संगीत की कोई सरहद नहीं होती.....
न कला की ... न कलाकार की........ न मोहब्बत की.....
तो फिर कौन सी सरहद बचाने के चक्कर में मर रहे वो बावरे भी........
अरे भई.....
ए सी से ताप नियन्त्रित चिकनी नक़्क़ाशी वाली चार दिवारी से थोड़ी न दिख जायेगी सरहद......
पीओके वाली लाइन पर जाके एक दिन बस तैनात हो जाओ......
सारी सरहदें दोपहर के घाम की तरह साफ़ हो जायेगीं........
और कला संगीत की महानता वाला सारा नशा भी खटाक से उतर जायेगा....
तब तक आपको कोई अधिकार नहीं सरहद को नकारने का.......
काहे कि हम न तो पंछी हैं न नदिया और न ही पवन के झोंके.................
#सलमान_खान_योगी_आदित्य_नाथ_ओम_पुरी
भारत स्वाभिमान दल
भारत के परमवैभव हेतु समर्पित। राष्ट्रीय अध्यक्ष - राष्ट्रीय सनातन पार्टी
सोमवार, 24 अक्टूबर 2016
संगीत की कोई सरहद नहीं होती.....
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
मित्रों आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी में कुछ भी हो सकता हैं, बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।