🚩🕉सनातन संस्कृति संघ🕉
भारत, सनातन धर्म- संस्कृति व स्वदेशी के प्रचार- प्रसार के लिए कार्यरत संगठन
👊🏻|| संघे शक्ति सर्वदा ||👊🏻
संगठनात्मक एकता में ही सदैव शक्ति होती है |
💥धर्म युद्ध💥
यह धर्म युद्ध भारत को जोड़ने वालों और भारत को जाति पंथ सम्प्रदाय में बाटने वालों के बीच है | हम जोड़ने वाले जाति पंथ सम्प्रदाय की हथकड़ियों को तौड़कर धर्म के झंड़े तले भारतीयों को एक करने का प्रयत्न कर रहे है | और बाटने वाले जाति पंथ सम्प्रदाय को मजबूत कर रहे है | जब जाति पंथ सम्प्रदाय में बाटने वाले बाटने में हार नहीं मान रहे है, तो हम भारतीयों को एक करने वाले एक करने में साहस क्यों हारे ?
वो जाति पंथ सम्प्रदाय में तौड़ेगे, हम राष्ट्र धर्म संस्कृति से जोड़ेगे |
मानवता की स्थापना के लिए भारतीयों को जाति पंथ सम्प्रदाय से छुटकारा दिलाना आवश्यक है, क्योंकि मनुष्य में जाति पंथ सम्प्रदाय है ही नहीं, यदि जाति पंथ सम्प्रदाय मनुष्य में होते तो दलित का खून दलित में, यादव का खून यादव में, जाट का खून जाट में, ब्राह्मण का खून ब्राह्मण में, बनिये का खून बनिये में, ठाकुर का खून ठाकुर इत्यादि में ही चढ़ता और अन्य जाति पंथ सम्प्रदाय में न चढ़ता | इसलिए वास्तव में जाति पंथ सम्प्रदाय का कोई अस्तित्व ही नहीं हैं | कितना आश्चर्य है कि हिन्दू- मुसलमान बन जाता है, हिन्दू- ईसाई बन जाता है, हिन्दू- बौद्ध बन जाता है लेकिन यादव- ब्राह्मण नहीं बन पाता ?ब्राह्मण- यादव नहीं बन पाता ? दलित- ठाकुर, जाट, ब्राह्मण, गुर्जर, कुर्मी, लोधी इत्यादि नहीं बन पाता ? कैसा दुर्भाग्य है कि हम धर्म छोड़ सकते है, लेकिन जाति पंथ सम्प्रदाय नहीं ! जाति पंथ सम्प्रदाय के कारण हम एक नहीं हो पाये, इसीलिए कई सौ वर्षो तक विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा और हमारा शोषण व हम पर अत्याचार हुए |
इसलिए जाति पंथ सम्प्रदाय की प्रधानता भारतीयों के लिए बेहद खतरनाक है | हमने जाति पंथ सम्प्रदाय में बट कर देख लिया कि हमारा उत्थान हुआ या शोषण |
अपने उत्थान के लिए अब हमारे साथ, सनातन संस्कृति संघ के साथ जाति पंथ सम्प्रदाय की गुलामी से बाहर निकलकर देखों, उद्धार उत्थान निश्चित है, संसार में हम सबसे श्रेष्ठ है लेकिन जाति पंथ सम्प्रदाय ने हमारा सत्यनाश किया हुआ है |
भारतीयों को एक करने में हमारा साथ दो
जो शीश मुझे दे सके, वो मेरे साथ आइये | धर्म क्रान्ति के लिए मुझे कई अर्जुन चाहिए ||
स्वतन्त्र है हम सब, तो ऐसा अंधकार क्यों | मशाल थाम सके जो मुझे वो हाथ चाहिए ||
शपथ है तुम्हे पवित्र भूमि के अन्न की | जो प्राण अपने दे सके, वो युवा मुझे चाहिए ||
माँ, बहन, बेटी, स्त्री तो है ओर भी | रणचण्डी जो बन सके, वो रूप मुझे चाहिए ||
बुलंद जिनके हौसले, इरादे हो चट्टान के | खून जिनका गर्म हो, मुझे वह लहू चाहिए ||
धर्म क्रान्ति दशा- दिशा रख देगी बदलकर | जो संघर्ष से न डिगे, ऐसे योद्धा मुझे चाहिए ||
-विश्वजीत सिंह अनन्त
सनातन संस्कृति संघ द्वारा संचालित धर्म युद्ध के मुख्य लक्ष्य:-
1. भारत व सनातन धर्म- संस्कृति की रक्षा व सम्वर्द्धन करना |
2. भारतीयों का नैतिक व चारित्रिक उत्थान करते हुए देश की समस्त भ्रष्ट व्यवस्थाओं, गलत नीतियों, साम्प्रदायिक असमानता व भ्रष्टाचार को मिटाकर बेरोजगारी, गरीबी, भूख, अभाव व अशिक्षा से मुक्त स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत का पुनर्निर्माण करना |
3. संसार के जन कल्याणार्थ मानवीय, नैतिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों को निजी, व्यवसायिक तथा सार्वजनिक जीवन में बढ़ावा देना |
इससे पंचदेव (विद्यार्थी, मजदूर, किसान, कर्मचारी, व्यापारी) की खुशहाली लौट आयेगी | भय, भूख, असमानता, भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जायेगा | और पंच देवों में समता बढ़ेगी, क्षमता बढ़ेगी, नम्रता बढेगी |
भारत व सनातन संस्कृति की रक्षा व सम्वर्द्धन के लिए संगठन से जुड़े, सनातन संस्कृति संघ आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करता है |
|| जो बोले सो अभय, सनातन धर्म की जय ||
रजि. कार्यालय:- म. नं. 60, गली नं. 1- ए, शहीद भगत सिंह कॉलोनी, करावल नगर, दिल्ली- 110094
http://www.sanatansanskritisangh.blogspot.com/ , E-mail:- sanatansanskritisangh@gmail.com
Mobile: 08755762499, 08535004500
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