गाँधी : भारतवासियों! शत्रु से प्यार करो और उस पर पूर्ण विश्वास रखो।
सावरकर : शत्रु पर प्यार या विश्वास भूल से भी मत करो।
गाँधी : अहिंसा का रास्ता अपनाओ। कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे करो।
सावरकर : आत्मरक्षा हिंसा नहीं कहलाता। मूर्ख हिन्दुओं! एक गला कटा तो आगे करने के लिए दूसरा गला बचेगा ही नहीं।
गाँधी : मैं एक हिन्दू हूँ और हिन्दुओं के सभी भगवान शांति का सन्देश देते हैं।
सावरकर : तुम खोखले हिन्दू हो। प्रभु श्रीराम के हाथ में धनुष है तो श्रीकृष्ण के हाथ में सुदर्शन चक्र है।सज्जनों की रक्षार्थ ईश्वर को भी शस्त्र धारण करने पड़ते हैं।
गाँधी : शस्त्र उठाना नितांत अनुचित है। शत्रु से लड़ने की बजाय उसके दुर्गुणों से लड़ो।
सावरकर : युद्ध में गुण-अवगुण नहीं तलवारें टिकी रहती हैं और जीतती भी हैं। सीमायें तलवारों से निर्धारित की जाती है गुणों-अवगुणों से नहीं।
गांधी : तलवारें तो होनी ही नहीं चाहिए। ह्रदय परिवर्तन पर विश्वास रखो और शत्रु का दिल जीत लो।
सावरकर : जो आपकी हत्या करने की ठान चुका हो उसका दिल जीता नहीं जा सकता। हे हिन्दुओं! अफज़ल खान का ह्रदय परिवर्तन संभव नहीं था तभी तो शिवाजी को उसका ह्रदय चीरना ही पड़ा।
अब आप ही चुनें कि इनमें से आपको कौन सा रास्ता सही लगता है..
गांधी
या फिर
सावरकर
आखिर आप स्वयं ही आपके जीवन के शिल्पकार हैं
भारत के परमवैभव हेतु समर्पित। राष्ट्रीय अध्यक्ष - राष्ट्रीय सनातन पार्टी
सोमवार, 11 जुलाई 2016
आपको कौन सा रास्ता सही लगता है.. गांधी या सावरकर
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