?
3-उसके बाद महाभारत काल में भी परशुराम जी के पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा भीष्म और कर्ण को युद्ध की शिक्षा देने का वर्णन आता है। अगर पहले ही सभी क्षत्रिय खत्म हो गये होते तो महाभारत काल में जो अनेक क्षत्रिय वंश थे वो कहाँ से आ गये?
4-उपरोक्त से स्पष्ट है कि परशुराम जी द्वारा क्षत्रियो के पूर्ण विनाश की कथा पाखण्डी पॉपों द्वारा सनातन धर्म के रक्षक वीरों का मनोबल तोड़ने के लिए गढी है जो सत्य नहीं है।
5-परशुराम जी की शत्रुता जिस हैहय वंश से थी उसका भी पूर्ण विनाश नहीं हुआ था बल्कि सह्स्त्रजुन के पुत्रको महिष्मती की गद्दी पर बिठाया गया था। आज भी हैहय वंश के लोग बलिया जिले में मिलते हैं। हैहय वंश की शाखा कलचुरी क्षत्रिय है जो आज भी छतीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मिलते हैं।
आप ही बताओ कि अगर सभी क्षत्रिय को परशुराम जी ने खत्म कर दिया होता तो रामायण और महाभारत के काल में क्षत्रिय वंश कहाँ से आ गये?
यदि परशुरामजी के जन्म का समय निर्धारित किया जाये तो उन्होनें भगवान राम से बहुत पहले जन्म लिया था। और उस समय कार्तवीर्य के अत्याचारों से प्रजा तंग आ चुकी थी। कार्तवीर्य उस समय अंग आदि 21 बस्तियों का स्वामी था परशुराम ने शस्त्र धारण करके कार्तवीर्य को मार दिया और इस संघ को जीतकर कश्यप ऋषि को दान में दे दिया।
भारत के परमवैभव हेतु समर्पित। राष्ट्रीय अध्यक्ष - राष्ट्रीय सनातन पार्टी
सोमवार, 13 जून 2016
क्या सच में परशुराम जी ने किया था धरती को क्षत्रियविहीन..?
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