1757 में तो एक मीर जाफ़र था आज हिंदुस्तान में हज़ारो मीर जाफ़र है.
हम 1757 में ही अंग्रेजो पर विजय पा लेते, उसके बाद अरब साम्राज्यवादी मुस्लिम आक्रांताओं को भी भारत से शीघ्र ही मार भगाते, हमारा अपना संविधान होता और २०० वर्षो का संघर्ष हमको झेलना न पड़ता १७५७ से १९४७ तक, और उस २०० वर्ष के संघर्ष को झेलने के लिए ६ लाख लोगों का जो बलिदान हमको देना पड़ा, वो बच गया होता. चाफेकर बंधू, भगत सिंह, चंद्रशेखर, उधम सिंह, तांत्या टोपे, मैना, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चन्द्र बोस, ऐसे- ऐसे नौजवानों का बलिदान दिया है ये कोई छोटे मोटे लोग नहीं थे. सुभाष चन्द्र बोस तो आईपीएस टोपर थे, सावरकर चाहता तो ऐश्वर्य का जीवन जी सकता था, बड़े बाप का बेटा था. भगत सिंह और रामप्रसाद बिस्मिल की भी यही हैसियत थी. चाहते तो जिन्दगी की, जवानी की रंगरलियां मानते और अपनी नौजवानी को ऐसे फंदे में नहीं फ़साते. ये सारे वो नौजवान थें जिनका खून इस देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. ६ लाख ऐसे नौजवानों का बलिदान जो हमने दिया, वो नहीं देना पड़ता. और अंग्रेजों- मुसलमानों की जो यातनाए सही, जो अपमान हमने बर्दास्त किया, वो नहीं करना पड़ता अगर एक आदमी नहीं होता, मीर जाफ़र. लेकिन चूँकि मीर जाफ़र मुसलमान था, मीर जाफ़र का लालच था, कुर्सी का और पैसे का, उस लालच ने इस देश को २०० वर्ष के लिए संघर्ष की दिशा में धकेल दिया.!!*
1757 में तो एक मीर जाफ़र था आज हिंदुस्थान में हज़ारो मीर जाफ़र है. जो देश को वैसे ही स्थिति बनाने में लगे हुए है जैसे मीर जाफ़र ने बनायी था, मीर जाफ़र ने क्या किया था, विदेशी कंपनी से समझौता किया था बुला के, और विदेशी कंपनी से समझौता करने के चक्कर में उसे कुर्सी मिली थी और पैसा मिला था. आज जानते है हिंदुस्थान का जो नेता प्रधानमंत्री बनता है, हिंदुस्थान का जो नेता मुख्यमंत्री बनता है वो सबसे पहला काम जानते है क्या करता है ? प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है और कहता है विदेशी कंपनी वालो तुम्हारा स्वागत है, आओ यहाँ पर और बराबर इस बात को याद रखिए ये बात 1757 में मीर जाफ़र ने कही थी ईस्ट इंडिया कंपनी से कि अंग्रेजो तुम्हारा स्वागत है, उसके बदले में तुम इतना ही करना कि मुझे कुर्सी दे देना और पैसा दे देना. आज के नेता भी वही कह रहे है, विदेशी कंपनी वालों तुम्हारा स्वागत है.*
*और हमको क्या करना, हमको कुछ नहीं, मुख्यमंत्री बनवा देना, प्रधानमंत्री बनवा देना. 100– 200 करोड़ रूपये की रिश्वत दे देना, बेफोर्स के माध्यम से हो या एनरोंन के माध्यम से हो. हम उसी में खुश हो जाएँगे, सारा देश हम आपके हवाले कर देंगे. ये इस समय चल रहा है. और इतिहास की वही दुर्घटना दोहराइ जा रही है जो 1757 में हो चुकी है. जब एक ईस्ट इंडिया कंपनी इस देश को २००– २५० वर्ष इस देश को संघर्ष करने का कारण बना सकती है, लुट सकती है तो आज तो इन मीर जफरो ने 6000 विदेशी कम्पनियो को बुलाया है. सोचों! यह क्या नहीं कर सकती ?
🚩देश के अमर बलिदानियों के सपनों के स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए भारत स्वाभिमान दल के सदस्य बनकर अपना सक्रीय योगदान दें।
लॉगइन करें:
http://www.bharatswabhimandal.org/member.php
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
मित्रों आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी में कुछ भी हो सकता हैं, बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।