आज गोपाष्टमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ !.......
गोपाष्टमी कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है और भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है। गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्रीकृष्ण का अतिप्रिय नाम 'गोविन्द' पड़ा। इस दिन प्रात:काल गौओं को स्नान करा कर तथा गंध - धूप - पुष्प आदि से पूजा करें और अनेक प्रकार के वस्त्रालंकारों से अलंकृत करके ग्वालों का पूजन करें, गायों को गो-ग्रास देकर उनकी प्रदक्षिणा करें तो सभी प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती हैं। गोपाष्टमी को सांयकाल गायें चरकर जब वापस आयें तो उस समय भी उनका अभिवादन और पूजन करके उनकी चरण रज को माथे पर धारण करें। गाय हमारी संस्कृति की प्राण है। यह गंगा, गायत्री, गीता, और गोविन्द की तरह पूज्य है। गौ सेवा, गौ रक्षा बिना सनातन धर्म की रक्षा असम्भव हैं। शास्त्रों में कहा गया है- 'मातर: सर्वभूतानां गाव:' यानी गाय समस्त प्राणियों की माता है। दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता पृथ्वी पर साक्षात देवी के समान हैं। सनातन धर्म के ग्रंथों में कहा गया है- 'सर्वे देवा: स्थितादेहे सर्वदेवमयी हि गौ:।' गाय की देह में समस्त देवी - देवताओं का वास होने से यह सर्वदेवमयी है।
पुन: सनातन संस्कृति संघ तथा भारत स्वाभिमान दल की ओर से सभी को गोपाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
-श्री चैतन्य शिव (विश्वजीत सिंह अनंत)
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