गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

अधर्म और अन्याय को देखकर भी प्रतिकार न करना पाप हैं

योगेश्वर प्रभु श्रीकृष्ण ने सिर्फ दुर्योधन और दुशासन जैसे अपराधियों का ही नहीं बल्कि भीष्म और द्रोणाचार्य जैसे महात्माओं के भी वध का आदेश अर्जुन को दिया था ....
सिर्फ इसलिए क्योंकि अधर्म फैला रहे दुर्योधन को रोकने के लिए इन दोनों महात्माओं ने अपने जीवन में कभी एक भी प्रयास नहीं किया और सर झुका कर सारा पाप देखते रहे ....
ठीक इसी प्रकार आज भारत माँ को खून से नहलाता मुसलमान , उलेमा, मौलाना, मुफ़्ती , इमाम निश्चित रूप से मृत्युदण्ड के भागी हैं ,,
पर प्रभु श्री कृष्ण के सिद्धांतों से इस हिन्दू नरसंहार पर चुप बैठ कर अपना पेट और बैंक दोनों भर रहे अनगिनत ढोंगी, पाखण्डी, कुकर्मी, स्वार्थी मठाधीश, धर्माचार्य, महामंडलेश्वर, जगतगुरु , महंथ भी भीष्म और द्रोण की तरह वध के पात्र हैं ।।
क्योंकि अधर्म और अन्याय को देखकर भी उत्तरदायी मनुष्य यदि मौन है तो वो भी उस अन्याय और अधर्म के लिए उतना ही दोषी है जितना कि विधर्मी स्वयं।।।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मित्रों आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी में कुछ भी हो सकता हैं, बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।