महाभारत का युद्ध केवल युद्ध नहीं, धर्मयुद्ध था, जो धर्मसंस्थापनार्थाय (धर्म की संस्थापना) जैसे पवित्र उद्देश्य के लिए क्षल प्रपंच एवं प्रत्येक सम्भव कूटयुद्धनीति से लड़ा गया भीषण युद्ध था | हलांकि कौरव दल में संसार के विख्यात और सर्वश्रेष्ठ योद्धा थे | यदि योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को सत्य-असत्य और पाप-पुण्य के मकड़जाल में उलझाते तो पता नहीं आज इतिहास और मानव जाति का अस्तित्व क्या होता |
इसलिए धर्मसंस्थापनार्थाय जैसे पावन उद्देश्य को अपने मन मस्तिष्क में रखिए, सही गलत के मकड़जाल में उलझे बिना धर्म के साथ रहिए |
स्मरण रखिए धर्म की जय होने और अधर्म का नाश होने के उपरान्त ही प्राणियों में 'सद्भावना' और 'सहिष्णुता' आएगी और तब ही विश्व का कल्याण हो पायेगा |
योगेश्वर श्री कृष्ण की जय
================
जो बोले सो अभय सनातन धर्म की जय
=========================
सनातन संस्कृति संघ/भारत स्वाभिमान दल
भारत के परमवैभव हेतु समर्पित। राष्ट्रीय अध्यक्ष - राष्ट्रीय सनातन पार्टी
रविवार, 20 नवंबर 2016
महाभारत का युद्ध केवल युद्ध नहीं, धर्मयुद्ध था
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
मित्रों आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी में कुछ भी हो सकता हैं, बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।