गुरुवार, 2 जून 2016

मुस्लिम औरतों की एक पुकार, हमें भी दो बराबर अधिकार..

हिना ज़हीर नक़वी, यूपी ही नहीं संभवतः भारत की भी पहली मुस्लिम महिला क़ाज़ी हैं, एवं असल मायनों में भारत की मुस्लिम महिलाओं के लिए चिंतित हैं, वे 'भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन' के ना सिर्फ साथ खड़ी हैं बल्कि अब तक पूरे देश से 'तीन बार तलाक' कह देने मात्र के इस्लामिक नियम के विरुद्ध हैं, व इस हेतु दायर याचिका के समर्थन में देशभर से 50 हज़ार मुस्लिमों के हस्ताक्षर करवाने में महती भूमिका निभा चुकी हैं।
उन्होंने सीधे तौर पर देश के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने का आग्रह किया है, वे चाहती हैं कि मुस्लिम महिलाओं को इस 'पुरुषवादी इस्लामिक' सोच व जहालत से मुक्ति मिले और ये वाज़िब भी है, क्योंकि कुरान की आयत का स्त्री को भोग की वस्तु मानने वाले मुल्ले-काज़ियों ने इसका गलत मतलब निकाला व अपने हित में जमकर दुरूपयोग भी किया जिससे मुस्लिम महिलाओं अ जीवन नरक बनकर रह गया...अब जबकि कई मुस्लिम देश तक इस कुप्रथा को त्याग चुके हैं, यहाँ तक कि पाकिस्तान जैसा अति पिछड़ा व असफल राष्ट्र तक अपने देश की मुस्लिम महिलाओं का जीवन बचाने के लिए इस अटपटे नियम को कानून के ज़रिये अप्रासंगिक कर चुका है तो भारत जो सदियों से स्त्री को पूज्य मानता रहा, उसके अधिकार व स्वतंत्रता की बात करता रहा हो ऐसे घटिया नियम व कुप्रथा को कैसे बर्दाश्त कर सकता है? ....समस्त हिंदूवादीयों को, प्रगतिशील मुस्लिमों, नास्तिकों, वामपंथियों को, कांग्रेस, आप, TMC, सपा, बसपा सभी को इस हेतु स्वर तेज़ करना चाहिए और वास्तविक रूप से स्त्री के पक्ष में खड़े होना चाहिए....और जो ऐसा नहीं करते वे किस मुँह से स्त्री अधिकार की बात करते हैं, उनका स्वांग नहीं तो और क्या है ये? आज आरएसएस स्त्री अधिकार की सुरक्षा के उद्देश्य से मुस्लिम बहनों के साथ खड़ा है....समय की मांग है कि बाकी लोग भी अपने राजनैतिक द्वेष भुलाकर मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में एक मंच पर आएं।
हिना ज़हीर नक़वी ने एक बड़ी पहल की है, ये केवल मुस्लिम महिलाओं की बात नहीं है बल्कि समस्त स्त्री जाति के माथे पर लगा कलंक है, उन्हें नारकीय जीवन में झोंकने का खड्यंत्र है....हमें इसके लिए सामने आना ही होगा, मैं इनके साथ हूँ, मैं स्त्री के अधिकार का पक्षधर हूँ, मैं मौखिक तौर पर तलाक देने का सख्त विरोध करता हूँ, मैं मुस्लिम महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का पक्षधर हूँ....और आप?
हमें चाहिए मौखिक तलाक़ से आज़ादी,
हमें चाहिए बुर्क़े से आज़ादी,
मुस्लिम औरतों की एक पुकार, हमें भी दो बराबर अधिकार..

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